Home / ज्ञानवर्धक कहानियाँ / तेनालीराम का अद्भुत डंडा – हिंदी कहानी
tenali ram ka danda
tenali ram ka danda

तेनालीराम का अद्भुत डंडा – हिंदी कहानी

एक गाँव में एक ऐसी औरत रहती थी जो प्रतिदिन शाम को अपने पति को जूतों से पीटा करती थी।  इस औरत की एक बेटी भी थी उसकी उम्र विवाह योग्य हो गयी, तो उसके लिए वर की खोज शुरू हो गयी। लड़की गुणवान एवं रूपवती थी। परन्तु उसकी माँ की बुराई के डर से उसके साथ कोई विवाह करने को राजी नहीं होता था। कहीं उसकी बेटी भी अपने पति के साथ ऐसा ही व्यवहार न करने लगे। प्रत्येक नगर और गाँव में इस जूता मारने वाली औरत की चर्चा फ़ैल गयी थी।

इधर तेनालीराम की कीर्ति भी सब और फ़ैल गयी थी। उसके शत्रु उससे वैरभाव रखते थे। एक दिन सलाहकार लोगों ने किसी न किसी बहाने तेनालीराम को नीचा दिखाने का निश्चय किया। तेनालीराम के रिश्तेदार भी उससे मन ही मन ईर्ष्या रखते थे।, इसलिए उन्होंने भी अपनी खुन्नस मिटाने के लिए इसे अच्छा अवसर समझा।

एक दिन तेनालीराम अपने समस्त कार्यों से निबटकर घर में बैठे थे कि उसी समय एक पुरोहित उनसे मिलने आया। तेनालीराम ने उसे आदर के साथ आसन पर बैठाया।

ये भी पढ़ें: ढीले स्तन का आसान जादुई इलाज

थोड़ी देर इधर – उधर की बातें करने के बाद पुरोहितजी बोले, वह औरत जो अपने पति को नित्य दस जूते मारा करती हैं, उसे तो आप भली – भाँति जानते ही होंगे। उसके एक बहुत रूपवती बेटी हैं। उससे कोई विवाह नहीं करता। सबको यही भय हैं कि कहीं वह भी अपनी माँ के समान आचरण न कर बैठे। यदि आप उससे विवाह कर लें तो आपकी बहुत ख्याति हो जाएगी।

तेनालीराम ने उसके कहने का आशय समझ लिया और कहा, आपका कहना उचित हैं, परन्तु मेरा एक विवाह तो हो चुका हैं और दूसरा करने की मेरी इच्छा नहीं हैं इसलिए मैं उससे विवाह नहीं कर सकता। किन्तु हाँ मेरा एक छोटा भाई हैं, जो इन दिनों काशी पढने को गया हैं, यदि उसके साथ लड़की का रिश्ता हो जाए तो मैं सहर्ष तैयार हूँ।

यह सुनकर पुरोहितजी प्रसन्न होते हुए तेज – तेज उस औरत के घर पहुंचे और अपने आने का मंतव्य कह सुनाया। सुनते ही वह औरत बहुत प्रसन्न हुई और उसने तेनालीराम के भाई के साथ अपनी लड़की का रिश्ता स्वीकार कर लिया।

उसने जल्द से जल्द पुरोहितजी से शादी का दिन निश्चित करने को कह दिया।

ये भी पढ़ें: चार्ल्स श्वाब की सफलता का राज

लेकिन तेनालीराम का कोई सगा भाई न था। जब विवाह की तारीख निश्चित हो गयी, तब वह एक अनाथ नौजवान को ढूँढने लगा। दो – तीन दिन ढूंढते – ढूंढते उसको एक ऐसा नवयुवक मिला, जो बहुत पढ़ा – लिखा था और पेट पालने की चिंता में विजयनगर आया हुआ था।

तेनालीराम ने उस युवक को अपने घर पर ही रख लिया और एक दिन कहा, मैं तुम्हारा विवाह भी करवा दूंगा और तुम्हारे जीवन निर्वाह का उचित प्रबंध भी कर दूंगा। परन्तु इन सब बातों के लिए तुम्हें मेरा भाई बनना पड़ेगा, यदि तुम इस बात के लिए तैयार हो, तो मैं अपने कदम आगे बढाऊं।

तेनालीराम की यह बात सुनकर वह युवक अत्यंत प्रसन्न हो गया और उसने तेनालीराम का यह प्रस्ताव सहर्ष स्वीकार कर लिया।

थोड़े ही दिनों बाद दोनों की शादी हो गयी और जब वह लड़की ससुराल जाने को तैयार हुई, तभी माँ ने उसे एक जूता देते हुए शिक्षा दी, बेटी तू मेरी सच्ची बेटी हैं, तो मुझसे भी अधिक अपने पति पर अपना रोब ग़ालिब कर लेना। मैं तो अपने पति को हर रोज दस जूते मारती हूँ, परन्तु तुझको अपनी बहादुर बेटी तब मानूँगी जब तू अपने पति को रोज पंद्रह जूते मारा करेगी और यदि तू मेरे कहने के अनुसार नहीं चलेगी तो मैं जिन्दगी भर तेरा मुंह नहीं देखूंगी।

ये भी पढ़ें: सिर्फ दो मिनट में दांत होगा चमकदार – करें ये उपाय

उस लड़की ने अपनी माँ की यह बात गाँठ बाँध ली।

उस औरत ने अपने पति को भी उसे ससुराल पहुँचने के लिए भेजा।

लड़की के ससुराल पहुँचते ही तेनालीराम ने ऐसा रूप बना लिया, जिससे वह लड़की भयभीत होकर थर – थर कांपने लगी।

तेनालीराम ने उस लड़के को भी चिडचिडे स्वभाव का होकर रहने को समझा दिया था।

तेनालीराम और अपने पति, दोनों के स्वभाव में चिडचिडापन और क्रोध देखकर उस लड़की ने डर के मारे अपने माँ द्वारा दिया जूता चुपके से एक कोने में फेंक दिया। अपने पति को मारने की बात उसके सपने में भी नहीं आयी।

ये भी पढ़ें: तुरंत करें गुटखा से तौबा, कैंसर की बीमारी के साथ मर्दानगी भी खतरे में

एक दिन भोजन करने के उपरान्त तेनालीराम और उस लड़की का पिता बातें कर रहे थे। उस समय तेनालीराम ने बिलकुल अनजान बनकर उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए पूछा, भाई साहब ! आपकी पीठ पर ये गड्ढे जैसे क्यों पड़ गए हैं ?

यह सुनकर लड़की के पिता ने सारी व्यथा कह सुनाई। तेनालीराम ने उसकी व्यथा सुनकर बहुत खेद प्रकट किया और कहा, मेरे दिमाग में एक विचार आया हैं।

अगर आप उस पर अमल करें तो बताऊँ।

उस लड़की के पिता साहब तैयार हो गए। तेनालीराम ने उसको चार माह तक अपने यहाँ रहकर नित्यप्रति प्रातः काल सूर्य को साष्टांग प्रणाम करते रहने के लिए कहा।

अगले दिन से वह तेनालीराम की आज्ञानुसार नित्यप्रति सूर्य को साष्टांग प्रणाम करने लग गया।

तेनालीराम उसको अच्छा खासा खिलाता भी था जिससे थोड़े ही दिनों में उसका शरीर खूब मजबूत हो गया।

ये भी पढ़ें: Eugene schueller L’Oréal के संस्थापक

जब वह हृष्ट – पुष्ट एवं तगड़ा हो गया, तब तेनालीराम ने एक बढई को बुलाकर एक डंडा बनवाया। इस डंडे में गांठों के ऊपर लोहा जड़वा दिया।

तेनालीराम ने वह डंडा उसको देकर उसका नाम गुरूभाई रखा और जरूरत पड़ने पर उसको किस प्रकार काम में लाना चाहिए, उसे अच्छी तरह समझा दिया और फिर घर वापस भेज दिया।

अपने पति को इतने दिनों बाद आया हुआ देखकर उस औरत को बहुत खुशी हुई उसने इतने समय तक उस पर पड़ने वाले जूतों का हिसाब लगा रखा था।
उसका पति भी हृष्ट – पुष्ट होकर पहलवान सरीखा दिखाई देता था, यद्यपि वह बेचारा बहुत दूर से थका – हारा आया था, परन्तु उस औरत ने उसकी कोई कुशल क्षेम न पूछी और न ही उसका उचित सत्कार ही किया।

ये भी पढ़ें: ज्याँ – क्लाड डेकॉक्स ने स्ट्रीट फर्नीचर की दुनिया पर राज किया

उसने आते ही उसको जूता मारने के स्थान पर बैठने का हुक्म सुना दिया। बेचारा पति अपने गुरूभाई द्वारा प्रदत्त डंडे को छिपाये हुए उस स्थान पर जाकर बैठ गया।

उस औरत ने जूता मारने के लिए ज्यों ही हाथ उठाया, त्यों ही उसने अपनी पत्नी को ऐसे जोर से डंडा मारा कि उसका सर फट गया और वह लहुलूहान हो गयी।

डंडे की चोट की पीड़ा से वह तिलमिला उठी – अरे रे, मार डाला। और तड़फड़ाकर जमीन पर जा गिरी।

जब उसके पति ने दूसरा डंडा मारा तो वह और भी जोर से चिल्लाने लगी। उसकी चिल्लाहट सुनकर अड़ोस – पड़ोस के लोग इकट्ठे हो गए और उसके पति को मारने से रोकने लगे।

अपने पति का यह रौद्र रूप देखकर वह औरत इतनी सहम गयी कि उस दिन से उसकी हर आज्ञा का पालन करने लगी।

इस तरह वह पति जो बेचारा अपनी पत्नी से रोज जूतों की मार खाता था, तेनालीराम की सूझ से खुशहाल हो गया।

ये भी जरुर पढ़ें: 

अतिसार या अजीर्ण की चिकित्सा न करने पर संग्रहणी रोग होता है

पेचिश की जानकारी ही बेहतर इलाज

दस्त ( अतिसार ) का घरेलू इलाज़

वमन रोग का आसान उपचार

अम्लपित्त का घरेलू असरदार उपाय

अफारा व पेट दर्द का शानदार घरेलू उपचार

About admin

आपने कीमती समय देकर ब्लॉग पढ़ा धन्यबाद, ये पोस्ट आपको पसंद आया हो तो शेयर करना न भूले, ताकि इसे ज्यादा से ज्यादा लोग पढ़ें, अपना विचार जरूर लिखे, इससे हमें और ज्यादा अच्छी और लेटेस्ट जानकारियाँ लिखने के लिए प्रेरित करेगा.

One comment

  1. http://www.freeprachar.com के द्वारा पूरी दुनिया में अपने बिज़नेस का प्रचार करें TOTALLY FREE

Leave a Reply