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हेनरी फोर्ड महान लोगों की महान सोच

बीसवीं सदी की शुरुआत में कारों को विलासिता की वस्तु समझा जाता था। उस समय मैकेनिक हाथों से एक – एक कार बनाते थे, जिस वजह से कार की लागत ज्यादा हो जाती थी। कारें महंगी होने के कारण स्टेटस सिंबल समझीए जाती थी। ऐसे में आम जनता के लिए सस्ती मोटरकार बनाने का फैसला किया। यह एक क्रांतिकारी विचार था।

 

अमेरिका के मशहूर उद्योगपति हेनरी फोर्ड का नया काम यह नहीं था कि उन्होंने संसार की पहली कार बनायी। उनका नया काम यह था कि उन्होंने पहली सस्ता कार ब्वानाने का सपना देखा और अपने सपने को साकार कर दिया ; उनकी मॉडल टी कार ने दुनिया भर में धूम मचा दी।

 

30 जुलाई 1863 को जन्में हेनरी फोर्ड ने 1901 में कुछ लोगों के साथ मिलकर हेनरी फोर्ड मोटर कंपनी स्थापित कर दी। फोर्ड के पास इस कंपनी की सिर्फ 16 प्रतिशत हिन्स्सेदारी थी। जल्द ही अन्य साझेदारों से उनका विवाद हो गया क्योंकि साझेदार महंगी कार बेचने के पक्षधर थे, जबकि फोर्ड सस्ती कारें बनाना चाहते थे।

 

साझेदार कारों को विलासिता की वस्तु बनाए रखना चाहते थे, जबकी फोर्ड उसे जनसाधारण तक पहुंचाना चाहते थे। फोर्ड ने 1902 में वह कंपनी छोड़कर एक नयी कंपनी बनायी। 1904 में फोर्ड ने 1745 कारें बेची। फिर उन्होंने मॉडल एन बनाया, जो काफी सफल रहा।

 

लेकिन फोर्ड को चैन कहाँ था ? वे इससे भी टिकाऊ और सस्ता मॉडल बनाना चाहते थे। 1907 में उन्होंने फैसला किया कि मॉडल एन में सुधार की जरूरत हैं। नतीजा था 1908 की मॉडल टी कार जिसे आशातीत सफलता मिली। यह कार इतनी सस्ती थी कि आम आदमी भी इसे आसानी से खरीद सकता था।

 

मॉडल टी की वजह से अचानक कारें यातायात का प्रमुख साधन बन गयी। फोर्ड ने मध्यवर्ग को सस्ती कार का नायाब तोहफा देकर उनके जीवन को आरामदेह बना दिया। हेनरी फोर्ड का नाम इसलिए याद रखा जाएगा क्योंकि उन्होंने कार को अमीरों के वाहन से आम आदमी का वाहन बना दिया।

 

20 वीं सदी की शुरुआत में अमेरिका में सिर्फ दो ही वर्ग के लोग थे – अमीर वर्ग और गरीब वर्ग। हेनरी फोर्ड ने कार का प्रजातान्त्रीकरण करके अमेरिका में मध्य वर्ग के निर्माण की नींव रखी। मॉडल टी जनता की कार बन गयी और फोर्ड आधुनिक व्यापक उत्पादन के पितामह बन गए।

 

फोर्ड अपने सपने को साकार करने के लिए। इतने समर्पित थे कि जैसे जैसे मॉडल टी की बिक्री बढ़ती गयी, फोर्ड उसकी कीमत घटाते गए। 1927 तक मॉडल टी की कीमत 850 डॉलर से घटकर 263 डॉलर हो गयी। वे अपना मार्जिन कम करते गए, लेकिन ज्यादा संख्या में कार बिकने के कारण मुनाफ़ा बढ़ता चला गया।

 

कार को सस्ती बनाने के लिए व्यापक उत्पादन जरूरी था, इसलिए फोर्ड ने कार निर्माण में असेंबली लाइन का अभिनव प्रयोग किया। इससे पहले कार एक जगह पर रहती थी और सारे मैकेनिक उसमें एक साथ पुर्जे फिट करते थे, यानी एक समय में एक ही कार बन पाती थी।

 

असेंबली लाइन में कार के पुर्जे अलग – अलग ढेर में अलग – अलग मैकेनिकों के पास रहते थे, कार पट्टे पर चलकर उन मैकेनिकों के पास आती थी और काम ख़त्म होने के बाद दुसरे मैकेनिक के पास चली जाती थी।

 

इस तरह एक ही समय पर कई कारों पर एक साथ काम होने लगा। असेंबली लाइन का मतलब यह था कि काम मजदूर के पास आए, सारा काम कमर की ऊंचाई तक किया जाए ताकि मजदूर को उठने की जरूरत न पड़े और हर काम इतना आसान हो कि गलती की गुंजाइश ही ना रहे। इससे कार बनाने की रफ़्तार तेज हो गयी और कारों का वार्षिक उत्पादन 1 लाख से बढ़कर 2 लाख हो गया।

 

असेंबली लाइन के प्रयोग से उत्पादन तो बढ़ गया, लेकिन यह काम मजदूरों के लिए बहुत नीरस हो गया। जब मजदूर फोर्ड कंपनी छोड़कर जाने लगे, तो 1914 में फोर्ड ने मजदूरों को 5 डॉलर की न्यूनतम मजदूरी का प्रलोभन दिया, जबकि ज्यादातर कम्पनियों में उन दिनों ढाई डॉलर की मजदूरी चल रही थी।

 

इससे हजारों मजदूर दूर – दूर से वहाँ काम की तलाश में आने लगे। एक बार तो फैक्ट्री के गेट पर उम्मीदवारों की इतनी भीड़ लग गयी कि भीड़ को तितर – बितर करने के लिए फायर ब्रिगेड को पानी का छिडकाव करना पडा।

 

असेंबली लाइन के कारण कारें इतनी तेजी से बनी कि 1914 से 1916 के बीच फोर्ड कंपनी का मुनाफा 3 करोड़ डॉलर से बढ़कर 6 करोड़ डॉलर हो गया। आठ घंटे काम के बदले में पांच डॉलर मजदूरी देने का कदम फोर्ड के लिए बहुत लाभकारी साबित हुआ।

 

हेनरी फोत्द बीसवीं सदी के महानतम और सबसे महत्वपूर्ण उद्योगपतियों में से एक हैं। उन्होंने मास प्रोडक्शन की असेंबली लाइन विकसित करके उत्पादन की प्रकृति ही बदल दी। हालांकि उन्होंने मोटर कार का आविष्कार नहीं किया, उन्होंने इसे जन साधारण का वाहन बनाने का अभूतपूर्व काम किया।

 

उनके आने से पहले कारें अमीरों का वाहन थी, महंगी और अव्यावहारिक थी। फोर्ड ने यह सब कुछ बदल दिया। अपने मॉडल टी से उन्होंने औद्योगिक क्रान्ति का सूत्रपात कर दिया और इस प्रक्रिया में खुद अमीर व मशहूर बन गए।

 

कई दशक बाद  आज भी हेनरी फोर्ड की विरासत कायम हैं और उनके पोते विलियम फोर्ड सीनियर का नाम 1.2 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ फ़ोर्ब्स की अमीरों की सूची में आता हैं। 2010 में फोर्ड कंपनी अमेरिका की दसवीं सबसे बड़ी कंपनी थी, जिसने 128.95 अरब डॉलर की बिक्री की और इसे 6.561 अरब डॉलर का मुनाफा हुआ।

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