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Hugh Hefner के जीवन के सफलता की कहानी

9 अप्रैल 1926 को जन्में ह्यू हेफनर के मन में एक वयस्क मैगजीन निकालने का विचार आया, जिसकी वजह से वे मशहूर और दौलतमंद हो गए। जब वे स्क्वायर मैगजीन में कॉपीराइटर थे, तभी उनके मन में एक ऐसी मैगजीन निकालने का विचार आया, जिसमें लोगों के लिए कुछ रोचक और नया हो।

1953 में उन्होंने 600 डॉलर का बैंक लोन किया और परिवार वालों तथा दोस्तों से 8000 डॉलर उधार लेकर प्लेबॉय प्रकाशित की।  आज दुनिया भर में मशहूर प्लेबॉय मैगजीन का पहला अंक हेफनर ने अपने किचन के टेबल पर तैयार किया था। इसमें मर्लिन मुनरो का एक धाँसू कैलेण्डर फोटो था।

जब दिसम्बर 1953 में प्लेबॉय मैगजीन का पहला अंक बाजार में आया, तो हेफनर को यह अंदाजा नहीं था कि उनकी यह क्रांतिकारी पत्रिका कितनी लोकप्रिय होगी। उन्हें यह पता नहीं था कि वे अगली पत्रिका कब निकाल पायेंगे, इसलिए उन्होंने जान – बूझकर पत्रिका के कवर पर तारीख नहीं छापी थी। जब पहले अंक की सभी 53,991 प्रतियां बिक गयी, तो उन्हें बहुत सुखद आश्चर्य हुआ।

1950 और 1960 के दशक में यह पत्रिका बेहद लोकप्रिय हुई। अपनी सफलता के बारे में हेफनर कहते हैं, मेरा इरादा कभी क्रांतिकारी बनने का नहीं था। मेरा इरादा तो केवल पुरूषों के लिए एक रोचक पत्रिका शुरू करने का था।

यह बहुत क्रांतिकारी विचार साबित हुआ। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि तब हम बहुत ही दमित समाज में रहते थे। महिलाओं के चित्रों और सनसनीखेज लेखों के दम पर पाठकों का दिल जीत लिया। 1970 के दशक में 60 लाख की आमदनी हुई।

कुछ ही समय में हेफनर ने इतना पैसा इकट्ठा कर लिया कि एक जेट विमान और शिकागो के गोल्ड कोस्ट पर 70 कमरों का प्लेबॉय महल खरीद सकें। हेफनर ने एक अवसर देखकर उसका दोहन किया और उसे करोड़ों डॉलर के उद्योग में बदल दिया।

जनवरी 1956 तक प्लेबॉय की प्रसारण संख्या 5 लाख हो गयी और 1959 में 10 लाख तक पहुँच गयी। 2002 में प्लेबॉय की प्रसारण संख्या 31 लाख हो चुकी थी। प्लेबॉय की प्रसारण संख्या बढ़ने से हेफनर की व्यक्तिगत संपत्ति भी बड़ी और 20 करोड़ डॉलर हो गयी। हालांकि अगर वे अपनी फिजूलखर्ची की आदत को कम कर लेते तो यह आंकड़ा इससे बहुत ज्यादा होता। जब 1982 में हेफनर ने अपनी बेटी क्रिस्टी को अपना कारोबार सौंपा, तो प्लेबॉय सिर्फ एक पत्रिका ही नहीं थी।

यह तो एक वृहद उद्योग बन चुकी थी, जिसमें कई पत्रिकाएँ, केबल टेलीविज़न, वीडियोस और परिधान व्यवसाय शामिल थे। हेफनर ने बाजार की जरूरत को समझा और विरोध की परवाह किये बिना उस जरूरत को पूरा कर दिया। इसी कारण वे अमीर और मशहूर बन गए। हेफनर का विद्रोह काफी सफल रहा, क्योंकि उस युग में पुरूष हर क्षेत्र में स्वतंत्रता चाहते थे।

प्लेबॉय में हेफनर लीग से हटकर तस्वीरें और लेख छापे। पुरुषों के सपनों को साकार करने वाली प्लेबॉय रंगीन और चिकने कागज़ पर छपी तस्वीरों के बदौलत तत्काल सफल हो गयी और हेफनर दौलत में खेलने लगे।

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