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पित्ताश्मरी का घरेलू उपचार

पित्ताश्मरी का घरेलू उपचार

कारण

अधिक भोजन करने वाले, पच्चीस वर्ष से अधिक आयु वाले (विशेषतः महिलाओं) या अधिक समय तक बैठे रहने वाले व्यक्तियों में पित्ताशय से निकलने वाले पित्त का प्रवाह कम हो जाता हैं तथा पित्त गाढा हो जाता हैं। पित्ताशय में स्थित कोलेस्ट्रोल पित्त में घुलनशील होता हैं। असंतुलित व गरिष्ठ भोजन, शराब, मांस, अम्लीयता व स्थायी कब्ज के चलते पाचनक्रिया मंद हो जाती हैं, जिससे पित्ताशय स्थित कोलेस्ट्रोल पित्त में नहीं घुल पाता और दूषित पदार्थों के संयोग से पथरी का रूप धारण कर लेता हैं।

 

लक्षण

पित्ताश्मरी द्वारा पित्त का प्रवाह रूक जाने से पित्ताशय में उत्पन्न संकोच के कारण लगातार भयंकर दर्द होता हैं, जो पेट के ऊपर के दाएं भाग में नाभि के पास होता हैं। यह दर्द ऊपर कंधे तक जाता प्रतीत होता हैं। रोगी को पसीना आता हैं, तापमान सामान्य से कम होता हैं, नाड़ी तेज होती हैं। कभी – कभी रोगी को कम्पन भी महसूस होता हैं। उलटी होने पर आराम मिलता हैं। पथरी के पित्त्नली में अटक जाने से सिर में चक्कर और बुखार भी हो सकता हैं।

 

घरेलू चिकित्सा

  • छोटी इलायची – 2, मुनक्का – 6, बादाम गिरी (गुरबन्दी)-6, खरबूजे का मगज 4 ग्राम व मिसरी – 10 ग्राम को खूब घोटकर 150 ग्राम पानी में मिलाकर तथा छानकर रोगी को सुबह – शाम पीने को दें।
  • नीम के पत्तों का रस 2 – 3 चमच्च की मात्रा में सुबह – शाम दें।
  • भुनी हुई हींग, सेंधानमक और सोंठ का सम भाग चूर्ण आधा – आधा चमच्च गर्म पानी के साथ दिन में दो बार दें।
  • हरे आंवले के चार चमच्च रस में बराबर की मात्रा में मूली का रस मिलाकर दिन में तीन बार दें।
  • कच्चा आम, शहद और काली मिर्च के साथ रोगी को नियमित रूप से खाने को दें। कच्चे आम में विद्यमान अम्लीय तत्व पित्त के स्राव को बढाने में सहायक होते हैं। जब पित्त का स्राव बढेगा, तो पित्ताशय में स्थित पथरी फूलकर व टूट कर बाहर आ जाएगी।
  • पके हुए अनार के बीज चार चमच्च की मात्रा मे पीस कर चने के सूप के साथ दें।
  • चुकंदर, गाजर व खीरे का रस सामान मात्रा में मिलाकर रोगी को 200 मि.ली. दिन में तीन बार दें।

 

भोजन तथा परहेज

मांस, शराब, मसालेदार व तला हुआ भोजन, पनीर, दूध से बनी मिठाइयां, उड़द की दाल, खमीर उठाकर बनाए गए पदार्थ जैसे जलेबी, ढोकला, इडली आदि का प्रयोग रोगी को बिलकुल बंद कर देना चाहिए। रोगी को हल्का, उबला हुआ व बिना तला हुआ भोजन करना चाहिए। मूंग की छिलके वाली दाल, चावल, घिया, तोरी, करेला, आंवला, घृतकुमारी, मुनक्का, मुसम्मी, अनार व जौ का प्रयोग करना लाभदायक रहता हैं।

 

नोट: बताये हुए बिधि को यूज़ करते रहे आपको फायदा अवश्य मिलेगा, और फिर भी मन में कोई संकोच है, तो एक बार डॉक्टर की परामर्श अवश्य लें. हमारे लेटेस्ट जानकारी के पोस्ट को इसी तरह पढ़ते रहे और फायदा प्राप्त करते रहें.

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