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ज्ञानवर्धक कहानियाँ

नहीं रांच्यो रहमान – ज्ञानवर्धक कहानी

आयुर्वेद का एक सूत्र हैं –  तन्मय होकर भोजन करो। इस सूत्र में एक उत्तम दृष्टि प्रगट हुई हैं। भोजन करो तो केवल भोजन ही करो। मनुष्य भोजन करते हुए भी अन्य कुछ करता रहता हैं। उसका शरीर भोजन कर रहा होता है , लेकिन उसका मन कहीं और दौड़ …

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परम उदारताः महाकवि माघ का दान – ज्ञानवर्धक कहानी

एक प्राचीन सूक्त है – थोड़े में से जो भी प्रशस्त भावना – पूर्वक दिया जाता हैं , वह हजारों लाखों के दान की बराबरी करता हैं। दान करुणा का प्रतिफल हैं। करुणा – पूर्ण ह्रदय बाँट देने में ही अपने सुख और सहज सम्पन्नता के दर्शन  करता हैं।   …

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सरल हृदयः परमात्मा का मंदिर – ज्ञानवर्धक कहानी

भगवान् महावीर का एक अमृत वचन हैं – सरल और स्वच्छ ह्रदय में ही धर्म ठहरता हैं। सरल ह्रदय परमात्मा का मंदिर होता हैं। सरलता धर्म का द्वार हैं। मोक्ष का मार्ग हैं। इसी सन्दर्भ में देखिये एक हजारों वर्ष पूर्व का जीवन चित्र। महर्षि हरिद्रमुत गौतम के आश्रम में …

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महामूर्ख कौन – ज्ञानवर्धक कहानी

आत्मा के स्व – पर का यथार्थ चित्रण करते हुए उत्तराध्ययन सूत्र में प्रभु वीर ने फरमाया हैं – द्विपद और चतुष्पद , क्षेत्र और गृह , धन और धान्य इन सब को छोड़कर पराधीन जीव केवल अपने कर्मों को साथ लेकर ही अकेला , अच्छे या बुरे पर – …

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मन की निर्मलता – ज्ञानवर्धक कहानी

केवल शरीर के मैल उतार देने से ही मनुष्य निर्मल नहीं हो जता है। मानसिक मैल का त्याग करने पर ही वह भीतर से निर्मल होता हैं। दैहिक मैल तो साधारण जल से धोया जा सकता हैं। मन का मैल धोने के लिए जप – तप और श्रद्धा की आवश्यकता …

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छल विश्वास का परम शत्रु हैं

माया रुपी कषाय के सम्बन्ध में भगवान् की राय है – माया मित्रों का नाश करने वाली होती हैं। माया का अर्थ हैं – छल। कपट व्यवहार। छल – कपट करने वाले व्यक्ति का कोई अपना नहीं होता हैं। मैत्री का आधार विश्वास होता हैं। छल विश्वास का परम शत्रु …

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सौन्दर्यः असौंदर्य

कुरूपों का रूप हैं विद्या। विद्या अर्थात सद्गुणों से कुरूप मनुष्य भी सुरूप हो जाता है। वस्तुतः दैहिक सौंदर्य वास्तविक सौंदर्य नहीं होता हैं। सद्गुणों से ही मनुष्य का वास्तविक सौंदर्य प्रगट होता है।   यूनान के महान दार्शनिक सुकरात कुरूप थे। वे अपने पास एक दर्पण रखते थे और …

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धैर्य है सिद्धिदाता

जीवन के साथ हानि – लाभ और सुख – दुःख का अनादिकालीन सम्बन्ध है। सुख और दुःख – इन दोनों अवस्थाओं में ही मनुष्य को धैर्य का अवलंबन ग्रहण करना चाहिए। एक प्राचीन सूक्त में कहां गया है –   विपत्ति काल में भी धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए। धैर्य ही …

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सच्चे दिल से धर्म की रक्षा करो वो तुम्हारा रक्षा करेगा

प्राचीन भारतीय शास्त्रों का उद्घोष हैं – जो धर्म का नाश करता हैं वह स्वयं विनाश को प्राप्त हो जाता हैं ; और जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है।   शुद्ध ह्रदय से, तल्लीनता से जो व्यक्ति धर्माचरण करता है, उसके जीवन में अभय के …

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