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श्वसन संबंधी रोग के कारण एवं उपचार

हिचकी

कारण

साधारणतः श्वास महापेशी के संकुचन के समय कंठ कपाट खुला रहता हैं , जिससे सांस अन्दर आ जाता हैं। लेकिन कभी – कभी श्वास महापेशी में अचानक ही संकुचन हो जाता हैं और यह बार – बार सिकुड़ने लगती हैं , जबकि कंठकपाट बंद होता हैं। इससे अन्दर का सांस रूक जाता हैं और ‘हिक’ जैसी ध्वनि निकलती हैं , जिसे हिचकी कहते हैं।

श्वास महापेशी में विक्षोभ , आंत या पेट में हवा होने या किसी संक्रमण के कारण सूजन होने या पेट में कीड़े होने या मस्तिष्क में किसी प्रकार के संक्रमण से श्वास महापेशी की नाड़ी में विक्षोभ पैदा होता हैं। तेज बुखार या गुर्दों के पुराने रोग के कारण यदि रक्त में विष संचार हो जाए , तो भी यह नाड़ी प्रभावित होने से हिचकी पैदा हो सकती हैं।

घरेलू चिकित्सा

  • सोंठ या पिप्पली को खांड में मिलाकर नस्य लें।
  • जल में सेंधानमक मिलाकर भी नस्य लिया जा सकता हैं।
  • आंवला , सोंठ व पीपल एक – एक भाग व खांड 3 भाग लेकर यह चूर्ण आधा से एक चमच्च की मात्रा में शहद के साथ चटाएं।
  • पीपल का चूर्ण एक ग्राम की मात्रा में शहद के साथ चाटें।
  • खजूर या मुलेठी का चूर्ण एक ग्राम शहद के साथ चाटें।
  • एक ग्राम सोंठ का चूर्ण थोड़े – से गुड़ के साथ लें।
  • नींबू के रस में शहद और काले नमक का चूर्ण बनाकर लें।
  • सौंफ का अर्क और गुलाब जल एक – एक चमच्च मिलाकर लें।
  • पेठे का स्वरस चार चमच्च पिएं।
  • ताजे अदरक के छोटे – छोटे टुकड़े करके चूसें।
  • आधा चमच्च कलौंजी का चूर्ण 10 ग्राम मक्खन में मिलाकर खिलाएं।
  • 2 चमच्च सरसों का बारीक पिसा हुआ चूर्ण एक कप गर्म पानी में मिलाकर चाय के तरह घूँट – घूँट करके पिएं।
  • चुटकीभर जायफल का चूर्ण चार चमच्च आंवले के रस के साथ दिन में 3 बार लें।
  • आधा चमच्च कलौंजी के बीजों का चूर्ण 1 गिलास छाछ के साथ लें।

नोट: बताये हुए बिधि को यूज़ करते रहे आपको फायदा अवश्य मिलेगा, और फिर भी मन में कोई संकोच है, तो एक बार डॉक्टर की परामर्श अवश्य लें. हमारे लेटेस्ट जानकारी के पोस्ट को इसी तरह पढ़ते रहे और फायदा प्राप्त करते रहें।

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One comment

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