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किसानों का आथित्य Hindi kahani

राजा कृष्णदेव जब भी कहीं जाते, तेनालीराम को अवश्य अपने साथ ले जाते। बिना तेनाली के वह अपने आप को अधूरा सा समझते थे। उनकी इस बात से अन्य दरबारियों को बड़ी चिढ होती थी। एक दिन कई दरबारियों ने एक साथ मिलकर महाराज से प्रार्थना की, राजन ! कभी …

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नववर्ष का आगमन – हिंदी कहानी

नववर्ष के आगमन पर राजा कृष्णदेव ने अपने दरबार में कहा, नववर्ष होने वाला हैं। मैं चाहता हूँ कि इस वर्ष जनता को कोई नई भेंट दी जाए। आप लोग बताइये, कि वह भेंट क्या हो सकती हैं। राजा कृष्णदेव की यह बात सुनकर सभी उपस्थित जनों में खुसर – …

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कुबड़ा धोबी हिंदी कहानी

एक दिन तेनालीराम के कानों में भनक पड़ी कि एक दुष्ट आदमी साधु का भेष धारण कर लोगों को अपने जाल में फंसाता हैं और उन्हें प्रसाद में धतूरे का बीज खिलाकर लूट लेता हैं। यह काम वह उन लोगों के शत्रुओं के कहने पर धन के लालच में किया …

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ब्राह्मण की भटकती आत्मा

तेनालीराम को महाराज ने मृत्युदंड दिया हैं , यह खबर पूरे राज्य मे आग की तरह फैल गयी। लेकिन यह कोई नहीं जानता था कि तेनालीराम जीवित हैं और अपने घर में सुरक्षित रूप से छिपा हुआ हैं। लोगों में खुसर – फुसर होने लगी – एक छोटे से अपराध …

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सीमा की रक्षा – ज्ञान से भरपूर कहानी

विजयनगर में पिछले कई दिनों से तोड़ – फोड़ की घटनाएं बढ़ती ही जा रही थी। कृष्णदेव राय इन घटनाओं से काफी चिंतित थे। उन्होंने शीघ्र ही परिषद् की बैठक बुलाई  और इन घटनाओं को रोकने के बारे में गहनता से विचार – विमर्श शुरू कर दिया। हमारे पड़ोसी राज्य …

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राजगुरू और चुगलखोर दरबारी

विजयनगर राज्य का एक दरबारी तेनालीराम से बहुत रूष्ट रहता था। बात ही बात में तेनालीराम ने उससे कुछ ऐसी बात कह दी थी जो उसे बहुत ही बुरी लगी थी इसलिए मन ही मन वह तेनालीराम से बदला लेने का कोई उचित अवसर देखने लगा। राजगुरू से तो तेनालीराम …

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दीपावली का उत्सव – ज्ञान से भरपूर कहानी

दीपावली का त्यौहार निकट ही था, तब राजा कृष्णदेव ने राजदरबार में उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों से कहा, क्यों न इस बार दीपावली का त्यौहार कुछ ढंग से मनाया जाए। और ऐसा आयोजन किया जाए कि जिसमें बच्चे – बड़े सभी की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। आपका विचार तो अति …

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बगीचे की सिंचाई – हिंदी कहानी

एक बार विजयनगर राज्य में भीषण अकाल पड़ गया। चारों और त्राहि – त्राहि मची थी। फसलें सूख गयी थी। हरियाली का कहीं नामो – निशान नहीं था। वर्षा थी कि होने का नाम नहीं ले रही थी। विजयनगर राज्य में तेनालीराम का घर तुंगभद्रा नदी के किनारों पर था। …

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पुरोहितजी की तपस्या ज्ञान्बर्धक कहानी

एक बार राजा कृष्णदेव के राज्य में बड़ी भयंकर ठण्ड पड़ी। राजदरबार भी इस ठण्ड से अछूता नहीं रहा था सर्वत्र ठण्ड की ही चर्चा हो रही थी। तभी एक पुरोहित ने महाराज को अपनी राय दी, महाराज यदि इन दिनों यज्ञ किया जाए तो उसका परिणाम बड़ा ही फलदायी …

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राजा कृष्णदेव का प्यारा तोता

एक दिन किसी व्यक्ति ने राजा कृष्णदेव को एक तोता भेंटस्वरुप दिया यह तोता बड़ी मीठी वाणी बोलता था और लोगों के प्रश्नों के उत्तर भी देता था। राजा को यह तोता बहुत ही पसंद आया। उन्होंने उसके पालन – पोषण और उसकी रक्षा का भार अपने एक विश्वस्त सेवक …

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मरियल घोड़ा – हिंदी कहानी

mariyal ghoda

राजा कृष्णदेव और चतुर तेनाली अपने अपने घोड़ों पर सवार होकर सैर के लिए निकले। राजा का घोड़ा अरबी नस्ल का बढ़िया घोड़ा था। जिसकी कीमत भी काफी थी। इधर तेनालीराम का घोड़ा एकदम मरियल सी अवस्था का वह बड़ी ढीली ढाली चाल से चल रहा था। तेनालीराम अगर अपने …

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सबसे बड़ा मूर्ख – ज्ञानवर्धक हिंदी कहानी

विजयनगर के राजा कृष्णदेव होली का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया करते थे। उस दिन मनोविनोद के अनेकों कार्यक्रमों का आयोजन उनके नगरों में होता था। प्रत्येक कार्यक्रम के सबसे अच्छे कलाकार को उचित पारितोषिक भी प्रदान किया जाता था। सबसे बड़ा तथा सबसे मूल्यवान पुरस्कार महामूर्ख की उपाधि पाने …

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अंतिम इच्छा हिंदी कहानी

antim eachha

विजयनगर के ब्राह्मण लालची प्रवृत्ति के थे वे सदैव किसी न किसी बहाने से अपने राजा से धन ऐंठते रहते थे। राजा की उदारता का वे अनुचित लाभ उठाते थे। एक दिन दरबार में राजा कृष्णदेव से एक पंडित ने कहा, महाराज मरते समय मेरी माँ ने आम खाने की …

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सत ना छोड़ो रे मना ! – ज्ञानवर्धक कहानी

सत्य  ही तप हैं। सत्य में ही संयम और शेष सभी गुण समाहित हैं। जैसे समुद्र मछलियों का आश्रय – स्थल होता हैं , वैसे ही सत्य सब गुंणों का आश्रय – स्थल हैं। समस्त सद्गुण सत्य में ही निहित हैं। सत्यवान पुरुष पर यदि कभी संकट भी आते हैं …

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क्षुधार्त्त को भजन से पूर्व भोजन चाहिए – ज्ञानवर्धक कहानी

स्थानांग सूत्र में भगवान् महावीर फरमाते हैं – अनाश्रित एवं असहायों को सहयोग और आश्रय देने के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए।  असहाय और अनाश्रित के लिए सहारा और आश्रय प्रथम आवश्यकता होता हैं। दुखार्त्त को उपदेश ही नहीं , दुःख निवारण की आवश्यकता होती हैं।   तथागत बुद्ध अपने …

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