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अमीरों का पहला नियम, हमेशा कुछ नया करने की आदत

नया काम करने की आदत ही इंसान को पशुओं से अलग करती है पशु नया काम नहीं करते हैं उदाहरण के लिए तोता दूसरों की सुनें कुछ बातें ही दोहरा सकता है कुत्ता आजतक पेड़ पर चढ़ना नहीं सीख पाया और गाय बैल पालतू बनने के बाद भी दो पैरों पर चलना नहीं सिख पाए, निष्कर्ष यह है कि पशुओं में कोई नया काम करने या सीखने की इच्छा नहीं होती जब तक कि इंसान उन्हें सीखा न दे,  उनमे में सीखने की क्षमता तो होती है जैसा हम अक्सर सर्कस में देखते हैं जब शेर आग के गोले में से छलांग लगाते हैं या भालू दो पैरों पर खड़े होकर नाचते हैं बहरहाल यह काम पशु तभी कर पाते जब इंसान उन्हें सिखाता और प्रशिक्षित करता है उनके मन में स्वयं कोई नया काम या प्रगति करने का विचार नहीं जागता है ऐसा इसलिए है क्योंकि पशुओं को ईश्वर ने बुद्धि का वरदान नहीं दिया है बुद्धि मनुष्य को मिला हुआ इश्वरीय वरदान है जिसकी वजह से वह नया काम कर सकता है और स्वयं को प्रगति के पथ पर ले जा सकता है.

 

मनुष्य ने आज तक जितनी भी प्रगति की है वह सब नया काम करने की आदत का ही परिणाम है उसने आहार के लिए प्रकृति पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं फसल उगाना सीखा उसने अपने काम के बोझ को हल्का करने के लिए पशुओं को पालतू बनाया उसने मौसम के आघातों से बचने के लिए कपड़े बनाना और पहनना सीखा उसने गुफा के बजाय घर बनाना सीखा उसने विचारों के संप्रेषण के लिए भाषा का आविष्कार किया और भाषा के स्थाई संप्रेषण के लिए पुस्तकों का, उसने प्रकृति के रहस्यों को समझते हुए वैज्ञानिक आविष्कार किए उसने आग जलाना सीखा हथियार बनाना सीखा और पहिए का आविष्कार किया।

 

नया काम करने की आदत के बदौलत ही औद्योगिक क्रांति और संचार क्रांति करके मानव जाति को सुख समृद्धि के अभूतपूर्व सोपान पर लाकर खड़ा कर दिया है। नया काम करने की आदत ही इंसान की समूची पर गति की नीव है। यदि मनुष्य में यह आदत नहीं होती तो हम अब भी गुफाओं में रह रहे होते और पुरुष शिकार पर जाते तथा महिलाएं गुफा में बैठकर आग की रखवाली कर रही होती। हमारे आसपास की हर वस्तु चाहे वह सेफ्टी पिन हो या टेलीफोन इस दुनिया मैं सिर्फ इसलिए आयी, क्योंकि किसी व्यक्ति ने उसके निर्माण के बारे में सोचा और अपने विचार को साकार करने के लिए मेहनत की नया काम करने की आदत होगा मूलभूत आदत है।

 

जो प्रगतिशील समाज के केंद्र में होती है यही वह आदत है जिसकी वजह से इंसान घिसे-पिटे पारंपरिक रास्ते पर चलने के बजाय अपना अलग रास्ता बनाता है यही वह आदत है जिसकी वजह से इंसान अपना वजूद खोजता है, और लोकप्रियता पाता है यही वह आदत है जिसकी वजह से इनसान समाज को सुखी और खुद को अमीर बनाता है जॉर्ज वाशिंगटन कार्वर ने कहा है सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता लेकिन अमीरी अगर कोई शॉर्टकट है तो वह है नया काम करना, नई चीजों का अविष्कार करना काम करने के नए तरीके खोजना जब कोई व्यक्ति समाज की किसी आवश्यकता को पूरा कर देता है, तो समाज खुश होकर उसे पुरस्कार देता है और नया काम करने वाला अमीर बन जाता है।

 

गौर करने वाली बात यह है कि अमीरों का मानदंड हमेशा बदलता रहता है पहले पशुधन को अमीरी का पैमाना माना जाता था फिर भूमि को फिर स्वर्ण या हिरा को, औद्योगिक क्रांति के बाद यह पारंपरिक मानदंड बदल चुके संचार क्रांति होने के बाद अमीरी सिर्फ एक नए विचार तक सिमट कर रह गई है, आज सिर्फ एक क्रांतिकारी नए विचार से ही आप अमीर बन सकते हैं व्यवसाय की दुनिया अवश्य असेम्बली लाइन के युग से बाहर आ चुकी है और विचारों के युग में कदम रख चुकी है इसलिए विचार पहले से कहीं अधिक मूल्यवान हो गए। जैसा नेपोलियन हिल ने कहा है – विचार ही समस्त दौलत की शुरुआत हुई बिंदु है।

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