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पोलेराइड कैमरे का जन्मदाता – एडविन हरबर्ट लैंड

एडविन लैंड ने पोलेरॉइड कैमरे का आविष्कार करके इंस्टेंट फोटोग्राफी को जन – जन तक पहुँचाया। इसके अलावा, उन्होंने पोलेरॉइड सनग्लासेस का आविष्कार भी किया। एडविन लैंड के नाम पर 533 पेटेंट हैं और वो एडिसन की तरह ही धुआँधार आविष्कारक हैं।

 

द्वितीय विश्वयुद्ध के समय एक दिन वे अपनी तीन साल की बेटी का फोटो खींच रहे थे। बेटी ने पूछा कि फोटो तत्काल क्यों नहीं दिख सकता। हालाँकि यह सवाल बचकाना था, लेकिन इससे एडविन लैंड सोचने पर मजबूर हो गए। कोई और पिता होता, तो वह नादान बच्ची के इस सवाल को टाल जाता, लेकिन एडविन लैंड ऐसा नहीं कर सकते थे,

 

क्योंकि वे पहले से ही भौतिक शास्त्र संबंधी प्रयोगों में लगे थे और 1937 में पोलेरॉइड कारपोरेशन स्थापित कर चुके थे। अपनी बेटी के मासूम सवाल को सुनकर एडविन लैंड प्रयोग करने में जुट गए। सोचने लगे कि जब कोई आम आदमी शर्ट या कार खरीदने के बाद तत्काल उसका उपयोग कर सकता हैं तो, फिर फोटोग्राफी के साथ ऐसा क्यों नहीं हो सकता?

 

खींची हुई तस्वीरों को देखने के लिए कई दिनों या हफ़्तों का इंतज़ार क्यों करना पड़ता हैं? घंटों तक इसे धोने और डेवलप करने की जरूरत क्यों पड़ती हैं? लैंड ने जब पोलेरॉइड कैमरा बनाने के प्रयोग शुरू किये, तो उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि छोटे से कैमरे के भीतर ही निगेटिव को डेवलप कैसे किया जाय? लैंड के वैज्ञानिक दोस्तों ने कहा कि यह काम संभव नहीं हैं, इसलिए वे तत्काल दिखने वाले फोटो के सपने को भूल जाएँ। लेकिन लैंड ने अपने प्रयोगशीलता से इस असंभव दिखने वाले काम को भी संभव कर दिखाया।

 

अपनी बेटी के सवाल पूछने के छः महीने बाद ही एडविन लैंड ने समस्या सुलझा ली और 26 नवम्बर 1948 को 60 सेकंड में फोटो डेवलप करने वाला पोलेरॉइड कैमरा बोस्टन में 95 डॉलर में बिक्री के लिए उपलब्ध हो गया। जैसे ही स्टोर खुला, कैमरा खरीदने के लिए ग्राहकों की भीड़ लग गयी।

 

शुरुआत में 56 कैमरे बनाए गए थे, जो कुछ ही घंटों में बिक गए। लैंड इस कैमरे में सुधार करते गए। शुरुआत में तो पोलेरॉइड कैमरे से सिर्फ सेपिया इमेज ही दिख सकती थी। 1950 तक उन्होंने ब्लैक एंड वाइट इमेज वाले कैमरे बना लिए। फिर 1963 में उन्होंने पोलाकलर फ़िल्म बनायी, जिससे इंस्टेंट कलर फोटो खींचे जा सकते थे।

 

1956 तक दस लाख पोलेरॉइड कैमरे बिक चुके थे और 1962 तक चालीस लाख। 1972 में लैंड ने रोशनी में डेवलप होने वाली ड्राई फिल्म बनायी। 1977 में उन्होंने पोलैविजन इंस्टैंट कैमरा बाजार में उतारा। अगर उसी वक़्त बीटामैक्स और वीएचएस विडियो टेप बाजार में नहीं आए होते, तो उनका यह कैमरा बेहद लोकप्रिय हो जाता। अपने आविष्कारों के दम पर लैंड व्यावसायिक जीवन से संन्यास लेने तक अरबपति बन चुके थे और 533 पेटेंट ले चुके थे।

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