Home / लाइफ स्टाइल / एनरो रूबिक की संघर्ष भरी कहानी

एनरो रूबिक की संघर्ष भरी कहानी

बुडापेस्ट, हंगरी में जन्में एनरो रूबिक के दिमाग में एक दिन यूं ही एक विचार आया और उन्होंने खिलौना बना दिया। इस खिलौने में कई रंगों के 54 छोटे – छोटे क्यूब थे, जिन्हें लगाकर एक बड़ा क्यूब बनाया गया था। इस क्यूब की खासियत यह थी कि इसके सभी छोटे क्यूब घूम जाते थे, जिससे इसके रंगों का संयोजन बदल जाता था। चुनौती यह थी कि इसे ऐसी स्थिति में लाया जाय, ताकि क्यूब के सारे हिंस्से के रंग एक से हो जाएं। इसे मैजिक क्यूब या रूबिक्स क्यूब कहा गया।

 

इस क्यूब के आविष्कारक रूबिक ने जब इसे पहली बार बनाया और घुमाया, तो उन्हें काफी संतोष हुआ, लेकिन जब उन्होंने इसे दोबारा पुरानी स्थिति में लाने की कोशिश की, तो वे खुद ही चकरा गए। उन्होंने कहा, मैंने फिर से क्युबों को एक रंग में जमाने की कोशिश की। और उसी पल मेरे सामने एक बड़ी चुनौती आ गयी।

 

उन्हें जमाया कैसे जाय? रूबिक को जल्द ही पता चल गया कि क्यूब को इसके मौलिक स्थिति में लाना आसान नहीं था। आखिर एक महीने में उन्होंने अपने क्यूब की गुत्थी सुलझा ली और पेटेंट  ऑफिस की तरफ चल दिए। 1977 में उन्हें पेटेंट मिला और धीरे – धीरे रूबिक्स क्यूब बनने लगे।

 

शुरुआत में तो इसकी बिक्री धीमी रही, लेकिन तभी इस पर हंगरी के एक व्यवसायी टिबर लैक्ज़ी की नज़र पड़ी। जब उन्होंने कॉफ़ी शॉप के एक वेटर को इससे खेलते देखा, तो वे इतने प्रभावित हुए कि अगले ही दिन उन्होंने रूबिक से मुलाक़ात की और इस क्यूब को पश्चिमी देशों में बेचने के अधिकार ले लिए।

 

लैक्ज़ी ने 1979 में क्यूब को न्यूरेमबर्ग टॉय फेयर में रखा, जहां ब्रिटिश खिलौना विशेषज्ञ टॉम क्रेमर को यह पसंद आ गया। क्रेमर ने आइडियल टॉय कारपोरेशन के सामने क्यूब खरीदने का प्रस्ताव रखा और दस लाख क्यूब्स का आर्डर दे दिया।

 

1980 में क्यूब को लन्दन, पेरिस, न्यूरेमबर्ग और न्यू यॉर्क के खिलौना मेलों में रखा गया। रूबिक्स क्यूब तत्काल लोकप्रिय हो गया। धडाधड आर्डर मिलने लगा, जिससे एक नयी समस्या खड़ी हो गयी – आर्डर इतने ज्यादा थे कि इतनी बड़ी तादाद में क्यूब बनाना संभव नहीं था।

 

बेतहाशा मांग को पूरा करने के लिए रूबिक्स क्यूब बनाने के लिए ताबड़तोड़ फक्ट्रियाँ बनानी पड़ी। यह इतना लोकप्रिय हो गया कि 1982 में ओक्सेनफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी में इसका नाम शामिल हो गया। इसकी अत्यधिक मांग के कारण नकली क्यूब भी बाजार में आ गए, जिस वजह से रूबिक्स क्यूब की बिक्री पर असर पड़ने लगा। लेकिन तब तक रूबिक मिलियनेयर बन चुके थे।

 

कभी डिजाईन के प्रोफेसर के रूप में हर महीने 150 डॉलर कमाने वाले रूबिक ने 50 करोड़ लोगों के दिमाग को चकराकर पैसे कमाए। इस खिलौने की खासियत यह थी कि यह बाकी खिलौनों से हटकर था। यह बोलता नहीं था, सीटी नहीं बजाता था, गोली नहीं मारता था और इसमें बैटरियों की जरुरत नहीं पड़ती थी। इस सब के बावजूद यह दुनिया में सबसे तेजी से बिकने वाला खिलौना बन गया और शायद इतिहास की सबसे लोकप्रिय पजल भी।

 

पांच साल के बच्चों से लेकर विद्वान गणितज्ञ भी इसके आनंद में डूब जाते थे। यह खेल इतना लोकप्रिय हुआ इस पर पुस्तकें लिखी जाने लगी। इस पर लगभग बारह भाषाओं में सौ से भी ज्यादा पुस्तकें लिखी जा चुकी हैं। आज भी कई वेबसाइटो पर इसे हल करने की विधि मिलती हैं। इस एक खिलौने के आविष्कार के दम पर रूबिक हंगरी में मशहूर हो गए और अपने देश के सबसे अमीर व्यक्ति भी बन गए।

आगे ये भी जरुर पढ़ें:

आत्मज्योतिः परमज्योति – Self jyoti param jyoti
मनुष्य की उत्तमकोटि – Man of good quality
गीता में कृष्ण का उपदेश – Teaching of Krishna in the Bhagavad Gita
सेवा ही मेरा संन्यास हैं – भगवान् महावीर
विनम्रता हैं अपरिसीम बल – Humility is the unreliable force
लोभ पाप का बाप है – Greed is the father of sin

About admin

आपने कीमती समय देकर ब्लॉग पढ़ा धन्यबाद, ये पोस्ट आपको पसंद आया हो तो शेयर करना न भूले, ताकि इसे ज्यादा से ज्यादा लोग पढ़ें, अपना विचार जरूर लिखे, इससे हमें और ज्यादा अच्छी और लेटेस्ट जानकारियाँ लिखने के लिए प्रेरित करेगा.

One comment

  1. http://www.freeprachar.com के द्वारा पूरी दुनिया में अपने बिज़नेस का प्रचार करें TOTALLY FREE

Leave a Reply