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Tag Archives: ज्ञानवर्धक कहानी

जनता का फैसला – ज्ञानवर्धक कहानी

राजा कृष्णदेव एक बार शिकार खेलने के लिए गए। तो जंगल में भटक गए उनके अंगरक्षक पीछे ही छूट गए थे। जब शाम हो गयी तो उन्होंने अपना घोड़ा एक पेड़ से बाँध दिया और वह रात नजदीक के एक गाँव में बिताने का निश्चय कर लिया। एक राहगीर का …

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बैंगनों की चोरी – ज्ञानवर्धक कहानी

राजा कृष्णदेव के बाग़ में अन्य साग – सब्जियों के साथ – साथ बढ़िया किस्म के बैंगन के कुछ पौधे लगे थे। एक बार राजा कृष्णदेव ने अपने प्रमुख दरबारियों को दावत दी। जिसमें उन बैंगनों की सब्जी परोसी गयी। तेनालीराम को बैंगन की सब्जी बड़ी स्वादिष्ट लगी। घर आकर …

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मनुष्य स्वभाव और कुत्ते की दुम – ज्ञान से भरपूर कहानी

राजा कृष्णदेव का दरबार जुड़ा था और दरबार में इस बात पर गरमागरम बहस हो रही थी कि मनुष्य के स्वभाव को बदला जा सकता हैं या नहीं। कुछ लोगों की राय थी कि मनुष्य का स्वभाव बदला जा सकता हैं लेकिन कुछ लोगों का विचार था कि ऐसा नहीं …

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बुढापे की मृत्यु – ज्ञानवर्धक कहानी

सुलतान आदिलशाह को यह डर हमेशा सताता रहता था कि राजा कृष्णदेव अपने राज्य के प्रदेश रायचूर और मकदल को वापस लेने के लिए उस पर कभी भी चढ़ाई कर सकते हैं। उसने उनकी वीरता के बारे में सुन रखा था। और यह भी कि राजा ने अपनी वीरता से …

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संतोषम परम सुखम – ज्ञानवर्धक कहानी

तथागत बुद्ध का एक वचन हैं – संतुष्टि परम संपदा हैं।  असंतोष संपदाशाली को भी दरिद्र बना देता हैं , और संतोष निर्धन और अभाव्ग्रस्त को परमसुख के वरदान से भर देता हैं।   एक बार पाटलिपुत्र में भगवान् बुद्ध प्रवचन कर रहे थे। प्रश्नोत्तर चल रहे थे। आनंद ने …

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श्रीकृष्ण पुत्र ढंढण – ज्ञानवर्धक कहानी

महाश्रमण महावीर ने श्रमण – जीवन में आने वाले बाईस परीषहों का वर्णन किया हैं। श्रमण जीवन की ये बाईस परीक्षाएं हैं जिन्हें श्रमण को जीवन में अनेक – अनेक बार उत्तीर्ण करना होता हैं। बाईस परीषहों में एक परीषह हैं – अलाभ परीषह। श्रमण भिक्षाजीवी होता हैं। अतः अनेक …

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ढाई अक्षर प्रेम के – ज्ञानवर्धक कहानी

नारद भक्तिसूक्त में प्रेम के स्वरुप का प्रतिपादन करते हुए कहा गया हैं – प्रेम का स्वरुप अनिर्वन्च्नीय हैं। वह गूंगे के आस्वादन की भांति अकथ्य हैं। प्रेम का फूल जब ह्रदय की धरा पर खिलता हैं तो उसकी सुवास जीवन को समस्त विकृत भावों से मुक्त करके उसमें सम्यक …

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तितिक्षा हैं परम धर्म – ज्ञानवर्धक कहानी

भगवान महावीर ने अपने शिष्यों को उपदेश देते हुए कहा था – धर्म चिंतन में रत भिक्षु यह विचार करे कि तितिक्षा ही परम धर्म हैं।   साधना – पथ कंटकाकीर्ण पथ हैं। उस पथ के साधक को भगवान् महावीर ने परम धर्म तितिक्षा का उपदेश दिया था। महावीर ने …

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परम उदारताः महाकवि माघ का दान – ज्ञानवर्धक कहानी

एक प्राचीन सूक्त है – थोड़े में से जो भी प्रशस्त भावना – पूर्वक दिया जाता हैं , वह हजारों लाखों के दान की बराबरी करता हैं। दान करुणा का प्रतिफल हैं। करुणा – पूर्ण ह्रदय बाँट देने में ही अपने सुख और सहज सम्पन्नता के दर्शन  करता हैं।   …

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