Home / स्वास्थ / उच्च रक्तचाप एवं निम्न रक्तचाप के लक्षण एवं घरेलू उपचार
high blood pressure
high blood pressure

उच्च रक्तचाप एवं निम्न रक्तचाप के लक्षण एवं घरेलू उपचार

उच्च रक्तचाप

कारण

विश्व भर में होने वाली कुलो मौतों में से लगभग एक चौथाई उच्च रक्तचाप के कारण होती हैं। अभी तक उच्च रक्त चाप के अधिकतर रोगी 40 – 45  वर्ष की अवस्था के बाद इस रोग की गिरफ्त में आते थे , किन्तु अब इस रोग का शिकंजा युवाओं को भी अपनी लपेट में ले रहा हैं। ह्रदय रोगियों में से लगभग 30 प्रतिशत तथा सामान्य व्यक्तियों में से लगभग 10 प्रतिशत उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं।

 

मुख्यतः धमनियों में लचीलापन कम होने व काठिन्य बढ़ने से तथा वाम ह्रदय दौर्बल्य के कारण रक्तचाप बढ़ता हैं। कोलेस्ट्रोल के जमाव के कारण रक्त – वाहीनियों का संकरा हो जाना भी इस रोग की उत्पत्ति में सहायक हैं। चिंता , क्रोध , तनाव आदि मानसिक भाव भी इस रोग को उत्पन्न कर सकते हैं , बेशक रोगी का ह्रदय व धमनियां पूर्ण स्वस्थ क्यों न हो। यह रोग शारीरिक श्रम न करने वाले , अधिक वसायुक्त भोजन करने वाले व्यक्तियों में अधिकतर होता हैं।

 

लक्षण

नींद में कमी , धड़कन का बढना , चक्कर आना , घबराहट , बेचैनी , थोड़ी सी मेहनत करने से ही सांस फूल जाना तथा बिना कारण के गुस्सा आना , ये इस रोग के मुख्य लक्षण हैं।

 

घरेलू चिकित्सा

  • लह्सुन की एक दो कली सुबह खाली पेट पानी के साथ लें।
  • सर्पगंधा का चूर्ण आधा – आधा चमच्च प्रातः व सांय लें।
  • 2 से चार तक कच्चे आंवले सुबह – शाम चबाएं या एक – एक चमच्च आंवले का चूर्ण सुबह – शाम पानी के साथ लें।
  • प्याज का रस व शहद एक – एक चमच्च मिलाकर प्रातः खाली पेट लें। मुसम्मी या संतरे का रस रोगी को एक – एक गिलास सुबह – शाम दें।
  • 1 नींबू के रस में 1 चमच्च शहद मिलाकर 1 गिलास पानी में सुबह खाली पेट व शाम को भोजन से एक घंटा पहले लें।
  • रोगी को प्रातः काल व्यायाम करना चाहिए तथा नंगे पैर घास पर घूमना चाहिए। मांस , मदिरा , तम्बाकू व अधिक वसायुक्त भोजन का त्याग कर देना चाहिए। चिंता , क्रोध व तनाव से बचने के लिए योग व ध्यान में प्रवृत्त होना चाहिए। हरी सब्जियों, परवल, करेला, पपीता तथा फलों के शरबत का सेवन विशेष रूप से करना चाहिए ताकि पेट साफ़ रहे।

 

 

निम्न रक्तचाप

कारण

लम्बे समय तक बीमार रहना , किसी भी गंभीर रोग से पीड़ित होना , नींद की कमी , भोजन में पोषक तत्वों की कमी , दिल का दौरा , सदमा आदि कारणों से निम्न रक्तचाप की शिकायत हो जाती हैं।

 

लक्षण

थकान , कमजोरी , चक्कर आना , बार – बार जम्हाई आना , नींद अधिक आना , काम में रुचि न होना , ये इस रोग के मुख्य लक्षण हैं।

 

घरेलू चिकित्सा

निम्न रक्तचाप के रोगी को पोषक आहार लेना चाहिए। मुसम्मी , संतरे , अनार या गाजर का रस सुबह – शाम लेना चाहिए। अधिक परिश्रम वाला कोई कार्य ऐसे रोगियों को नहीं करना चाहिए , बल्कि पूर्ण विश्राम करना चाहिए जब तक कि रक्तचाप सामान्य न हो जाए।

 

निम्नलिखित औषधियों का प्रयोग निम्न रक्तचाप की चिकित्सा हेतु किया जा सकता हैं :

 

  • 5 – 8 गुरबंदी बादाम व 3 – 4 काली मिर्च को पीसकर एक चमच्च देसी घी में भुनें। जब भुन कर लाला हो जाए , तो ऊपर से 7 – 8 किशमिश भी घी में छोड़ दें। ऊपर से लगभग 400 ग्राम दूध बर्तन में डाल दें। दस – पंद्रह मिनट उबलने के बाद उतार लें। गुनगुना रह जाए , तो पहले काली मिर्च , बादाम व किशमिश खूब चबाकर खाएं , ऊपर से दूध पी लें। यह प्रयोग सुबह – शाम करें। पहले दिन से ही रक्तचाप सामान्य होना शुरू हो जाएगा।
  • भोजन के बाद हीन्ग्युक्त छाछ का प्रयोग करें।
  • आंवले का रस और शहद दो – दो चमच्च मिलाकर सुबह – शाम चाटें।
  • 15 – 20 तुलसी की पत्तियों का रस व एक चमच्च शहद , एक कटोरी दही में मिलाकर लें।
  • टमाटर , अंगूर , पालक , गाजर , संतरा , चुकंदर का प्रयोग करें।

 

आयुर्वेदिक औषधियां

लौह भस्म , नवायस लौह , पुनर्नवा मंडूर , लोहासव , अभ्रक भस्म , हीरा भस्म आदि का प्रयोग निम्न रक्तचाप की चिकित्सा हेतु किया जा सकता हैं।

 

पेटेंट औषधियां

मैनोल (चरक) , एमीरोन सीरप (एमिल) , डिवाइन हेल्थ प्लस व हेल्थ एड कैप्सूल (बी.एम.सी.) फार्मा )

 

नोट: बताये हुए बिधि को यूज़ करते रहे आपको फायदा अवश्य मिलेगा, और फिर भी मन में कोई संकोच है, तो एक बार डॉक्टर की परामर्श अवश्य लें. हमारे लेटेस्ट जानकारी के पोस्ट को इसी तरह पढ़ते रहे और फायदा प्राप्त करते रहें।

About admin

आपने कीमती समय देकर ब्लॉग पढ़ा धन्यबाद, ये पोस्ट आपको पसंद आया हो तो शेयर करना न भूले, ताकि इसे ज्यादा से ज्यादा लोग पढ़ें, अपना विचार जरूर लिखे, इससे हमें और ज्यादा अच्छी और लेटेस्ट जानकारियाँ लिखने के लिए प्रेरित करेगा.

Check Also

helth is weilth

जानकारी खास है, खुद से करें ये 10 वादे, बीमारियां रहेंगी दूर

अपनी सेहत का खास ध्यान रखना तो हमारी अपनी ही जिम्मेदारी है। तो फिर क्यों …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *