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ज्ञानवर्धक कहानियाँ

लालची सेठ

विजयनगर गाँव में एक सुन्दरम ना का ब्राह्मण रहता था। उसने कठोर परिश्रम से एक हजार स्वर्ण मुद्राएं इकट्ठा कर ली थी। जब वह बुढापे की और अग्रसर हुआ तो उसके मन में तीर्थयात्रा करने की इच्छा हुई। उसने सोचा कि ये एक हजार स्वर्ण मुद्राएं धरोहर के रूप में …

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दो मित्रों की मित्रता

विजयनगर का राजदरबार लगा हुआ था। तभी अचानक दो व्यक्तियों ने राजदरबार में प्रवेश किया। उन्होंने अपने हाथों में सोने का बहुमूल्य हंस पकड़ा हुआ था।       वे सीधे महाराज के पास पहुंचे और फ़रियाद की, महाराज ! आप ही हमारा न्याय कीजिये।    न्याय …. किस बात का न्याय …

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स्वच्छ वायु

गर्मी की ऋतु थी। राजदरबार में काफी उमस हो रही थी। सारे दरबारी पसीने से लथपथ हो रहे थे। जब गर्मी उनकी सहनशक्ति से बाहर हो गयी तो दरबारियों ने महाराज से कहा, महाराज ! सुबह – सुबह बाहर की हवा कितनी शीतल और सुगन्धित होती हैं, क्या ऐसी स्वच्छ …

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कौन समझदार होता हैं

एक दिन राजा कृष्णदेव ने तेनालीराम से पूछा, तेनालीराम यह बताओ कि किस प्रकार के लोग सबसे अधिक मूर्ख होते हैं और किस प्रकार के लोग अधिक मूर्ख होते हैं और किस प्रकार के सबसे चतुर ?           तेनालीराम ने तपाक से उत्तर दिया, महाराज ! सबसे अधिक मूर्ख ब्राह्मण …

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राज्य के सच्चे हितैषी

एक दिन राजदरबार में इस बात पर बहस हो रही थी कि राज्य की समृद्धि के लिए सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति कौन होता हैं ? एक दरबारी ने कहा, राज्य की समृद्धि वहाँ के राजा पर निर्भर करती हैं, दुष्टों को दंड देकर, प्रजा के अधिकारों की रक्षा कर, अंदरूनी अशान्ति …

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उद्यान में गायें – Hindi Kahani

विजयनगर के राजा कृष्णदेव नित्य सुबह – सवेरे अपने शाही उद्यान में टहलने जाया करते थे। अक्सर तेनालीराम भी उनके साथ टहलने आया करता था। इस बात से वे अन्य दरबारी चिढ़ते थे। वे अक्सर यह सोचते रहते कि किसी तरह तेनालीराम को राजा से दूर किया जाए। जब एक …

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गुलाब के फूल – Hindi Kahani

तेनालीराम की पत्नी को गुलाब के फूल बहुत ही प्रिय थे। इसलिए वह चोरी – छिपे अपने बेटे को शाही बाग़ में से गुलाब के फूल तोड़ने भेज देती। कुछ तो वह भगवान् को चढ़ा देती और एक फूल अपने बालों में लगा लिया करती। राजदरबार में तेनालीराम से द्वेष …

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मखमली जूती – Hindi Kahani

makhmali juta

दरबार में एक दिन राजा कृष्णदेव और तेनालीराम में इस बात को लेकर बहस छिड़ गयी कि लोग किसी भी बात पर जल्दी ही विश्वास कर लेते हैं और आसानी से बुद्धू बन जाते हैं। राजा कृष्णदेव का कहना था कि लोगों को इतनी आसानी से बेवक़ूफ़ नहीं बनाया जा …

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मकान का दान – Hindi Kahani

एक बार राजा कृष्णदेव ने तेनालीराम को सीख देते हुए समझाया कि प्रभु ने जिनको अधिक संपदा प्रदान की हैं, उनको सदैव गरीबों की मदद करनी चाहिए। गरीब ब्राह्मणों को दान देना चाहिए। जो दूसरों के लिए कुछ नहीं करता, वह मनुष्य कहलाने का अधिकारी नहीं हैं ? तुम भी …

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