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जेफ बेजोस की सफलता की कहानी

लेटेस्ट जानकारी में आप सभी का स्वागत है, आज हमारे पोस्ट में एक ऐसी हस्ती के बारे में जानने वाले है, इस पोस्ट के माध्यम से जिन्होंने ऑनलाइन मार्केटिंग की दुनिया में आज नंबर १ के रूप में जाना जाता है, वो महान हस्ती का नाम है मिस्टर जेफ़ बेजोस जिनकी सफलता से आज के युवा पीढ़ी भी बहुत कुछ सिख सकती है, तो आईये जानते है वो महान हस्ती के जीवन की पूरी कथा, पूरी तरह पढ़ें क्योकि अधूरा ज्ञान से इस दुनिया में किसी का भी फायदा नहीं हुआ है, अब आगे….

 

नया काम करने वालों में जेफ़ बेजोस का नाम बहुत आगे हैं, जिन्होंने एमेजॉन डॉट कॉम नामक वेबसाइट शुरू करके इतिहास रच दिया। उन्होंने हमें पहली बार इन्टरनेट के माध्यम से अपनी मनचाही पुस्तकें घर बैठे खरीदने की सुविधा दी। उन्होंने ऑनलाइन सेलिंग तथा नेट बैंकिंग के युग का सूत्रपात किया।

 

नया काम करने की बदौलत ही आज बेजोस का नाम संसार के अरबपतियों की सूची में 26 वें स्थान पर हैं और उनके पास 18.4 अरब डॉलर की संपत्ति हैं। यह सब एक विचार की बदौलत हुआ। वेबसाइट पर पुस्तकें बेचने के विचार से।

 

दिलचस्प बात यह हैं कि बेजोस के मन में यह विचार इन्टरनेट पर सर्फिंग करते वक़्त आया था। अप्रैल 1994 में उन्हें नेट पर यह जानकारी मिली कि वेब का इस्तेमाल करने वालों की संख्या २३०० प्रतिशत वार्षिक दर से बढ़ रही हैं।

 

उन्होंने सोचा कि यदि इन्टरनेट का इस्तेमाल करने वालों की संख्या इतनी तेजी से बढ़ रही हैं, तो फिर इस पर आधारित बिज़नस शुरू करना काफी फायदेमंद रहेगा।

 

अगला सवाल था इन्टरनेट पर क्या बेचा जाय ? उनके मन में बहुत सी चीज़ें बेचने के विचार घुमड़ने लगे : संगीत की सीडी, पुस्तक, खिलौने आदि। अंततः बेजोस ने पुस्तक बेचने का निर्णय लिया। इसका कारण यह था कि परम्परागत बुकस्टोर के बजाय ऑनलाइन बुकस्टोर खोलना ज्यादा आसान हैं।

 

परम्परागत बुकस्टोर खोलने के लिए बहुत पूंजी, इमारत, फर्नीचर आदि की जरूरत होती हैं, जबकि इन्टरनेट के माध्यम से पुस्तक बहुत ही कम लागत पर आसानी से बेची जा सकती हैं। इसके अलावा पुस्तक बेचने के व्यवसाय में इतना मार्जिन होता हैं कि कूरियर द्वारा बुक को मुफ्त में भेजने का लालच दिया जा सके।

 

ध्यान देने वाली बात यह हैं कि बेजोस के मन में शुरुआती विचार के बाद बहुत से विचार आये थे और उन्हें सबसे अच्छे विचार को चुनना था। उन्होनें दूरदर्शिता से विश्लेषण करके पुस्तकें बेचने का चयन किया। इन्टरनेट पर पुस्तकों का बिजनेस शुरू करने के लिए उन्हें तीन चीज़ों की ख़ास जरूरत थी : पुस्तकों की तत्काल उपलब्धता, वेबसाइट पर पुस्तकें बेचने का फाइनैंसर और सॉफ्टवेयर।

 

उन्होंने सिएटल में अपना ऑफिस खोलने का फैसला किया, क्योंकि वहाँ पर इनग्राम बुक डिस्ट्रीब्यूटर जैसा बड़ा बुक स्टोर था, जहां पुस्तकें तत्काल मिल सकती थी। शुरुआत में बेजोस के पास कुल तीन कर्मचारी थे। जब वेबसाइट पर पुस्तकें बेचने के सॉफ्टवेयर का सवाल आया, तो बाजार में ऐसा कोई सॉफ्टवेयर था ही नहीं।

 

चूंकि बेजोस खुद कंप्यूटर प्रोग्राम्मिंग जानते थे, इसलिए उन्होंने अपने गैरेज में कंप्यूटर रखवाए और डेटाबेस प्रोग्राम तथा वेबसाइट का सॉफ्टवेयर बनाने लगे। नवम्बर १९९४ से फरवरी १९९५ तक जेफ़ बेजोस ने दिन रात मेहनत करके ऐसा सॉफ्टवेयर बना डाला, जिससे पुस्तकें ईमेल या इन्टरनेट पर आर्डर की जा सके। बेजोस के इरादे बुलंद थे।

 

इसका पता उस दोटूक बात से चलता हैं, जो उन्होंने फ़ाइनैन्सिन्ग कंपनी से कही थी, मैं पुस्तक उद्योग के बारे में कुछ नहीं जानता। मैं तो बस इतना जानता हूँ कि मैं इन्टरनेट से पुस्तकें बेचकर पुस्तक उद्योग का नक्शा बदलने वाला हूँ।

 

amazon.com वेबसाइट जून 1995 में शुरू हुई और इसने सचमुच पुस्तक उद्योग का नक्शा बदल दिया। इसका नाम संसार की सबसे बड़ी नदी के नाम पर रखा गया, क्योंकि बेजोस संसार के सबसे बड़े पुस्तक विक्रेता बनना चाहते थे। जल्द ही जेफ़ बेजोस का सपना सच हुआ और सिर्फ 4 साल बाद 1999 में एमेजॉन डॉट कॉम का बाज़ार मूल्य 6 अरब डॉलर आँका गया।

 

आज उनकी वेबसाइट पर पुस्तकों के अलावा 40 से अधिक प्रोडक्ट खरीदे जा सकते हैं, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक सामान, गहने, जूते, मोबाइल, खिलौने, सीडी वीडियो आदि शामिल हैं। किंडल नामक इबुक रीडर को बाजार में उतारकर एमेजॉन ने लोगों के पढने की आदतों को हमेशा – हमेशा के लिए बदल दिया हैं।

 

तीन कर्मचारियों से शुरू हुई एमेजॉन डॉट कॉम के स्टाफ में आज ३३७०० कर्मचारी हैं। 2010 में एमेजॉन कंपनी की कुल बिक्री ३४.2 अरब डॉलर थी, जिस पर इसे 1.15 अरब डॉलर का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। नए काम का विचार इतना शक्तिशाली था कि इसने जेफ़ बेजोस को अरबपति बना दिया।

 

बेजोस की बेजोड़ दास्तान से हम यह सीख सकते हैं कि नया विचार कभी भी, कहीं भी आ सकता हैं। हमें बस विचारों के बारे में चौकन्ना रहना चाहिए, ताकि हम उनके भावी मूल्य को पहचान सके, जैसा बेजोस ने किया।

 

उन्होनें नेट सर्फिंग करते समय एक ऐसा आंकडा देखा, जिसे हजारों दुसरे लोगों ने भी देखा होगा, लेकिन किसी ने भी उसके भावी महत्व को नहीं पहचाना। लेकिन ध्यान रहे, सिर्फ विचार आना ही काफी नहीं हैं।

 

उस पर अच्छी तरह चिंतन – मनन और विश्लेषण करना होता हैं, कार्य – योजना तैयार करनी पड़ती हैं और वर्षों तक मेहनत करनी पड़ती हैं, तब कहीं जाकर सफलता कदम चूमती हैं। जेफ़ बेजोस ने यह सब किया था और यही स्टीव जॉब्स तथा स्टीफन वोजनियाक ने किया हैं।

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