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ज्ञानवर्धक कहानियाँ

अपनी सत्यता का प्रमाण – ज्ञानवर्धक हिंदी कहानी

satyata ka parman

दिनों – दिन तेनालीराम की बढ़ती लोकप्रियता से कुछ दरबारी बड़े दुखी थे। महाराज उसकी हर बात को सहर्ष मान लेते थे और उन्हें नीचा देखना पड़ता था। एक दिन तेनालीराम से ईर्ष्या करने वालों ने विचार किया कि तेनालीराम के विरुद्ध राजा कृष्णदेव के कान भरे जाए। उसकी उन्होंने …

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हिसाब चुकता किया – ज्ञानवर्धक हिंदी कहानी

hisab chukta kiya

तेनालीराम के मन में राजगुरू के व्यवहार को लेकर कटुता व्याप्त थी। वह मन ही मन निश्चय कर चुका था कि वह एक दिन राजगुरू से अपना हिसाब जरूर चुकता करेगा। इसलिए वह उचित मौके की ताक में रहने लगा। एक दिन नदी में उसे पता चला कि राजगुरू नित्यप्रति …

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तेनालीराम का अद्भुत डंडा – हिंदी कहानी

tenali ram ka danda

एक गाँव में एक ऐसी औरत रहती थी जो प्रतिदिन शाम को अपने पति को जूतों से पीटा करती थी।  इस औरत की एक बेटी भी थी उसकी उम्र विवाह योग्य हो गयी, तो उसके लिए वर की खोज शुरू हो गयी। लड़की गुणवान एवं रूपवती थी। परन्तु उसकी माँ की बुराई …

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अनोखा पुरस्कार – हिंदी ज्ञान से भरपूर कहानी

anokha puruskar

राजा कृष्णदेव के दरबार में एक दिन पड़ोसी देश के दूत ने प्रवेश किया वह उनके लिए अनेक उपहार भी साथ में लाया था। विजयनगर के राजदरबारियों ने उस दूत की खूब आव – भगत की। कुछ दिन रहकर जब दूत अपने देश वापस जाने लगा तो राजा कृष्णदेव ने …

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मरियल घोड़ा – हिंदी कहानी

mariyal ghoda

राजा कृष्णदेव और चतुर तेनाली अपने अपने घोड़ों पर सवार होकर सैर के लिए निकले। राजा का घोड़ा अरबी नस्ल का बढ़िया घोड़ा था। जिसकी कीमत भी काफी थी। इधर तेनालीराम का घोड़ा एकदम मरियल सी अवस्था का वह बड़ी ढीली ढाली चाल से चल रहा था। तेनालीराम अगर अपने …

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राजदरबार में प्रवेश – हिंदी कहानी

rajdarbar me pravesh

तेनालीराम ने बहुतों के मुख से सुना था कि राजा कृष्णदेव बुद्धिमानों व गुणवानों का बड़ा आदर सम्मान करते हैं। उसने सोचा, क्यों न उनके यहाँ जाकर अपने भाग्य को आजमाया जाए। लेकिन बिना किसी सिफारिश के वह राजा कृष्णदेव के पास भला कैसे पहुँच सकता था। इसलिए वह किसी …

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लाल रंग का मोर, ज्ञान से भरपूर कहानी

राजा कृष्णदेव को अद्भुत व विलक्षण चीजों के संग्रह का बड़ा ही शौक था। प्रत्येक दरबारी उन्हें खुश रखने के लिए ऐसी दुर्लभ वस्तुओं की ताक में रहता था, ताकि वह महाराज को देखकर उनका खासमखास बन जाए उनसे उनकी एवज में मोती रकम भी ऐंठ सके। एक बार एक …

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सबसे बड़ा मूर्ख – ज्ञानवर्धक हिंदी कहानी

विजयनगर के राजा कृष्णदेव होली का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया करते थे। उस दिन मनोविनोद के अनेकों कार्यक्रमों का आयोजन उनके नगरों में होता था। प्रत्येक कार्यक्रम के सबसे अच्छे कलाकार को उचित पारितोषिक भी प्रदान किया जाता था। सबसे बड़ा तथा सबसे मूल्यवान पुरस्कार महामूर्ख की उपाधि पाने …

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अंतिम इच्छा हिंदी कहानी

antim eachha

विजयनगर के ब्राह्मण लालची प्रवृत्ति के थे वे सदैव किसी न किसी बहाने से अपने राजा से धन ऐंठते रहते थे। राजा की उदारता का वे अनुचित लाभ उठाते थे। एक दिन दरबार में राजा कृष्णदेव से एक पंडित ने कहा, महाराज मरते समय मेरी माँ ने आम खाने की …

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बाढ़पीड़ितों की सहायता

baadh piriton ki sahayta

एक बरस राजा कृष्णदेव के राज्य में भीषण वर्षा हुई। चारों ओर भीषण तबाही मच गयी। अनेक घर ढह गए। सैंकड़ों पशु भी बाढ़ की चपेट में आ गए। राजा कृष्णदेव को इस घटना की खबर मिली। उन्होंने तत्काल मंत्री को बुलाकर आदेश दिया कि तुरंत बाढ़पीड़ितों की सहायता की …

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राजा रानी में सुलह

king and queen

एक दिन तेनालीराम को गुप्तचर द्वारा सन्देश मिला कि महारानी बड़ी मुसीबत में हैं और उन्होंने आपको तुरंत ही राजमहल में बुलाया हैं। जब तेनालीराम के सम्मुख उपस्थित हुआ तो उसे पता चला कि एक दिन राजा कृष्णदेव रानी को अपने हाथों से लिखा हुआ नाटक सुना रहे थे और …

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गाय और बिल्ली

cow and cat

गाय और बिल्ली जब राजा कृष्णदेव की राजधानी में चूहों का आतंक ज्यादा फ़ैल गया तो उन्होंने उससे निजात पाने के लिए बिल्लियों को पालने का फैसला किया। जैसे – तैसे करके बिल्लियों को मंगाया गया और उन्हें नगर के लोगों को दे दिया गया। जिसे भी बिल्ली दी गयी, …

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राजकीय कुएं की शादी – हिंदी कहानी

राजा कृष्णदेव के किसी बात पर अनबन हो जाने के उपरान्त तेनालीराम नाराज होकर कहीं चला गया। जब कई दिनों तक वापस नहीं लौटा तो राजा कृष्णदेव को चिंता हुई और उन्होंने उसे खोजने के लिए अपने गुप्तचर लगा दिए लेकिन तेनालीराम का कहीं पता नहीं चल सका। मजबूर होकर …

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बिल्ली और चूहे

cat and rat

तेनालीराम के घर में चूहों ने हुड़दंग मचा रखा था। और एक दिन चूहों ने उसकी पत्नी की एक सुन्दर साड़ी को काटकर उसमें एक छेद भी कर दिया। अब तो तेनालीराम और उसकी पत्नी को उन चूहों पर बहुत ही क्रोध आया। उन्होंने सोचा, इन चूहों को पकड़कर ख़त्म …

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लालची मंत्री

lalchi mantri

राजा कृष्णदेव की यह हार्दिक इच्छा थी कि वह अपने जीवनकाल में एक मंदिर का निर्माण कराएं। इसलिए उन्होंने अपने मंत्री को बुलवाया और उसमें उपयुक्त स्थान खोजने के लिए कहा। उस मंत्री ने अपने नगर के समीप ही जंगल में मंदिर निर्माण के लिए एक स्थान खोज लिया और …

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