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ज्ञानवर्धक कहानियाँ

अनोखी चित्रकारी – ज्ञान से भरपूर कहानी

राजा कृष्णदेव ने अपने लिए नया महल का निर्माण करवाया जिसकी दीवारों पर उन्होंने एक प्रसिद्द कलाकार द्वारा बड़े सुन्दर चित्र बनवाये थे। एक दिन राजा कृष्णदेव अपने प्रमुख दरबारियों को उन चित्रों को दिखला रहे थे। चित्र देखकर सभी दरबारी ने उनकी मुक्त कंठ से प्रशंसा की, पर चतुर …

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खतरनाक घोड़ा (ज्ञान से भरपूर कहानी)

विजयनगर चहुँ ओर से मजबूत राज्यों से घिरा हुआ था। राजा कृष्णदेव का विचार था कि उनकी घुड़सवारी फ़ौज भी मजबूत हो ताकि हमला होने पर शत्रुओं का सामना भली – भांति किया जा सके इसलिए उन्होंने अरबी नस्ल के घोड़े खरीदने का विचार किया। उनके प्रमुख मंत्रियों ने सलाह …

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बैंगनों की चोरी – ज्ञानवर्धक कहानी

राजा कृष्णदेव के बाग़ में अन्य साग – सब्जियों के साथ – साथ बढ़िया किस्म के बैंगन के कुछ पौधे लगे थे। एक बार राजा कृष्णदेव ने अपने प्रमुख दरबारियों को दावत दी। जिसमें उन बैंगनों की सब्जी परोसी गयी। तेनालीराम को बैंगन की सब्जी बड़ी स्वादिष्ट लगी। घर आकर …

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मनुष्य स्वभाव और कुत्ते की दुम – ज्ञान से भरपूर कहानी

राजा कृष्णदेव का दरबार जुड़ा था और दरबार में इस बात पर गरमागरम बहस हो रही थी कि मनुष्य के स्वभाव को बदला जा सकता हैं या नहीं। कुछ लोगों की राय थी कि मनुष्य का स्वभाव बदला जा सकता हैं लेकिन कुछ लोगों का विचार था कि ऐसा नहीं …

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बुढापे की मृत्यु – ज्ञानवर्धक कहानी

सुलतान आदिलशाह को यह डर हमेशा सताता रहता था कि राजा कृष्णदेव अपने राज्य के प्रदेश रायचूर और मकदल को वापस लेने के लिए उस पर कभी भी चढ़ाई कर सकते हैं। उसने उनकी वीरता के बारे में सुन रखा था। और यह भी कि राजा ने अपनी वीरता से …

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राजा से वफादारी (तेनालीराम की कहानियाँ)

विजयनगर राज्य का अपने निकटस्थ राजा से काफी समय से मनमुटाव चल रहा था। तेनालीराम के विरोधियों को राजा कृष्णदेव राय को उसके खिलाफ भड़काने का यह उचित अवसर जान पड़ा। जब एक दिन राजा कृष्णदेव राय अपने बाग़ में अकेले टहलते हुए पड़ोसी राज्य की समस्या के बारे में …

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क्षमा वीरों का आभूषण होता हैं

क्षमा ह्रदय का अमृत हैं। इस अमृत को शूरवीर ही अपने ह्रदय में धारण कर सकते हैं। कहावत हैं –     क्षमा वीरस्य भूषणम।   क्षमा शूर – वीरों का आभूषण होता हैं।   इस सन्दर्भ में देखिये इंद्रभूति गौतम के जीवन का एक प्रसंग।   इंद्रभूति गौतम भगवान् महावीर …

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सच्चा ज्ञानी

संस्कृत साहित्य का एक अमूल्य श्लोक हैं – जब उत्पन्न होते ही शिशु को पहले अनित्यता अपनी गोद में ले लेती हैं , माता भी धाय की तरह उसके बाद ही अपनी गोद में धारण करती हैं। तब फिर शोक करने की क्या बात हैं ? जीवन अनित्य हैं। पुत्र …

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धर्म हैं परम धन

ब्रह्मवैवर्त्त पुराण में धर्म का स्वरुप अतिसुन्दर शब्दों में प्रगट किया गया हैं – धर्म से श्रेष्ठ अन्य कोई बन्धु नहीं हैं।  धर्म से बढ़कर अन्य कोई धन नहीं है। धर्म से अधिक प्रिय और उत्तम कुछ नहीं हैं , अतः यत्नपूर्वक धर्म की रक्षा करनी चाहिए। धर्म सर्वोपरि हैं। …

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