Home / लाइफ स्टाइल / सैम वाल्टन के संघर्षपूर्ण जीवन सफर

सैम वाल्टन के संघर्षपूर्ण जीवन सफर

1985 में फ़ोर्ब्स मैगज़ीन ने सैम वाल्टन को अमेरिका के सबसे अमीर आदमी का खिताब दिया। उस वक़्त वालमार्ट के 20 प्रतिशत शेयरों के मालिक सैम वाल्टन के पास 2.8 अरब डॉलर की संपत्ति थी। उनके वालमार्ट स्टोर्स अमेरिकी ग्राहक के पसंदीदा स्टोर्स हैं और वालमार्ट की 64 प्रतिशत बिक्री अमेरिका में होती हैं।

 

संसार में वालमार्ट के 21 लाख कर्मचारी है, जिनमें से 14 लाख अमेरिका में कार्यरत हैं। आज वालमार्ट सिर्फ अमेरिका तक ही सीमित नहीं हैं। वालमार्ट संसार के 28 देशों में पहुँच चुका हैं। सैम वाल्टन की मृत्यु तक उनकी कंपनी के 1,960 स्टोर्स खुल चुके थे और उनकी संपत्ति 28 अरब डॉलर थी। आज सैम वाल्टन तो इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा स्थापित वालमार्ट संसार का सबसे बड़ा रिटेलर बन चुका हैं।

 

वालमार्ट के 9600 स्टोर्स हर सप्ताह 20 करोड़ ग्राहकों को सामान बेचते हैं। 2010 में इसकी वार्षिक बिक्री 421.85 अरब डॉलर और मुनाफा 16.389 अरब डॉलर था। सैम वाल्टन के वारिसों के नाम दुनिया के अमीरों की सूची में हर साल आते हैं। उनकी क्रिस्टी वाल्टन 11 वें स्थान पर हैं और उनके पास 25.3 अरब डॉलर की संपत्ति हैं।

 

सैम वाल्टन के बेटे जिम वाल्टन के पास 23.7 अरब डॉलर की संपत्ति हैं  और वे अमीरों की सूची में 16 वें स्थान पर हैं। सैम वाल्टन की बेटी एलिस वाल्टन के पास 23.3 अरब डॉलर की संपत्ति है और वे अमीरों की सूची में 18 वें स्थान पर हैं। इस तरह हम देखते हैं कि 2011 में फ़ोर्ब्स मैगज़ीन की अमीरों की सूची में सैम वाल्टन के वारिसों के पास कुल मिलाकर 95.4 अरब डॉलर की संपत्ति हैं।

 

अगर पूरा परिवार संयुक्त होता, तो आज वाल्टन परिवार संसार के वर्तमान सबसे अमीर व्यक्ति कार्लोस स्लिम हेलू से ज्यादा अमीर होता, जिनके पास 69 अरब डॉलर की संपत्ति हैं। सिर्फ इसी बात से सैम वाल्टन की सफलता का अनुमान लगाया जा सकता हैं कि उनके वारिसों के पास आज इतनी अधिक संपत्ति हैं कि वे दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों की गिनती में आते हैं।

 

सैम वाल्टन को इतने बड़े पैमाने पर सफलता इसलिए मिली, क्योंकी उनका एक ही लक्ष्य था : सबसे कम दाम पर अच्छा माल बेचना। वे थोक में सामान खरीदते थे और और अपना प्रॉफिट मार्जिन कम रखते थे। वे जानते थे कि अगर सेल्स वॉल्यूम यानी सामान की बिक्री बढ़ेगी, तो मुनाफ़ा अपने आप बढ़ेगी। सैम वाल्टन के जमाने में भी डिस्काउंट स्टोर्स थे।

 

उस समय भी रिटेल स्टोर्स की चेन थी। बहरहाल, सैम वाल्टन की अभूतपूर्व सफलता का राज़ यह था कि उन्होंने बड़े शहरों के बजाय छोटे कस्बों में स्टोर्स खोलने पर अपना ध्यान केन्द्रित किया। जब बाकी व्यवसायी बड़े – बड़े शहरों में आलीशान स्टोर खोलने में जुटे थे तब सैम ने लीक से हटकर काम किया। उन्होंने छोटे शहरों में छोटे स्टोर्स की चेन खोली।

 

उन्होंने आलीशान, भव्य और महंगे स्टोर खोलने के बारे में कभी नहीं सोचा। मामला इसका बिलकुल उल्टा था। उनके स्टोर्स में पैसे बचाने पर जोर दिया जाता था। यही वजह थी कि कई बार तो उनके स्टोर कबाड़खाने जैसे दिखते थे, लेकिन सैम वाल्टन को  इससे कोई दिक्कत नहीं थी। वे कहते थे कि अगर लोगों को सबसे सस्ता सामान कबाड़खाने जैसे स्टोर में मिलेगा, तो वे वहाँ भी खुशी – खुशी आयेंगे।

 

सैम वाल्टन ने यह सबक सीख लिया कि 5000 की आबादी वाले छोटे शहरों में भी बड़े स्टोर सफल हो सकते हैं बशर्ते कीमत इतनी कम हो कि आसपास के गाँव वाले आकर वहाँ खरीददारी करें। वाल्टन जानते थे कि भव्य स्टोर बनाने और चलाने में जो लागत लगती हैं, उसकी कीमत अंततः ग्राहकों को ही चुकानी पड़ेगी।

 

वे इससे बचना चाहते थे क्योंकि अगर वे ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ डालते, तो उनका सबसे सस्ते माल का दावा कमजोर पड़ जाता। डेविड और गोलियाथ के मुकाबले की तरह वाल्टन ने रिटेल क्षेत्र के दिग्गजों मार्ट, टारगेट और सियर्स से मुकाबला किया और अंततः सबको पछाड़कर वालमार्ट को न सिर्फ अमेरिका की सबसे बड़ी रिटेल चेन, बल्कि अमेरिका की सबसे बड़ी कंपनी भी बना दिया।

 

अधिकाँश बड़ी सफलताएं परम्परा का विरोध करने की वजह से मिलती हैं। सैम वाल्टन ने भी परम्परा का विरोध करके ही सफलता पायी। उस वक़्त वूलवर्थ, मार्ट और सियर्स जैसे बड़े बड़े रिटेलर्स यह मानते थे कि डिपार्टमेंटल स्टोर्स सिर्फ ज्यादा जनसंख्या वाले इलाकों में ही सफल हो सकते हैं।

 

लेकिन सैम वाल्टन ने यह भांप लिया कि बड़े स्टोर कम जनसख्या वाले क्षेत्रों में भी सफल हो सकते हैं, बशर्ते कीमतों में काफी अंतर हो। उस युग में मार्ट 50000 से कम आबादी वाले इलाकों में और गिब्सन स्टोर्स 12000 से कम आबादी वाले इलाके में स्टोर्स नहीं खोलते थे।

 

कई सालों तक कम आबादी वाले इलाकों में सिर्फ वाल्टन का वालमार्ट ही था और उन्हें छोटे इलाको में डिस्काउंट स्टोर चलाने के गुर सीखने का काफी समय मिला। सैम वाल्टन 5000 की आबादी वाले इलाकों के रिटेल शहंशाह बन गए।

 

सैम वाल्टन अपनी सफलता का मूल मंत्र बताते हुए कहते हैं, नियमों को तोड़ दो। बहाव के खिलाफ तैरो। नए रास्ते पर चलो। पारंपरिक बुद्धिमत्ता को नजरअंदाज कर दो। अगर सब लोग किसी एक दिशा में जा रहे हो, तो इस बात की अच्छे संभावना हैं कि उसकी ठीक विपरीत दिशा में चलकर आप सफल हो सकते हैं।

ये भी जरुर पढ़ें:

बन्दर का महत्वपूर्ण ज्ञान समस्त प्राणी के लिए – हिंदी कहानी
महाकवि गोस्वामी तुलसीदास के जीवन परिचय – हिंदी कहानी
आत्मसंतुष्टि से ज्यादा ख़ुशी और किसी में नहीं – हिंदी कहानी
अन्त ही अहंकार की आखिरी मार्ग – हिंदी कहानी
नरेंद्र मोदी की सफलता की कहानी – क्रिएटिव थिंकिंग
महाराणा प्रताप जिसने स्वाभिमान के साथ कभी समझौता नहीं की – हिंदी कहानी
उड़ान ही आपकी पहचान – हिंदी कहानी
रात के तूफान के बाद सुबह का सूरज – हिंदी कहानी

About admin

आपने कीमती समय देकर ब्लॉग पढ़ा धन्यबाद, ये पोस्ट आपको पसंद आया हो तो शेयर करना न भूले, ताकि इसे ज्यादा से ज्यादा लोग पढ़ें, अपना विचार जरूर लिखे, इससे हमें और ज्यादा अच्छी और लेटेस्ट जानकारियाँ लिखने के लिए प्रेरित करेगा.

One comment

  1. http://www.freeprachar.com के द्वारा पूरी दुनिया में अपने बिज़नेस का प्रचार करें TOTALLY FREE

Leave a Reply