Home / ज्ञानवर्धक कहानियाँ / गाय और बिल्ली
cow and cat
cow and cat story

गाय और बिल्ली

गाय और बिल्ली

जब राजा कृष्णदेव की राजधानी में चूहों का आतंक ज्यादा फ़ैल गया तो उन्होंने उससे निजात पाने के लिए बिल्लियों को पालने का फैसला किया। जैसे – तैसे करके बिल्लियों को मंगाया गया और उन्हें नगर के लोगों को दे दिया गया। जिसे भी बिल्ली दी गयी, उसे एक गाय भी दी गयी, ताकि वह उसका दूध पिलाकर बिल्ली का पालन – पोषण कर सके।

तेनालीराम को भी इसी तरह एक बिल्ली और एक गाय दे दी गयी। उसने पहले ही दिन अपनी बिल्ली के सामने उबलते हुए दूध से भरा बर्तन रख दिया। भूख से पीड़ित बिल्ली ने जल्दी से कटोरे में मुंह मार दिया तो उसका मुंह जल गया। इस घटना के बाद जब भी उस बिल्ली के सामने ठंडा दूध भी रखा जाता, तो वह दुम दबाकर भाग खड़ी होती। इस तरह तेनालीराम उस गाय का सारा दूध अपने घर में प्रयोग कर लेता।

ये भी पढ़ें: हिसाब चुकता किया – ज्ञानवर्धक हिंदी कहानी

कुछ समय बाद जब सभी बिल्लियों की जांच की गयी तो बाकी बिल्ली तो गाय का दूध पीकर मोती ताजी हो गयी थी, तेनालीराम की बिल्ली सूखकर काँटा हो चुकी थी। यह देखकर राजा को बड़ा गुस्सा आया और उन्होंने क्रोधित होते उए तेनालीराम से पूछा, क्या तुमने अपनी बिल्ली को गाय का दूध नहीं पिलाया ?

महाराज ! मैंने तो इसे गाय का दूध पिलाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन यह तो दूध छूती भी नहीं। तेनालीराम ने बड़े भोलेपन से यह बात कही।

क्या कहते हो ? बिल्ली गाय का दूध नहीं पीती ? तुम समझते हो, मैं तुम्हारी इस बात को सत्य मान लूंगा। राजा ने बिफरते हुए कहा।

ये भी पढ़ें: तेनालीराम का अद्भुत डंडा – हिंदी कहानी

हाथ कंगन को आरसी क्या ? महाराज आप अपने ही सामने इसे गाय का दूध पिलाकर सत्यता की जांच कर लें। तेनालीराम ने अनुनय की।

ठीक हैं तुम्हारी बात सच निकली तो मैं तुम्हें सौ स्वर्ण मुद्राएं दूंगा। और अगर इस बिल्ली ने दूध पी लिया, तो तुम्हें सौ कोड़े लगाए जाने की सजा दूंगा। राजा ने अपनी शर्त रखते हुए कहा।

तेनालीराम ने राजा कृष्णदेव की यह शर्त कबूल कर ली।

फिर दूध से भरा खुले मुंह का बर्तन मंगवाया गया और राजा ने उस बिल्ली को अपने गोद में लेकर बिल्ली को दूध पिलाने का प्रयास किया। मगर बिल्ली ने जैसे ही दूध से भरा बर्तन देखा, तो डर के मारे राजा के हाथ से छिटककर म्याऊं म्याऊं करती हुई भाग गयी।

ये भी पढ़ें: अनोखा पुरस्कार – हिंदी ज्ञान से भरपूर कहानी

इस दृश्य को देखकर तेनालीराम को चढ़ आयी और उसने राजा से कहा, महाराज शर्त के अनुसार मुझे स्वर्ण मुद्राएं देने की कृपा करें।
वह तो ठीक हैं, लेकिन मैं इस बिल्ली का अच्छी तरह मुआयना करना चाहता हूँ। राजा कृष्णदेव ने कहा।

फिर बिल्ली का अच्छी तरह निरीक्षण करने पर राजा ने पाया कि उसके मुंह पर जले का एक बहुत ही बड़ा सा निशान मौजूद हैं।

दुष्ट कहीं के ? तुमने जान बूझकर इस बिल्ली को गर्म दूध पिलाया ताकि यह हमेशा के लिए दूध पीने से डर जाए। यह सब तुम्हारी ही कारिस्तानी हैं।  राजा कृष्णदेव ने तेनाली को डपटते हुए कहा।

महाराज ! मैं भी एक विनती करूण तेनालीराम ने अनुनयपूर्ण शब्दों  में राजा से कहा।

ये भी पढ़ें: मरियल घोड़ा – हिंदी कहानी

कहो क्या कहना चाहते हो ? राजा ने तेनालीराम को घूरते हुए कहा।

महाराज ! आप एक राजा हैं। और राजा का दायित्व होता हैं कि अपनी प्रजा की उचित देखभाल करें। क्या यह उचित नहीं हैं कि जानवरों  को दूध पिलाने से पहले हमारे बच्चों को दूध पिलाया जाए, ताकि वे मजबूत बनकर इस राज्य की रक्षा कर सके। तेनाली ने कहा।

मनुष्य के बच्चों को बिल्लियों से पहले दूध मिलना चाहिए।

राजा कृष्णदेव तेनालीराम की बात पर मुस्कुराए बिना नहीं रह सके और उसे सौ स्वर्ण मुद्राएं देते हुए कहा, बात तो तुम्हारी उचित हैं लेकिन मनुष्य को भी इतनी अकल जरूर रखनी चाहिए कि वह मासूम जानवरों के साथ दुष्टता का व्यवहार कदापि न करें।

ये भी पढ़ें:

राजदरबार में प्रवेश – हिंदी कहानी

ल रंग का मोर, ज्ञान से भरपूर कहानी

धोनी के छक्के ने 28 साल बाद रचा इतिहास, इस छक्के का रिकॉर्ड पूरी दुनिया नहीं तोड़ पायेगा

सबसे बड़ा मूर्ख – ज्ञानवर्धक हिंदी कहानी

शरीर और त्वचा दोनों के लिए गुलाब के अनगिनत फायदे

बिना जिम गए यह 5 चीजें खाकर हफ्ते भर में घटाएं अपनी मोटी तोंद

About admin

आपने कीमती समय देकर ब्लॉग पढ़ा धन्यबाद, ये पोस्ट आपको पसंद आया हो तो शेयर करना न भूले, ताकि इसे ज्यादा से ज्यादा लोग पढ़ें, अपना विचार जरूर लिखे, इससे हमें और ज्यादा अच्छी और लेटेस्ट जानकारियाँ लिखने के लिए प्रेरित करेगा.

One comment

  1. http://www.freeprachar.com के द्वारा पूरी दुनिया में अपने बिज़नेस का प्रचार करें TOTALLY FREE

Leave a Reply