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जॉन एच. जॉनसन सफल जीवनी

अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और लगन के दम पर जॉन एच जॉनसन गरीबी की दुनिया से निकलकर दुनिया के अमीरों की सूची में पहुँच गए। 19 जून 1918 को जन्में जॉनसन जब 6 साल के थे, तभी उनके पिता का देहांत हो गया। उनका लालन – पालन उनकी माँ और सौतेले पिता ने किया।

 

जॉन जॉनसन गरीब जरूर थे, लेकिन उनके मन में अपने दम पर कुछ कर दिखाने का अरमान था। कुछ ऐसा करने का सपना था, जिससे दुनिया में उनका नाम हो जाए और वे अमीर बन जाए। यह सब संभव हुआ एक नए काम के विचार से।

 

जॉन जॉनसन को इस नए विचार के लिए कहीं दूर नहीं जाना पडा। यह विचार उनके परिवेश से ही आया। जॉन जॉनसन ने अफ्रीकी – अमेरिकी लोगों के लिए एक पत्रिका निकालने के बारे में सोचा, क्योंकि उस वक़्त अफ्रीकी – अमेरिकी जनता पर केन्द्रित कोई राष्ट्रीय पत्रिका नहीं थी।

 

स्वयं अश्वेत समुदाय का होने के नाते वे जानते थे कि इस तरह की पत्रिका के सफल होने की काफी संभावना हैं, क्योंकि अब तक इस समुदाय को हाशिये पर रखा गया गया था। जॉनसन अश्वेत समुदाय की विशिष्ट पहचान बनाने को लेकर कृतसंकल्प थे। वे जानते थे कि उनका समुदाय इस पत्रिका को हाथोहाथ लेगा, क्योंकि इस तरह की पत्रिका सामुदायिक पहचान का प्रतीक बन जायेगी।

 

विचार तो दमदार था, लेकिन पूंजी की कमी आड़े आ रही थी। जॉनसन ने शिकागो के अपने मित्रों और व्यवसायिओं से आर्थिक मदद माँगी। बहरहाल, उन सभी को इस काम में बहुत जोखिम दिखा, लिहाजा उन्होंने अपने हाथ खींच लिए। जब उन्हें कहीं से कर्ज नहीं मिला, तो उनकी माँ ने उनकी मदद की।

 

वे कपडे सिलने का काम करती थी और उससे इतनी आमदनी नहीं होती थी कि वे पैसे बचा पाएं। बहरहाल, पुत्र की मदद के लिए उन्होंने 500 डॉलर में अपने घर का फर्नीचर गिरवी रख दिया। इसी पैसे के दम पर 1942 में जॉनसन और उसकी माँ प्रकाशन के व्यवसाय में उतर गए।

 

1942 में 24 साल की उम्र में जॉनसन ने नीग्रो डाइजेस्ट निकाली, जो अफ्रीकी – अमेरिकियों पर केन्द्रित पहली राष्ट्रीय पत्रिका थी। उन्होंने इसमें ऐसे न्यूज़, रीप्रिंट और लेख छापे, जिनमे अफ्रीकी – अमेरिकी लोगों की विशेष रुचि थी। पहला अंक हाथोहाथ बिक गया। इसके बाद जॉनसन ने अपनी पत्रिका की बिक्री बढाने पर ध्यान केन्द्रित किया।

 

पहले साल के अंत तक इस पत्रिका की 50,000 प्रतियां हर महीने बिक रही थी। जॉनसन अब सफल हो चुके थे। बाद में उन्होंने कई अन्य पत्रिकाएँ जैसे एबोनी, जेट, एबोनी मैन, एबोनी साउथ अफ्रीका प्रकाशित की। फिर वे पुस्तकों के प्रकाशन के क्षेत्र में उतरे और सफलता के शिखर तक पहुँच गए। अंततः जॉनसन पब्लिशिंग कंपनी अश्वेत स्वामित्व वाली विश्व की सबसे बड़ी प्रकाशक कंपनी बन गयी।

जॉनसन को इतनी दौलत और शोहरत इसलिए मिली, क्योंकि उन्होंने एक ऐसा काम किया था, जो उनसे पहले किसी ने नहीं किया था। जॉनसन कहते हैं, मैं हमेशा युवाओं को छोटी चीजों का सपना देखने की सलाह देता हूँ, क्योंकि छोटी चीजें हासिल की जा सकती हैं।

 

और जब आप किसी छोटे सपने को साकार कर लेते हैं और छोटी सफलता हासिल कर लेते हैं, तो इससे आपको अगला कदम उठाने का आत्मविश्वास मिल जाता हैं। नए काम करने की आदत के वजह से ही जॉनसन 1982 में फ़ोर्ब्स की 400 सबसे अमीर अमेरिकीयों की सूची में पहुँचने वाले पहले अश्वेत पुरुष बन गए।

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