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धर्म ज्ञान

भगवान महावीर के अनमोल बातें

साधक को सम्बोधित करते हुए भगवान् महावीर ने कहा था – हे आत्मविद साधक। जो बीत गया सो बीत गया। शेष रहे जीवन को ही लक्ष्य में रखते हुए प्राप्त अवसर को परख। समय का मूल्य समझ।   समय का मूल्य जानने वाला साधक ही पण्डित होता हैं। जीवन का …

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क्षणमिह सज्जन – संगतिः

बारह सौ वर्ष पूर्वा आचार्य शंकर ने सत्संगति की महत्ता का उद्घोष करते हुए कहा था – रे मन ! तू सदा तत्त्वों का चिंतन कर। नश्वर धन की चिंता का परित्याग कर। इस असार संसार रूप महासागर से सज्जनों की संगती का एक पल ही पार उतारने वाली नौका …

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गुण – दृष्टि और दोष

गुण और दोष को सम्मुख पाकर गुण पर ही दृष्टि डालना चाहिए , दोषों पर नहीं। गुणों को देखने से शनैः – शनैः मनुष्य में गुण दृष्टि का विकास हो जाता हैं और दोषों को देखने से वह दोष – दृष्टिसंपन्न हो जाता हैं। गुण – दृष्टिसंपन्न के लिए चतुर्दिक …

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यह संसार एक सराय (धर्मशाला) है ज्ञानपूर्ण जानकारी

इस घोर संसार को तैरने की इच्छा रखने वाले मनुष्य को ज्ञान रुपी नौका का सहारा लेना चाहिए। इस नौका से वह सुख -पूर्वक इस संसार – सागर को तैर सकता है। अज्ञान मनुष्य को संसार से बाँध कर रखता है। ज्ञान उसे संसार का स्वरुप दर्शन कराता और वह …

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देवी देवताओं का फूल कनेक्शन – पूजा करते समय किस देवी देवताओं को कौन सा फूल चढ़ाते है

devi devtaon ke favrate phool

Devi devtaon ka phool connection (favorite flowers of the god) bhagwan apne bhakt ko chhappan prakaar ka bhog laga kar pooja karne ke liye nahi kahte hai. ve to keval apke sachche bhakti bhaav se hee prasann ho jate hai. mahabharat me bhi bhagwan shri krishan ko duryodhan ne bhojan …

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