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दूसरों की नक़ल करने से आप अपनी पहचान खो देते है

आप और मै समान पैदा हुए है, लेकिन फिर भी एक दूसरे से अलग है, क्या आप दुनिया में अपनी अलग जगह बनाना चाहते है, तो फिर अपने जैसे ही बनें, जो आप सचमुच है. आप इस समय जैसे है, उससे बेहतर बनने की दिशा में आपका पहला कदम यही है, किसी भी व्यक्ति को तबतक आदर्श सफलता नहीं मिल सकती है, जब तक की वह अपने सही जगह पर नहीं पहुंच जाये, इंजन के तरह इंसान को भी अपनी पटरी पर ही शक्तिशाली होना चाहिए, चाहे बाकि जगहों पर वो कमजोर हो, अपने वास्तविक स्वरूप का विकास करें।

 

भीड़ का अनुसरण करने से बचें, इंजन की तरह बने, न की आखिरी डिब्बे की तरह, जैसा हर्मन मेलबिल ने लिखा है, नक़ल करके सफल होने से ज्यादा अच्छा यह है, की मौलिक बनकर असफल हो जाएँ। आम लोग लिक से हटकर चलने के वजाय भीड़ के साथ गलत रस्ते पर चलना पसंद करते है, दूसरों की तरह बनने की कोशिश में हम अपने तीन चौथाई स्वरूप की बलि चढ़ा देते है।

 

दूसरों की तरह बनने से संतुष्टि नहीं मिलती और विकास के सारे रास्ते बंद हो जाते है। क्या आप जानते है की आपको ईश्वर ने सबसे अलग और अनूठा बनाया है ? सबसे अलग होने की हिम्मत दिखाएँ और अपनी तक़दीर खुद बनायें।

 

खुद की तरह बनें। इस काम के लिए आपसे काबिल वयक्ति और कौन है ? खुद से दो सवाल पूछें। अगर मै किसी दूसरे की तरह बनने की कोशिश करूँगा, तो मेरी तरह कौन बनेगा ? अगर मै अपने स्वरुप को कायम नहीं रखूँगा, तो मेरी पहचान क्या होगी ? आप अपनी क्षमता का जितना ज्यादा विकास करते है, आप दूसरों का उतना ही कम अनुकरण करते है,

 

किसी दूसरे की तरह बनने की कोशिश करना अपनी हार तय करना है। जिंदगी में आपका एक प्रमुख लक्ष्य यह है की आप अपने अनूठे स्वरूप का विकास करेंगे। जब आप किसी दूसरे जैसा बनने की कोशिश करेंगे, तो ज्यादा से ज्यादा आप दूसरे स्थान पर ही रहेंगे।

 

हम किसी दूसरे वयक्ति की रह पर चलकर अपनी तक़दीर नहीं बना सकते है।  जो वयक्ति कभी अकेला नहीं चलता है और हमेशा दूसरों की पदचिन्हों की ही तलाश करता रहता है, वह कभी कोई नयी खोज नहीं कर पायेगा। घिसे पिटे रास्ते के अनुसरण करने के वजाय वहां जाओ जहा कोई रास्ता ना हो और एक नया रास्ता बनाकर दिखा दो, ईश्वर ने हम सभी को कोई न कोई काम अच्छी तरह से करने की योग्गता दी है।

 

अपने आस पास की दुनिया को कभी इस बात की अनुमति ना दें की आपको दवाकर अपने साँचे में ढाल लें, इसके वजाय ईश्वर को अपना पुनःनिर्माण करने दें, ताकि आपका पूरा मानसिक नजरिया बदल जाए, आप अपनी तरह जितना ज्यादा बनते है, किसी और की तरह उतना ही कम बनते है, आप एक पेड़ की तरह है आपको उस फल को सामने लाना चाहिए, जो आपके भीतर है।

 

साधारण न बने। साधारण व्यक्ति कही नहीं पहुंच पाता है, चैम्पियन बनने के लिए आपको आसाधारण बनना होगा, आपकी जिम्मेदारी किसी दूसरे के सांचे में ढलना नहीं है, बल्कि यह है की ईश्वर ने आपको जैसा बनाया है , आप उनका सर्वश्रष्ठ विकास करें कभी भी खुद के साथ समझौता ना करें,

 

आपका स्वरूप ही आपकी समूची दौलत है, लगभग हर वयक्ति अपनी जिंदगी का एक हिस्सा ऐसे गुणों को प्रदर्शित करने में बर्बाद करता है, जो उनमे नहीं होते है, आप जो नहीं है, वह दिखने की कोशिश न करें, जो आपको नहीं करना चाहिए।

आप एक अदितीय चमत्कार है, आप वैसे ही है, जैसा ईश्वर ने आपको बनाया है, और अगर वह संतुष्ट है, तो आपको भी संतुष्ट होना चाहिए।

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