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जेम्स लेवॉय सोरेन्सन, सीनियर 1921 – 2008

जेम्स लेवॉय सोरेन्सन, सीनियर ने कई मेडिकल उपकरण ईजाद किये, जो अस्पतालों में बहुत महत्वपूर्ण बन चुके हैं, जैसे डिस्पोजेबल पेपर सर्जिकल मास्क्स, ब्लड रीसाइक्लिंग सिस्टम और कंप्यूटराइज्ड हार्ट मॉनिटर। यही नहीं उन्होंने करोड़ों डॉलर का रियल एस्टेट साम्राज्य भी स्थापित किया। इसकी बदौलत वे अरबपति बन गए और उनका नाम अमीरों की सूची में दर्ज हो गया।

सोरेन्सन डॉक्टर बनना चाहते थे, लेकिन द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण उनका यह सपना पूरा नहीं हो पाया। उन्हें अपनी पढाई अधूरी छोड़नी पड़ी। वे अपजॉन  नामक फार्मास्यूटिकल कंपनी में काम करने लगे और साल्ट लेक के डॉक्टरों के पास दवाएं बेचने लगे।

सोरेन्सन हमेशा अवसर की ताक में रहते थे। मैं डॉक्टरों से सुबह जल्दी उनके अस्पताल में मिलने का अपॉइंटमेंट लेता था, इसलिए मेरा काम सुबह नौ बजे तक ख़त्म हो जाता था। दूसरे सेल्समेनों की तरह मैं डॉक्टरों को लंच पर नहीं ले जाता था। इस तरह में अपने पैसे बचा लेता था।

सुबह जल्दी काम ख़त्म होने के बाद सोरेन्सन के पास काफी खाली समय रहता था। इस खाली समय में वे स्थानीय जमीन – जायदाद में निवेश करने लगे और काफी पैसे कमाने लगे। अपजॉन कंपनी को यह जानकार अच्छा नहीं लगा कि उनका सेल्समैन साइड बिजनेस करके अमीर बन रहा हैं, इसलिए उनके कारोबार के भनक लगते ही इसने सोरेन्सन को नौकरी से निकाल दिया।

बेरोजगार होने के बाद 1957 में सोरेन्सन ने डॉक्टरों को दवाएं बेचने के लिए एक नयी कंपनी बनायी। उन्होंने दो पार्टनरों के साथ मिलकर डेसरेट फार्मास्यूटिकल कंपनी की स्थापना की। जिज्ञासु प्रवृत्ति के सोरेन्सन डॉक्टरों को काम करता देख हमेशा खुद से यही सवाल पूछते रहते थे, क्या इसे करने का कोई बेहतर तरीका नहीं हो सकता?

इस सामान्य सवाल के कारण वे आविष्कार करने के लिए प्रयोगों में जुट गए और जल्द ही उन्होंने दुनिया का पहला डिस्पोजेबल पेपर सर्जिकल मास्क और पहला प्लास्टिक केथेटर तैयार कर लिया। उनके ये दोनों ही आविष्कार चिकित्सा के क्षेत्र में काफी उपयोगी साबित हुए और अनिवार्य उपकरण बन गए।

सोरेन्सन को पार्टनरशिप का बंधन रास नहीं आ रहा था, इसलिए 1960 में उन्होंने डेसरेट फार्मस्यूटिकल्स में अपना हिंस्सा बेच दिया। कुछ समय बाद उन्होंने सोरेन्सन रिसर्च कंपनी स्थापित की। यहाँ उन्होंने एक ऐसी मशीन बनायी, जो आपातकालीन स्थिति में रोगी के खून को निकालती, साफ़ करती और वापस शरीर में पहुंचाती थी।

इसके अलावा उन्होंने एक ऐसे कैथेटर का आविष्कार भी किया, जो जीवित ह्रदय तक पहुँच जाता था। यह एक ऐसा काम था, जिससे पहला कंप्यूटराइज्ड हार्ट मॉनिटर बन सका। सोरेन्सन रिसर्च कंपनी का विकास तेजी से हुआ, लेकिन इसके पास पूंजी नहीं थी।

पूंजी की कमी के चलते सोरेन्सन ने 1980 में अपनी कंपनी एबाट लैबोरेट्रीज को बेच दी और यूटा के सबसे अमीर आदमी बन गए। मृत्यु के समय उनके पास 4.5 अरब डॉलर की संपत्ति थी।

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