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manoyoun rog
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मनोयौन रोग के कारण एबं घरेलू उपचार

स्वप्न दोष Nocturnal Emissions

कारण

रात्रि में सोते हुए वीर्य स्खलित हो जाना स्वप्नदोष कहलाता हैं। स्त्री चिंतन अधिक करना, भोग – लालसा की अधिकता, मन में कामासक्ति के भाव रहना इस रोग के मुख्य कारण हैं। कब्ज व अजीर्ण आदि रोग इसके सहायक कारण हैं।

आधुनिक चिकित्सकों के मतानुसार तरूणावस्था में होने  वाली यह एक सामान्य प्रक्रिया हैं, जिसे रोगों की श्रेणी में नहीं माना जाता। किन्तु सप्ताह में कई बार स्वप्नदोष हो जाना निश्चय ही रोग की श्रेणी में आता हैं, जिसकी चिकित्सा अति आवश्यक हैं।

घरेलू चिकित्सा

चिकित्सा के पहले सूत्र के रूप में मन को कामासक्ति से हटाना हैं। निम्न औषधियों का प्रयोग इसमें लाभकारी हैं –

  • छोटी इलायची के बीज 1 भाग, सूखा धनिया 6 भाग व मिसरी 4 भाग को कूटकर चूर्ण बना लें। सुबह – शाम एक चमच्च की मात्रा में दूध के साथ लें।
  • हरड़ और सौंफ का सामान भाग चूर्ण एक चमच्च गर्म दूध के साथ लें।
  • आधा चमच्च मुलेठी का चूर्ण, एक चमच्च शहद व दो चमच्च घी के साथ सुबह दूध के साथ लें।
  • गुलाब के फूलों की 20 – 30 पंखुड़ियां 10 ग्राम मिसरी के साथ सुबह – शाम दूध के साथ सेवन करें। गुलाब, शहतूत, गाजर या चन्दन में से किसी एक का शरबत 2 मि.ली. प्रातः एवं सांय लें।
  • आंवले या गाजर का मुरब्बा 10 – 20 ग्राम सुबह – शाम सेवन करें।
  • बादाम व काली मिर्च की बनी ठंडाई का सेवन सुबह – शाम करें, इसमें मीठा न डालें।
  • पका हुआ एक केला छोटी इलायची के चुटकी भर चूर्ण के साथ सुबह – शाम लें।
  • बरगद के कच्चे फलों को छाया में सुखाकर पीस लें। इसका दो चमच्च चूर्ण सुबह गाय के दूध से लें।
  • इमली के भुने हुए बीजों का छिलका उतार कर बारीक पीस लें और समान भाग मिसरी मिला लें। एक चमच्च दवा प्रातः गाय के दूध से लें।
  • त्रिफला और जौ का एक – एक चमच्च चूर्ण लेकर रात को पानी में भिंगो दें। सुबह उसका काढ़ा छानकर 2 चमच्च शहद के साथ प्रयोग करें।
  • ईसबगोल की भूसी और मिसरी समान मात्रा में लेकर मिलाएं और दो – दो चमच्च की मात्रा में प्रातः एवं सांय दूध के साथ लें।
  • अनार का छिलका सुखाकर कूट – पीसकर छान लें। एक से दो चमच्च तक चूर्ण गुलाब के शरबत के साथ दिन में तीन बार लें।

आयुर्वेदिक औषधियां

यष्ठीमधु चूर्ण, त्रिफला चूर्ण रस, रस सिन्दूर, शिलाजीत, सितोपलादि चूर्ण, शुक्र संजीवनी वटी, शुक्रवल्लभ रस, मकरध्वज वटी, वसंतकुसुमाकर रस, चन्द्रप्रभावटी आदि।

 

 

शीघ्रपतन Premature Ejaculation

कारण

स्त्री समागम के समय लिंग में बिना उत्तेजना आये या उत्तेजना आने के कुछ क्षण बाद ही वीर्य स्खलित हो जाना शीघ्रपतन कहलाता हैं। यदि यह स्थिति लगातार चलती रहे, तो चिकित्सा आवश्यक हैं, क्योंकि विभिन्न परिस्थितियों और मानसिक स्थिति के कारण कभी – कभी होने वाला शीघ्रपतन रोग के दायरे में नहीं आता।

कोई पुराना रोग, हस्तमैथुन या अधिक स्त्री समागम के कारण आई दुर्बलता शारीरिक कारणों में आते हैं। उच्च रक्तचाप, मोटापा, ह्रदय रोग व मधुमेह आदि रोग तथा इसकी चिकित्सा में प्रयुक्त होने वाली दवाओं के कारण भी यह स्थिति उत्पन्न हो सकती हैं। मानसिक कारणों में चिंता, भय, शोक आदि शीघ्रपतन के कारण हैं।

घरेलू चिकित्सा

रोगी को प्रसन्नचित्त व तनावमुक्त वातावरण में रखें, ताकि उसके मस्तिष्क से चिंता, शोक, भय आदि समाप्त हो। निम्न में से कोई एक उपचार करें –

  • 5 – 10 खजूर दूध में उबालकर सुबह – शाम लें। लेकिन इसका प्रयोग गर्मियों में न करें।
  • 24 घंटे पानी में भिंगोये 5 – 8 गुरबंदी बादामों को पीसकर एक चमच्च देसी घी में भूनें, ऊपर से दूध डाल दें। 10 – 15 मिनट तक उबला हुआ दूध प्रातः एवं सांय रोगी को सेवन कराएं।
  • 5 – 8 गुरबंदी बादाम की गिरी कूटकर 1 चमच्च देसी घी में भूनें। लाल हो जाने पर 5 – 7 किशमिश भी घी में डाल दें और ऊपर से दूध छोड़ दें। यह दूध सुबह – शाम लें।
  • आंवले का चूर्ण और मिसरी 1 – 1 चमच्च मिलाकर सुबह – शाम दूध से सेवन करें।
  • अंजीर के पके हुए दो – दो फल, प्रातः एवं सांय खाएं।
  • बादाम की गिरी, किशमिश, सूखे हुए अंजीर, छोटी इलायची के दाने, चिरौंजी, पिस्ता और मिस्री सभी सम भाग लेकर बारीक पीस लें। यह चूर्ण किसी कांच के बर्तन में गाय का घी डालकर एक सप्ताह तक धुप में रखें। दो – दो चमच्च मिश्रण सुबह – शाम दूध के साथ लें।
  • रात को त्रिफला का काढ़ा बनाकर रखें और सुबह मिसरी मिलाकर प्रयोग करें।
  • आधा चमच्च मुलेठी का चूर्ण एक चमच्च शहद व दो चमच्च देसी घी मिलाकर दूध के साथ लें।
  • कच्चा नारियल 10 ग्राम एक गिलास गाय के दूध से सुबह खाली पेट लें।
  • रोज सुबह चार खजूर दूध में उबालकर खाएं, फिर से दूध लें।

आयुर्वेदिक औषधियां

सिद्ध मकरध्वज, वज्र भस्म, वसंत कुसुमाकर रस, पूर्ण चन्द्र रस, चतुर्मुख रस, अश्वगंधारिष्ट, अश्वगंधादि चूर्ण, मूसली पाक आदि।

पेटेंट औषधियां

डिवाइन आनंद प्लस कैप्सूल (बी.एम.सी. फार्मा), पालरीविन फोर्ट गोलियां (चरक), एशरी फोर्ट कैप (एमिल), वीटा एक्स गोल्ड कैप (वैद्यनाथ), स्टिमूलेक्स कैप (डाबर), वीरोन गोलियां (संजीवन)।

 

 

प्रोस्टेट ग्रंथि वृद्धि Prostate Enlargement

कारण

यह ग्रंथि पुरूष प्रजनन प्रणाली का अंग हैं, जिसका स्राव वीर्य में मिलता हैं। 50 वर्ष के बाद इस ग्रंथि में स्वाभाविक रूप से वृद्धि होनी शुरू हो जाती हैं। इस ग्रंथि में वृद्धि हो जाने पर मूत्र बार – बार आता हैं, मूत्राशय में दर्द हो सकता हैं। प्रोस्टेट वृद्धि के कारण नमक व जल यदि मूत्र के साथ पर्याप्त मात्रा में न निकल पाएं, तो शरीर में सूजन भी आ सकती हैं। मूत्राशय का कोई भी संक्रमण प्रोस्टेट वृद्धि के कारण वृक्कों में जा सकता हैं।

घरेलू चिकित्सा

  • सरसों का तेल व जियापोते का रस एक – एक चमच्च मिलाकर सुबह – शाम लें।
  • तुलसी की 20 पत्तियों को पीसकर चटनी बना लें और आधा पाव दही में मिलाकर खाली पेट खाएं, इसमें चीनी या नमक न मिलाएं। लगभग तीन महीने तक प्रयोग करने से पूर्ण आराम मिलता हैं। दही के विकल्प के रूप में शहद का प्रयोग भी किया जा सकता हैं।
  • सीपी को जलाकर भस्म बना लें। आधा – आधा चमच्च भस्म सुबह – शाम दूध के साथ लें।

आयुर्वेदिक औषधियां

         बंग भस्म, प्रवाल पिष्टी, शुद्ध हिंगुल, बंगशील व फोर्टेज (एलारसिन), नियो (चरक)।

 

 

नपुंसकता

नपुंसकता एक मनोदैहिक रोग हैं। वास्तव में नपुंसकता के अंतर्गत दो विभिन्न रोगों का ग्रहण किया जाता है। पहला – वीर्य में शुक्राणुओं की कमी या पूर्णतः अभाव , जिसके चलते पुरूष संतान उत्पन्न करने में असमर्थ होता हैं , भले ही वह यौन क्रिया में अपनी सहचरी को पूर्ण रूप से संतुष्ट करने में सक्षम हो। दूसरा – किसी शारीरिक या मानसिक कारण के चलते जब पुरूष यौन क्रिया में अपनी सहचरी को संतुष्ट नहीं कर पाए। इस स्थिति में पुरुष यौनांग में या तो उत्तेजना आती ही नहीं हैं और यदि आती भी हैं , तो शीघ्र समाप्त हो जाती हैं। पुरूष के वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या का पर्याप्त या अपर्याप्त होना इस स्थिति में गौण हैं। अधिकाँश मामलों में दोनों स्थितियां साथ – साथ होती हैं और एक रोग की चिकित्सा में प्रयुक्त की जाने वाली अधिकाँश औषधियां दूसरे रोग की चिकित्सा मे सहायक होती हैं। संभवतः इसी कारण से शास्त्रों में दोनों रोगों का वर्णन पृथक रूप से नहीं मिलता हैं।

कारण

नपुंसकता का कारण शारीरिक भी हो सकता हैं और मानसिक भी। अफीम , चरस , शराब , हेरोइन , स्मैक आदि नशीले पदार्थों का सेवन किशोरावस्था में हस्त मैथुन , यौवन काल में स्त्री प्रसंगों में अधिकाधिक लिप्त रहना , लम्बे समय तक चले रोग के कारण हुई कमजोरी , कब्ज , अपच , अजीर्ण , वायु प्रकोप आदि पेट के रोग , मधुमेह , उच्च रक्तचाप , मोटापा आदि व इनकी चिकित्सा हेतु ली जा रही दवाओं के दुष्प्रभाव आदि ऐसे शारीरिक कारण हैं , जिनसे पुरूष में यौनेच्छा की कमी या यौनेच्छा होने के बावजूद पुरूष यौनांग में उत्तेजना न होना आदि लक्षण प्रकट होते हैं। इंजेक्शन , कैप्सूल , गोलियां व पीने वाली एलोपथिक दवाओं का प्रचलन नशे के रूप में आजकल अधिक बढ़ रहा हैं।

मानसिक कारणों में व्यवसायिक प्रतिस्पर्द्धा , सांसारिक समस्याओं से उत्पन्न होने वाला तनाव , घर या कार्यस्थल में होने वाले कलह – क्लेश से उपजा विषाद (डिप्रेशन) आदि मुख्य हैं। इसके अतिरिक्त स्त्री आकर्षक न हो , रौबीली हो , रतिक्रिया में सक्रिय रूप से सम्मिलित न हो , तो भी नपुंसकता की स्थिति आ सकती हैं। इसके अतिरिक्त अवैध संबंधों के दौरान होने वाला भय , चिंता , आशंका भी नपुंसकता का कारण बनती हैं।

लक्षण

वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या में कमी होना , स्वस्थ शुक्राणुओं का प्रतिशत कम होना , शुक्राणुओं का आकार असामान्य होना अथवा शुक्राणुओं का पूर्णतः अभाव होना नपुंसकता के लक्षण हैं।

यौनेच्छा की कमी या यौनेच्छा का पूर्णतः अभाव , स्त्री के स्पर्श , आलिंगन व मधुर व्यवहार के बावजूद लिंग में बिलकुल भी उत्तेजना न होना या उत्तेजना होने पर शीघ्र ही समाप्त हो जाना आदि लक्षण दुसरे प्रकार की नपुंसकता में पाए जाते है।

चिकित्सा

मनोचिकित्सा के अंतर्गत रोगी में आत्मविश्वास जगा कर उसे आश्वस्त किया जाता हैं कि उसे किसी प्रकार का कोई रोग या कमजोरी नहीं हैं। किशोरावस्था में अप्राकृतिक मैथुन में प्रवृत्त रहे युवकों को प्रथम यौन सम्बन्ध के समय डर बना रहता हैं कि कहीं वह यह क्रिया सुचारू रूप से संपन्न न कर सके। आत्मविश्वास की कमी के कारण पहली बार मैथुन क्रिया में असफल रहने पर पुरूष के मस्तिष्क में यह बात घर कर जाती हैं कि वह मैथुन कर्म के योग्य नहीं हैं। यदि रोगी शारीरिक रूप से सक्षम हो , तो केवल मनोचिकित्सा के द्वारा ही उसका उपचार संभव हैं। यदि शारीरिक रूप से भी रोगी कमजोर हैं , तो निम्नलिखित चिकित्सा रोगी को दे सकते हैं :

  • सुबह खाली पेट अंजीर के पके हुए फल खाएं।
  • सूखे अंजीर , किशमिश , छोटी इलायची के दाने , बादाम की गिरी , पिस्ता , चिरौंजी व मिसरी 20 – 20 ग्राम व केशर 2 ग्राम। सबको बारीक कूट – पीसकर कांच के बर्तन में डालें व उसमें गाय का घी डालकर 10 दिन तक धुप दिखाएं। 2 चमच्च तक यह दवा दूध के साथ सुबह – शाम लें।
  • सूखे अंजीर , शतावरी , सफ़ेद मूसली , किशमिश , चिरौंजी , बादाम की गिरी , पिश्ता , चिरौंजी , सालम मिस्री , गुलाब के फूल , शीतल चीनी सभी 100 – 100 ग्राम लेकर सबको बारीक पीसकर चीनी की चाशनी में पका लें। जमने योग्य हो जाए तो 10 – 10 ग्राम लौह भस्म , केशर , अभ्रम भस्म व प्रवाल भस्म डालकर अच्छी तरह मिला दें। 2 – 2 चमच्च सुबह – शाम दूध के साथ दें।
  • तुलसी और गिलोय का एक – एक चमच्च स्वरस समान भाग शहद के साथ लें।
  • बंगभस्म को शहद और तुलसी के पत्तों के स्वरस में घोटकर मूंग के दानों के बराबर की गोलियां बनाएं व 1 – 1 गोली सुबह – शाम दूध के साथ लें।
  • असगंध नागौरी (छोटी असगंध) व विदारी कंद समान भाग लेकर कूटकर रख लें। एक – एक चमच्च सुबह – शाम मिसरी मिले हुए गर्म दूध के साथ लें। यदि इसके शिकायत से कब्ज की शिकायत हो , तो असगंध और विदारी कंद के साथ सोंठ भी बराबर मात्रा में लें। कब्ज होने की दशा में असगंध व आंवला का समान भाग चूर्ण भी ले सकते हैं।
  • बड़ा गोखरू , गिलोय , सफ़ेद मूसली , विदारी कंद , मुलेठी व लौंग बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनाएं व आधा – आधा चमच्च सुबह – शाम दूध के साथ लें।
  • काले धतूरे के बीज छाया में सुखा लें और बारीक पीसकर शहद के साथ घोट लें। उड़द की दाल के बराबर की गोलियां बना लें। एक – एक गोली सुबह – शाम दूश के साथ लें।
  • सफ़ेद मूसली 200 ग्राम , शीतल चीनी 100 ग्राम , वंशलोचन 50 ग्राम व छोटी इलायची के बीज 50 ग्राम लेकर कूटें। इसमें 20 – 20 ग्राम अभ्रक भस्म व प्रवाल भस्म मिला कर रख लें। एक – एक ग्राम सुबह – शाम शहद के साथ लें।
  • उड़द की दाल व कौंच के बीज समान मात्रा में पीसकर चूर्ण बनाकर रख लें। 50 – 100 ग्राम की मात्रा में प्रातः व सांय दूध में खीर की तरह पका कर लें।

शुद्ध शिलाजीत व छोटी पीपल का चूर्ण 10 – 10 ग्राम लेकर उसमें 1 – 1 ग्राम बंगभस्म व प्रवालभस्म मिला लें। यह मिश्रण 1 ग्राम की मात्रा में सुबह – शाम लें।

  • सफ़ेद मूसली , पुनर्नवा , असगंध , शतावर व नागबला सभी को बराबर की मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। एक – एक चमच्च चूर्ण सुबह – शाम मिसरी मिले हुए दूध से लें।
  • काली मूसली , सफ़ेद मूसली , कौंच के बीज , असगंध , शतावर , तालमखाना , छोटी इलायची के बीज व छोटी पीपल बराबर की मात्रा में लेकर चूर्ण बनाएं। एक – एक चमच्च सुबह – शाम मिसरी मिले हुए दूध से लें।
  • अम्बर को तिल के तेल में मिलाकर समागम से एक घंटा पहले इन्द्रिय पर लेप करें। इससे स्तम्भन शक्ति बढ़ती हैं।
  • कपूर को गुलाब के इत्र में मिलाकर समागम से एक घंटा पहले इन्द्रिय पर लेप करने से भी स्तंभन शक्ति बढ़ती हैं।

आयुर्वेदिक औषधियां

रतिवल्लभरस , शुद्ध शिलाजीत , मकरध्वज , मन्मथ रस , शतावरी पाक , मूसली पाक , अश्वगंधारिष्ट , चन्द्रकला रस , लवंगादिचूर्ण , कामचूड़ामणिरस , धातु पौष्टिक चूर्ण , अभ्रक भस्म , शुक्रवल्लभ रस , हीरा भस्म , स्वर्ण भस्म आदि औषधियां नपुंसकता की चिकित्सा हेतु वर्षों से प्रयोग की जाती रही हैं।

पेटेंट औषधियां

डिवाइन आनंद प्लस कैप्सूल (बी.एम.सी. फार्मा) , शुक्र संजीवनी वटी व शिवाप्रवंग स्पेशल (धूतपापेश्वर) , मदन विनोद वटिका (झंडु) , एशरी फोर्ट कैप्सूल (एमिल) , टैन्टैक्स फोर्ट (हिमालय) , केशारादिवटी (वैद्यनाथ) , पालरिवीन फोर्ट व नियो गोलियां (चरक) आदि।

शुक्राणु वृद्धि

वीर्य में शुक्राणुओं की वृद्धि हेतु निम्न औषधियों का प्रयोग किया जा सकता हैं –

  • तुलसी के बीज व गुड़ बराबर मात्रा में लेकर कूटें व मटर के बराबर की गोलियां बनाएं। 2 – 2 गोली सुबह – शाम दूध के साथ लें।
  • सत गिलोय 1 भाग , सफ़ेद मूसली 2 भाग , तालमखाने 3 भाग लेकर सबको कूट – पीस लें। तीनों के बराबर मिसरी मिला लें। एक – एक चमच्च गर्म दूध के साथ लें।
  • शतावर , मुलेठी , सत गिलोय , शुद्ध शिलाजीत , वंशलोचन , तालमखाने , छोटी इलायची के बीज , पाषाणभेद , लौह भस्म व बंग भस्म सभी को समान मात्रा में लें। इन सबके वजन के बराबर मिसरी मिला लें। एक चमच्च दवा सुबह – शाम दूध के साथ लें।
  • स्वर्ण भस्म 1 भाग , कस्तूरी 2 भाग , रजत भस्म 3 भाग , जावित्री 4 भाग , केशर 5 भाग , छोटी इलायची के बीजों का चूर्ण 5 भाग , जायफल का चूर्ण 6 भाग व वंशलोचन का चूर्ण 7 भाग लेकर अच्छी तरह मिला लें। पान के स्वरस में घोटकर मूंग की दाल के बराबर की गोलियां बना लें। 1 – 2 गोली शहद , मलाई या मक्खन के साथ लेकर ऊपर से दूध पी लें।

पेटेंट औषधियां

स्वामला कंपाउंड (धूतपापेश्वर) , एडीजोआ कैप्सूल (चरक) , स्पीमेन गोलियां (हिमालय) , सीमेंटों गोलियां (एमिल) , अश्वगंधा कैप्सूल (माहेश्वरी) , वाजीएम कैप्सूल , गोलियां व तेल (माहेश्वरी) , डिवाइन हेल्थ प्लस कैप्सूल (बी.एम.सी. फार्मा )

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