Home / ज्ञानवर्धक कहानियाँ (page 10)

ज्ञानवर्धक कहानियाँ

मन की निर्मलता – ज्ञानवर्धक कहानी

केवल शरीर के मैल उतार देने से ही मनुष्य निर्मल नहीं हो जता है। मानसिक मैल का त्याग करने पर ही वह भीतर से निर्मल होता हैं। दैहिक मैल तो साधारण जल से धोया जा सकता हैं। मन का मैल धोने के लिए जप – तप और श्रद्धा की आवश्यकता …

Read More »

छल विश्वास का परम शत्रु हैं

माया रुपी कषाय के सम्बन्ध में भगवान् की राय है – माया मित्रों का नाश करने वाली होती हैं। माया का अर्थ हैं – छल। कपट व्यवहार। छल – कपट करने वाले व्यक्ति का कोई अपना नहीं होता हैं। मैत्री का आधार विश्वास होता हैं। छल विश्वास का परम शत्रु …

Read More »

सौन्दर्यः असौंदर्य

कुरूपों का रूप हैं विद्या। विद्या अर्थात सद्गुणों से कुरूप मनुष्य भी सुरूप हो जाता है। वस्तुतः दैहिक सौंदर्य वास्तविक सौंदर्य नहीं होता हैं। सद्गुणों से ही मनुष्य का वास्तविक सौंदर्य प्रगट होता है।   यूनान के महान दार्शनिक सुकरात कुरूप थे। वे अपने पास एक दर्पण रखते थे और …

Read More »

धैर्य है सिद्धिदाता

जीवन के साथ हानि – लाभ और सुख – दुःख का अनादिकालीन सम्बन्ध है। सुख और दुःख – इन दोनों अवस्थाओं में ही मनुष्य को धैर्य का अवलंबन ग्रहण करना चाहिए। एक प्राचीन सूक्त में कहां गया है –   विपत्ति काल में भी धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए। धैर्य ही …

Read More »

सच्चे दिल से धर्म की रक्षा करो वो तुम्हारा रक्षा करेगा

प्राचीन भारतीय शास्त्रों का उद्घोष हैं – जो धर्म का नाश करता हैं वह स्वयं विनाश को प्राप्त हो जाता हैं ; और जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है।   शुद्ध ह्रदय से, तल्लीनता से जो व्यक्ति धर्माचरण करता है, उसके जीवन में अभय के …

Read More »

मनुष्य का पतनः एक चित्र

परोपकार से ही मनुष्य मनुष्य होता है। जो व्यक्ति परोपकार से शून्य हैं, उसका जीवन धिक्कार है। उससे तो पशु ही श्रेष्ठ है जिनकी चमड़ी भी पराये काम आती हैं। स्वयं के लिए कौन नहीं जीता हैं? जो परोपकार के लिए जीता है, वस्तुतः वही जीवित है।   परोपकारी मनुष्य …

Read More »

सज्जनता की पराकाष्ठा

उपकारी पर सज्जनता रखना सज्जन पुरुष की सज्जनता की कसौटी नहीं हैं। अपकारी पर भी सज्जनता रखना , सद् भाव रखना यही श्रेष्ठ पुरुष का लक्षण है।   हित का हित से उत्तर देना बड़ी बात नहीं है। यह तो जीवन का सहज गुण है। जीवन का श्रेष्ठ गुण तो …

Read More »

संसार का स्वरुप

संसार महासागर के समान है। महर्षि जन ही इसको पार लगा सकते है। कायर संसार में ही उलझे रहते है। शूरवीर इन बंधनो को एक झटके में तोड़ देते है। संसार का बीभत्स रूप पुनः पुनः देखकर भी कायर उसी में उलझे रहते है। वीरो के सामने जैसे ही संसार …

Read More »

आधा लोटा पानी – अहंकारी बादशाह

आयु का एक क्षण भी करोड़ों स्वर्ण – मुद्राओं से भी प्राप्त नहीं किया जाए सकता है। उसे यदि निरर्थक बिता दिया गया तो उसे बड़ी हानि होगी।   एक मुसलमान बादशाह को अपनी बादशाहत पर बड़ा घमंड था। वह अपने दौलत के नशे में डूबा हुआ, नीति और अनीति …

Read More »