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वमन रोग का आसान उपचार

वमन रोग नहीं अन्य रोग का लक्षण

कारण

वमन या उलटी आना वास्तव में कोई स्वतंत्र रोग न होकर किसी अन्य रोग का लक्षण हैं। इन रोगों में प्रमुख हैं – अजीर्ण, अम्लपित्त, आहार – विषाक्तता, विषाक्तता, आमाशय के निचले भाग में अवरोध, आमाशय में कैंसर या टी,बी, का संक्रमण, पित्ताशय शोथ, तीव्र वृक्क शोथ या पित्ताशय में पथरी तथा मूत्र – विष – संचार। सफ़र के दौरान भी कुछ व्यक्तियों को उलटी की शिकायत हो जाती हैं।

लक्षण

वमन में पहुंचा हुआ या आधा – अधूरा पचा आहार पूर्णतः या आंशिक रूप से मुख से बाहर निकल जाता हैं।

घरेलू चिकित्सा

चूंकि वमन कई रोगों का लक्षण हैं, अतः लक्षणों के अनुसार रोग का निदान करके ही वमन की चिकित्सा की जाती हैं। लाभ न होने पर किसी अन्य रोग की संभावना को ध्यान में रखते हुए तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। उलटी के प्रारम्भिक लक्षणों में निम्नलिखित चिकित्सा दी जा सकती है :

  • दो भाग सौंफ, दो भाग खांड़ व एक सफ़ेद जीरा बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। आधा चमच्च से एक चमच्च की मात्रा दो सप्ताह तक लेने से अजीर्ण व अम्लपित्त जन्य वमन में फायदा होता हैं।
  • दो लौंगे कूटकर आधा कटोरी पानी में उबालें। पानी आधा बचा रहने पर उसे छानकर स्वाद के अनुसार मिसरी मिलाकर लें।
  • छाया में सुखाई हुई तुलसी की पत्तियां दो भाग, अजवायन दो भाग, सेंधानमक एक भाग, तीनों को कूट – पीसकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण आधा चमच्च की मात्रा में गुनगुने पानी के साथ लेने से वमन में तुरंत आराम मिलता हैं। वृक्क शोथ जन्य वमन में यह चूर्ण सुबह – शाम लेने से वमन और वृक्क शोथ दोनों में आराम मिलता हैं।
  • सूखे नारियल की जटा को जलाकर राख कर लें। इस भस्म को पीसकर व छानकर एक ग्राम की मात्रा में एक घूँट ताजे पानी के साथ देने से उल्टियां आनी तुरंत रुक जाती हैं।
  • पिपरमेंट जीभ पर रखने से वमन रुक जाता हैं।
  • कपूर का अर्क पीने से उलटी रूक जाती हैं।
  • अजवायन का सत, कपूर व पिपरमेंट को एक शीशी में मिलाकर रखें। तीनों पिघलकर जब द्रव रूप बन जाएं, तो यह मिश्रण अमृतधारा कहलाता हैं। दो घूँट पानी में 3 –  4 बूँद डालकर पिलाने से उलटी तुरंत रूक जाती हैं।
  • दो चमच्च तुलसी का रस, दो चमच्च शक्कर या मिश्री तथा आधा चमच्च पिसे हुए छोटे इलायची के बीज एक कप पानी में मिलाकर लें।
  • बच्चों को उलटी होती हो, तो तुलसी के बीज शहद में मिलाकर चटाएं। शहद के स्थान पर तुलसी के बीज दूध में भी पीसकर दिया जा सकता हैं।
  • यदि बुखार के साथ उलटी हो रही हो, तो मिसरी पीसकर तुलसी के रस में मिलाकर दें। तुरंत आराम मिलता हैं।
  • बस में सफ़र के दौरान जिन व्यक्तियों को वमन की शिकायत होती हो, उन्हें सफ़र से एक घंटा पूर्व एक लौंग चूस लेना चाहिए। सफ़र के दौरान भी दो – दो घंटे बाद एक लौंग चूसते रहना चाहिए।
  • उबकाई आने व जी मिचलाने पर कागजी नींबू काटकर, उस पर सेंधानमक व काले मिर्च लगाकर धीरे – धीरे चूसें। तुरंत आराम हो जाएगा।
  • मीठे नीम के दस पत्ते एक गिलास गर्म पानी में पीसकर 2 घंटे के लिए डाल दें। ठण्डा होने पर आधी – आधी कटोरी दिन में तीन बार लें।
  • रोगी को सुबह – शाम अनार का रस पिलाएं।

नोट: बताये हुए बिधि को यूज़ करते रहे आपको फायदा अवश्य मिलेगा, और फिर भी मन में कोई संकोच है, तो एक बार डॉक्टर की परामर्श अवश्य लें. हमारे लेटेस्ट जानकारी के पोस्ट को इसी तरह पढ़ते रहे और फायदा प्राप्त करते रहें।

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