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कभी भी खुद की तुलना दूसरे से ना करें

हाय दोस्तों मार्टिन लूथर ने कहा था हर व्यक्ति को दो काम अकेले करने होंगे एक तो विश्वास करना और दूसरा मरना जब आप दूसरों के साथ अपनी तुलना करते हैं तो आप ईष्यालु हो सकते हैं, क्योंकि आपसे बड़े लोग हमेशा रहने रहेंगे और आपको घमंड भी हो सकता है क्योंकि आप से छोटे लोग भी हमेशा रहेंगे।

 

तुलना अगर कुंठा तक ले जाने वाली निश्चित राह है, लेकिन तुलना को कभी प्रमाण नहीं माना जा सकता है, पड़ोसी के खेत के पत्थर गिनते समय आप अपना खेत साफ नहीं कर सकते, फेंस के उस पार की घास ज्यादा हरी हो सकती है। लेकिन शायद उससे ज्यादा तराशने की भी जरूरत होगी” पहाड़ियां दूर से छोटी और हरी दिखाई देती है।

 

दूसरों से अपने मुकाम और भावी योजनाओं की तुलना करने में आप अपनी बहुत सी उर्जा समय और कोशिश गवा देते हैं, हाल ही में मुझे अपने मित्र के फोन से हैरानी हुई जिससे मेरी तीन चार साल से बात नहीं हुई थी, उसने मुझसे कहा कि मेरी सफलताओं को देखकर उसे अपनी जिंदगी के बारे में खराब महसूस हो रहा है।

 

उसकी बात सुनकर मैं थोड़ा अचकचा गया जो स्वाभिक भी था, फिर मैंने उससे पूछा, यानि अगर पिछले तीन – चार साल में मेरी स्थिति बहुत खराब हो गई होती, तो क्या तुम्हें अच्छा महसूस होता? उसने कहा नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है, सच तो यह है कि किसी दूसरे की सफलता मिलने से आपकी सफलता के अवसर कम नहीं हो जाते।

 

अगर आप दूसरों से तुलना नहीं करेंगे तो जिंदगी ज्यादा सुखद हो जाएगी। सफलता का मतलब दरअसल वह काम है जो आप सबसे अच्छी तरह कर सकते हैं, सफलता का मतलब इस बारे में चिंता करना नहीं है कि सामने वाला क्या कर रहा है या क्या करेगा, आपकी सफलता या असफलता अंदर की बात है यह बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं होता।

 

खुद से वह सवाल पूछे अर्ल नाइटिंगेल ने पूछा है आप जिंदगी में खुद की इच्छा से प्रेरित होते हैं या जनमत की प्रेरणा से, यह सुनिश्चित कर ले कि आप ही यह फैसला करें कि आप सचमुच क्या चाहते हैं। किसी दूसरे को अपनी तरफ से फैसला ना करने दें, क्या आप कहते हैं मैं अच्छा हूं लेकिन उतना अच्छा नहीं जितना कि मुझे होना चाहिए या फिर आप कहते हैं मैं उतना बुरा नहीं हूं।

 

जितना कि दूसरे लोग हैं, आप दूसरों की कमजोरियों के बारे में जितना सोचेंगे उतने ही दुखी हो जाएंगे, आपको अपना खुद का तंत्र और योजना बनाना चाहिए, वरना आप किसी दूसरे व्यक्ति के गुलाम बनकर रह जाएंगे।

 

जो भी हर व्यक्ति को खुश करने के लिए झुकता रहेगा, वह जल्दी ही धूल चाटने लगेगा आपको तो सिर्फ अपने पद और योजना की तुलना इस बात से करना चाहिए कि ईश्वर ने आपके लिए कौन सा योजना बनाई है।

 

अगर हजार लोग भी कोई मूर्खतापूर्ण बात कहें, तो वह मूर्खता पूर्ण बात ही रहती है ईश्वर के मार्गदर्शन को कभी जनमत की जरूरत नहीं पड़ती है, समझदार व्यक्ति अपना खुद का निर्णय लेता है, अज्ञानी व्यक्ति जनमत का अनुसरण करता है।

 

जिस राह पर बहुत से लोग चल चुके हैं, उस राह पर चलते समय यह कभी ना सोचे कि आप सही रास्ते पर हैं, अपनी सुरक्षा के लिए किसी दूसरे पर निर्भर रहना जिंदगी में सबसे बड़ा जोखिम है, किसी दूसरे के कोट से खुद को न नापें. किसी दूसरे की निगाह से अपना मूल्यांकन ना करें।

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