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ज्ञानवर्धक कहानियाँ

पुरोहितजी की तपस्या ज्ञान्बर्धक कहानी

एक बार राजा कृष्णदेव के राज्य में बड़ी भयंकर ठण्ड पड़ी। राजदरबार भी इस ठण्ड से अछूता नहीं रहा था सर्वत्र ठण्ड की ही चर्चा हो रही थी। तभी एक पुरोहित ने महाराज को अपनी राय दी, महाराज यदि इन दिनों यज्ञ किया जाए तो उसका परिणाम बड़ा ही फलदायी …

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राजा कृष्णदेव का प्यारा तोता

एक दिन किसी व्यक्ति ने राजा कृष्णदेव को एक तोता भेंटस्वरुप दिया यह तोता बड़ी मीठी वाणी बोलता था और लोगों के प्रश्नों के उत्तर भी देता था। राजा को यह तोता बहुत ही पसंद आया। उन्होंने उसके पालन – पोषण और उसकी रक्षा का भार अपने एक विश्वस्त सेवक …

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अपनी सत्यता का प्रमाण – ज्ञानवर्धक हिंदी कहानी

satyata ka parman

दिनों – दिन तेनालीराम की बढ़ती लोकप्रियता से कुछ दरबारी बड़े दुखी थे। महाराज उसकी हर बात को सहर्ष मान लेते थे और उन्हें नीचा देखना पड़ता था। एक दिन तेनालीराम से ईर्ष्या करने वालों ने विचार किया कि तेनालीराम के विरुद्ध राजा कृष्णदेव के कान भरे जाए। उसकी उन्होंने …

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हिसाब चुकता किया – ज्ञानवर्धक हिंदी कहानी

hisab chukta kiya

तेनालीराम के मन में राजगुरू के व्यवहार को लेकर कटुता व्याप्त थी। वह मन ही मन निश्चय कर चुका था कि वह एक दिन राजगुरू से अपना हिसाब जरूर चुकता करेगा। इसलिए वह उचित मौके की ताक में रहने लगा। एक दिन नदी में उसे पता चला कि राजगुरू नित्यप्रति …

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तेनालीराम का अद्भुत डंडा – हिंदी कहानी

tenali ram ka danda

एक गाँव में एक ऐसी औरत रहती थी जो प्रतिदिन शाम को अपने पति को जूतों से पीटा करती थी।  इस औरत की एक बेटी भी थी उसकी उम्र विवाह योग्य हो गयी, तो उसके लिए वर की खोज शुरू हो गयी। लड़की गुणवान एवं रूपवती थी। परन्तु उसकी माँ की बुराई …

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अनोखा पुरस्कार – हिंदी ज्ञान से भरपूर कहानी

anokha puruskar

राजा कृष्णदेव के दरबार में एक दिन पड़ोसी देश के दूत ने प्रवेश किया वह उनके लिए अनेक उपहार भी साथ में लाया था। विजयनगर के राजदरबारियों ने उस दूत की खूब आव – भगत की। कुछ दिन रहकर जब दूत अपने देश वापस जाने लगा तो राजा कृष्णदेव ने …

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मरियल घोड़ा – हिंदी कहानी

mariyal ghoda

राजा कृष्णदेव और चतुर तेनाली अपने अपने घोड़ों पर सवार होकर सैर के लिए निकले। राजा का घोड़ा अरबी नस्ल का बढ़िया घोड़ा था। जिसकी कीमत भी काफी थी। इधर तेनालीराम का घोड़ा एकदम मरियल सी अवस्था का वह बड़ी ढीली ढाली चाल से चल रहा था। तेनालीराम अगर अपने …

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राजदरबार में प्रवेश – हिंदी कहानी

rajdarbar me pravesh

तेनालीराम ने बहुतों के मुख से सुना था कि राजा कृष्णदेव बुद्धिमानों व गुणवानों का बड़ा आदर सम्मान करते हैं। उसने सोचा, क्यों न उनके यहाँ जाकर अपने भाग्य को आजमाया जाए। लेकिन बिना किसी सिफारिश के वह राजा कृष्णदेव के पास भला कैसे पहुँच सकता था। इसलिए वह किसी …

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लाल रंग का मोर, ज्ञान से भरपूर कहानी

राजा कृष्णदेव को अद्भुत व विलक्षण चीजों के संग्रह का बड़ा ही शौक था। प्रत्येक दरबारी उन्हें खुश रखने के लिए ऐसी दुर्लभ वस्तुओं की ताक में रहता था, ताकि वह महाराज को देखकर उनका खासमखास बन जाए उनसे उनकी एवज में मोती रकम भी ऐंठ सके। एक बार एक …

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