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किसी की आलोचना करने में समय व्यर्थ न गवाएं

सभी प्रगतिशील लोगों में एक खास बात होती है आलोचना उनकी तरफ खिची चली आती है, आलोचना पर वह कैसी प्रतिक्रिया करते हैं उसी से उनकी प्रगति की रफ्तार तय होती है, जिस व्यक्ति का पैर कभी किसी दूसरे के पैर पर नहीं पड़ता है, वह शायद एक ही जगह पर खड़ा हुआ है, मैं हाल ही में टाइम्स मैगजीन पढ़ रहा था, जिसमें बिल्ली ग्रैहम पर कवर स्टोरी छपी थी, मैं यह देखकर हैरान हो गया कि उस लेख में उनके कई साथियों ने उनकी आलोचना की थी।


अचानक मुझे याद आया कि सभी महान लोगों को कभी न कभी आलोचना का सामना करना पड़ा है, अपने बड़े लक्ष्यों और उपलब्धियों के लिए अनुचित आलोचना को न सिर्फ स्वीकार करना चाहिए, बल्कि उसकी उम्मीद भी करें। यहां तक कि ईसा मसीह की भी बार-बार आलोचना हुई थी अगर ईसा मसीह की आलोचना हुई थी तो निश्चित रूप से बिल्ली ग्राहक आपकी और मेरी भी आलोचना होगी।


जो लोग दिल से आपकी भलाई चाहते हैं और आप जैसी मानसिकता वाले हैं उनकी सृजनात्मक आलोचना लाभदायक हो सकती है, लेकिन बाकी लोगों की आलोचना पर आपको प्रतिक्रिया नहीं करनी चाहिए, आप तो सिर्फ ईश्वर के प्रति जवाब दें, अगर आप उपहास उड़ाने वाले को बाहर निकाल देंगे, तो आप तनाव लड़ाई और झगड़े से मुक्त हो जाएंगे। दोस्त के साथ बताया जा सकने वाला समय किसी आलोचक को न दें, मुझे एडवर्ड गिबन की यह बात पसंद है, जिन लोगों के विचारों का मैं सम्मान नहीं करता हूं, मैं कभी उनके साथ बहस करने की गलती नहीं करता।


किसी काम की आलोचना करना उसे करने से हजार गुना ज्यादा आसान होता है, यही कारण है कि आलोचक कभी समस्याओं को नहीं सुलझा पाते, सिर्फ फलदार वृक्ष पर ही लकड़ियां और पत्थर फेंके जाते हैं. कोई भी मूर्ख आलोचना कर सकता है, बुराई कर सकता है और शिकायत कर सकता है। और ज्यादातर मुर्ख यही करते हैं, जो व्यक्ति यह कहता है वह काम नहीं किया जा सकता उसे उस व्यक्ति को नहीं रोकना चाहिए, जो वह काम कर रहा है याद रखें जब आपको पीछे से लात मारी जाती है तो इसका मतलब यह है कि आप आगे पहुंच गए हैं।

 

एक कहावत के अनुसार आलोचक उस लड़की की तरह है जो नाचना नहीं जानती है, इसलिए वह बहाना बनाते हुए कहती है बैंड वाले को बजाना नहीं आता, आलोचक सवालों को गहराई से जाने बिना ही सब सवालों के जवाब जानते हैं। चमत्कारिक सच्चाई से सामना होने पर भी तथ्य बताकर अपना बचाव करते हैं। अपनी आस्था और खुशी आलोचना आलोचकों की फिलासफी से बर्बाद ना होने दें। उनके गलत और उथले जवाब ईसा मसीह के शब्दों के बजाए इंसानों के विचारों पर आधारित होते हैं।


आलोचक वह व्यक्ति है जिसे उससे महान लोगों की प्रशंसा के लिए पैदा किया गया है, लेकिन वह उन्हें कभी खोज ही नहीं पाता है, आलोचक किया मानता है कि सूरज की रोशनी का मुख्य लक्ष्य छाया उत्पन्न करना है, वह किसी चीज में भरोसा नहीं करता है लेकिन फिर भी वह यह चाहता है कि आप उस पर भरोसा करें, वह हर चीज की कीमत तो जानता है लेकिन किसी भी चीज का महत्व नहीं जानता है। अपने आलोचकों की बातों पर प्रतिक्रिया करने में समय बर्बाद न करें क्योंकि आप किसी आलोचक के एहसानमंद नहीं है।


छोटे नहीं बड़े बने आलोचक न बने, हमें अपने आसपास के लोगों तक अपने विरोधाभासी मानसिक अवस्थाएं पहुंचाने का कोई हक नहीं है, हमें उनसे सूरज की रोशनी छीनने का उसी तरह कोई हक नहीं है जिस तरह हमें उनके घर में घुसकर उनका चांदी का सामान चुराने का कोई हक नहीं है, यह याद रखे कि दूसरों की आलोचना करने में आप बिना किसी तनख्वाह के ओवरटाइम करेंगे।

जिस काम में आप दूसरों का मूल्यांकन करते हैं उसमें आप खुद को दोषी ठहराते हैं, कभी भी किसी पर कीचड़ उछाले अगर आप ऐसा करेंगे तो हो सकता है आप का निशाना सही लग जाए, लेकिन इससे आपके हाथ भी गंदे हो जाएंगे। क्योंकि आप सितारा बनने में असफल हो गए हैं इसलिए कभी बादल ना बने खुद को सुधारने में इतना समय लगाएं, कि आपके पास दूसरों की आलोचना करने का वक्त ही ना रहे, अपने समय और ऊर्जा का प्रयोग आलोचना करने के बजाय सृजन करने में करें।

 

याद करना हो तो कोई अच्छी चीज़ याद करें,
काम करना हो तो कोई अच्छा काम करें।
तोड़ने वालों को दल में नहीं,
बल्कि निर्माण करने वालों को दल में काम करें।

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