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जुकाम के कारण एवं घरेलू उपचार

जुकाम

कारण

जुकाम में नाक की स्लेष्मकला सूज जाने से नाक बंद हो जाती हैं या बहने लगती हैं। नाक के साथ – साथ गले में भी हल्की सूजन रहती हैं।  जुकाम (प्रतिश्याय) गर्मी को छोड़कर बाकी ऋतुओं में अधिक होता हैं। बालकों में अपेक्षाकृत अधिक होता हैं। ऋतुओं के बदलने के समय जब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता शक्ति कम होती हैं , जुकाम का वाइरस शरीर पर हमला करता हैं। रोगियों के छींकने , खांसने , थूकने , हाथ मिलाने से यह रोग अन्य स्वस्थ व्यक्तियों को भी जकड़ लेता हैं। जो व्यक्ति पहले ही अजीर्ण , कब्ज आदि रोगों से पीड़ित हो या जिसे ठंड लग गयी हो या जिन्हें धूल , धुंए आदि से एलर्जी हो , उन्हें यह रोग जल्दी – जल्दी और ज्यादा होता हैं।

 

लक्षण

नाक बंद हो जाती हैं या बहने लगती हैं। नाक में खुजली होती हैं , गले में दर्द व शुष्कता का अनुभव होता हैं। छींकें आती हैं , जो नाक बहना शुरू होने के बाद कम हो जाती हैं। खांसी शुरू हो जाती हैं।

 

घरेलू चिकित्सा

  • तुलसी के सूखे पत्तों का क्वाथ बनाकर नस्य लें।
  • इमली के पत्तों का काढा बनाकर चार – चार चमच्च दिन में दो बार लें।
  • रात को सोते समय नाक के दोनों छिद्रों में देसी घी लगायें या सरसों के तेल की 2 -1 बूँदें डालें।
  • यदि जुकाम पाक गया हो , अर्थात नाक से पीला दुर्गन्धयुक्त स्राव आ रहा हो , तो सोंठ 4 भाग , काली मिर्च 1 भाग व लौंग 1 भाग का चूर्ण बनाकर चाय में उबालकर पिएं। तुलसी के पत्ते और गुलवनफशा दो – दो भाग तथा मुलेठी , दालचीनी , ब्राह्मी , सोंठ और छोटी इलायची प्रत्येक के एक एक भाग लेकर चूर्ण बना लें। तैयार मिश्रण में से एक ग्राम चूर्ण एक कटोरी पानी में उबालकर गर्म – गर्म पिएं।
  • एक कटोरी उबले हुए पानी में आधा नींबू व चुटकी भर नमक डालकर सुबह खाली पेट पिएं।
  • तुलसी के सूखे पत्तों का चूर्ण सिगार या चिलम में भरकर पिएं अथवा तुलसी के पत्तों का काढा बनाकर सुबह – शाम एक – एक कटोरी पिएं अथवा तुलसी के पत्तों के एक चमच्च रस में बराबर का शहद मिलाकर चाटें।
  • रात को आधा पाव गुड़ या ताजे व भुने हुए गर्म चने खाकर सो जाएं , पानी न पिएं।
  • गेंहूं के चोकर की बनी चाय सुबह – शाम पिएं , साथ में थोड़ा सा नमक भी डाल लें।
  • तुलसी के पत्ते , अदरक , लौंग व काली मिर्च में उबालकर पिएं।
  • सुबह शाम 5 – 7 खजूर दूध में उबाल कर लें।
  • जुकाम पुराना होने पर 5 ग्राम अदरक घी में भूनकर सुबह – शाम लें या एक पाव दूध में इसे उबालकर उबली हुई अदरक चबाकर खाएं , ऊपर से गर्म दूध पी लें।
  • एक कटोरी दूध में एक चमच्च हल्दी डालकर गर्म करें और थोड़ी सी शकर डालकर रोगी को पिला दें।
  • 3 लौंगों को आधा कटोरी पानी में उबालें , पानी आधा रह जाने पर आंच से उतार कर थोड़ा सा नमक डालकर पिएं।
  • रीठे का छिलका और कायफम सम भाग लेकर बारीक पीस लें। इसे सूंघने से छींक लगने लगेगी और जुकाम ठीक हो जाएगा।
  • सोंठ , काली मिर्च और पिप्पली , तीनों को बराबर मात्रा में लेकर कूट लें। इस चूर्ण में इसका चार भाग गुना गुड़ मिलाकर मटर के दाने के आकार की गोलियां बना लें। एक – एक गोली दिन में तीन बार गर्म पानी से सेवन करें।

 

नोट: बताये हुए बिधि को यूज़ करते रहे आपको फायदा अवश्य मिलेगा, और फिर भी मन में कोई संकोच है, तो एक बार डॉक्टर की परामर्श अवश्य लें. हमारे लेटेस्ट जानकारी के पोस्ट को इसी तरह पढ़ते रहे और फायदा प्राप्त करते रहें। you see this and

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