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लेवी स्ट्रॉस जींस कपड़े के जनक

आज जीन्स फैशन में हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि जीन्स के आविष्कार का श्रेय लेवी स्ट्रॉस को जाता हैं, जिनकी कंपनी लीवाइस नाम से मशहूर हैं। जीन्स के जनक लेवी स्ट्रॉस सैन – फ्रांसिस्को में ड्राई गुड्स स्टोर चलाते थे पास ही में चांदी की खानें थी, जिनमें चांदी खोजने वाले खनिक अपनी पैंट की जेंबें फटने के कारण परेशान थे। दिक्कत यह थी कि बार – बार चांदी के ढेले जेब में रखने के कारण उनकी जेबें छन जाती थी और फट जाती थी। यह एक आम समस्या थी।

 

एक खनिक अल्कली आइक ने जेकब डेविस नामक दर्जी को अपनी समस्या बताई और उसे दूर करने का अनुरोध किया। उस दरजी के दिमाग में यूं ही एक विचार आया और उसने ताम्बे की कील यानी रिवेट लगाकर जेब को चारों तरफ से कस दिया। कुछ दिन बाद अल्कली आइक जेकब डेविस को धन्यवाद देने आया, क्योंकि उसकी समस्या हल हो चुकी थी।

 

इस पर जेकब डेविस के मन में विचार आया कि अगर एक व्यक्ति की समस्या हल हो गई हैं, तो इसी तरीके से सारे खनिकों के समस्या का हल किया जा सकता हैं। वह समझ गया कि यह खोज महत्वपूर्ण हो सकती हैं और इसका पेटेंट लेना चाहिए। बहरहाल, पेटेंट फीस 68 डॉलर थी और उसके पास इतने पैसे नहीं थे। जेकब डेविस की पत्नी अपने पति की कारगुजारियों से पहले ही परेशान थी और उसने साफ़ कह दिया था कि वह इस मूर्खतापूर्ण विचार के पेटेंट में पैसे बर्बाद नहीं करने देगी। मगर डेविस को यकीन था कि यह विचार दमदार हैं, इसलिए वह मदद के लिए लेवी स्ट्रॉस के पास पहुंचा, जिनसे वह कपडे बनाने का सामान उधार लेता था।

 

उसने स्ट्रॉस को यह बताया कि नया डिजाईन काफी लोकप्रिय हो सकता हैं और इसका पेटेंट लेने पर वे काफी सफल हो सकते हैं। डेविस ने स्ट्रॉस के सामने यह प्रस्ताव रखा कि अगर स्ट्रॉस पेटेंट फीस भर दें, तो वे दोनों पेटेंट के आधे – आधे मालिक बन जायेंगे। स्ट्रॉस ने इस खोज की संभावना को फौरन भांप लिया और खुशी – खुशी सहमत हो गए।

 

लेवी स्ट्रॉस और जेकब डेविस ने मिलकर पेटेंट के लिए आवेदन दे दिया। लेकिन पेटेंट मिलने में देर होते देखकर डेविस बेचैन हो गया और उसने पेटेंट का अपना आधा हिस्सा भी लेवी स्ट्रॉस को बेच दिया। लीवाई स्ट्रॉस के लिए तो यह सोने पर सुहागा था। अब वे पूरी तरह से उस नयी खोज के मालिक हो गए थे, जो उन्होंने नहीं बल्कि डेविस ने की थी। दस माह बाद 20 मई 1873 को उन्हें पेटेंट मिल गया।

 

पेटेंट मिलने के बाद स्ट्रॉस ने जीन्स का व्यापक उत्पादन शुरू कर दिया और 22 सेंट में जीन्स बेचने लगे। उन्होंने इसका काफी विज्ञापन किया, जिसमें उन्होंने बताया कि जीन्स पैंट ख़ास तौर पर किसानों, मकेनिकों, खनिकों और काम करने वालों के लिए बनायी गयी हैं। उन्होंने इसकी मजबूती की गारंटी देते हुए कहा कि इसके फटने पर एक नयी जीन्स मुफ्त दी जायेगी। जीन्स को खींचने वाले दो घोड़े लीवाई स्ट्रॉस जीन्स का ट्रेडमार्क बन गए।

 

स्ट्रॉस की जीन्स तत्काल लोकप्रिय हो गयी। पेटेंट मिलने के कारण रिवेट वाली जेबों की तकनीक पर बीस साल तक सिर्फ लेवी स्ट्रॉस का एकाधिकार था। मांग इतनी बढ़ गयी कि लेवी स्ट्रॉस को नई फक्ट्रियाँ खोलनी पड़ी। उन्होंने 1890 में लेवी स्ट्रॉस एंड कंपनी की स्थापना की। जीन्स की बदौलत लेवी स्ट्रॉस इतने अमीर बन गए कि अपनी मृत्यु के समय वे अपने पीछे 60 लाख डॉलर छोड़ गए थे।

 

लेवी स्ट्रॉस की किस्मत अच्छी थी कि जेकब डेविस ने उन्हें पैंट की जेंबें मजबूत करने का उपाय घर बैठे बता दिया। बहरहाल, स्ट्रॉस की बुद्धिमानी यह थी कि उन्होंने इसकी संभावना को फौरन भांप लिया और इस काम को इतने बड़े पैमाने पर किया। इस नयी तकनीक का इस्तेमाल स्ट्रॉस ने इतनी सूझ – बूझ से किया कि उनकी बनाई जीन्स आज पूरी दुनिया की पसंदीदा पोशाक बन चुकी हैं।

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