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एपीजे अब्दुल कलाम का इतिहास व जीवन परिचय | APJ Abdul Kalam Hindi Biography


एपीजे अब्दुल कलाम का पूरा नाम अवुल पकिर जैनुल्लाब्दीन अब्दुल कलाम था एक मछुआरे का बेटा अखबार बेचा करता था और यह कलाम के जीवन का शुरुआती सफर था वे देश के चोटी के वैज्ञानिक बने और फिर भारत के सबसे बड़े राष्ट्रपति पद को भी शोभायमान किया 


एपीजे अब्दुल कलाम करोड़ों युवाओं के प्रेरणास्रोत बने रहे तथा अपनी वाक कला से हजारों की भीड़ को मंत्र-मुग्ध करते रहे युवाओं में नया जोश, उमंग और हौसला अंत समय तक भरते रहे। अपने किताबों के द्वारा अपने अनुभव का निचोड़ पेश किया और अंत तक ट्विटर प्रोफाइल पर खुद को एक 'लर्नर' के रूप में खुद को बताते रहे


ट्विटर अकाउंट पर उनका परिचय इस तरह देखने को मिला, 'साइंटिस्ट, टीचर, लर्नर, राइटरभारत के 11वें राष्ट्रपति के रूप में अपनी सेवाएं दीं साथ ही विज्ञानं के दुनिया में अभूत्पूर्व कार्य किये


एपीजे अब्दुल कलाम

वास्तविक नाम - अबुल पकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम

पदनाम - मिसाइल मैन, जनता के राष्ट्रपति

पेशा - प्रोफेसर, लेखक, एयरोस्पेस वैज्ञानिक

लम्बाई - 5’ 4”

वजन - 60 कि० ग्रा०

आँखों का रंग - काला

बालों का रंग - श्याम-श्वेत

जन्मदिवस - 15 अक्टूबर 1931

जन्मस्थान - रामेश्वरम, रामानंद जिला, मद्रास प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत
(अभी रामनाथपुरम जिला, तमिलनाडु, भारत)

मृत्यु - 27 जुलाई 2015

मृत्यु का स्थान- शिलांग, मेघालय, भारत

मृत्यु का कारण - दिल का दौरा पड़ने से

समाधि - पेई करुंबू, रामेश्वरम, तमिलनाडु, भारत

राष्ट्रीयता - भारतीय नागरिक 

गृहनगर - रामेश्वरम, तमिलनाडु, भारतदेश  

स्कूल - Schwartz Higher Secondary स्कूल, रामनाथपुरम, तमिलनाडु, भारत

कॉलेज   - सेंट जोसेफ कॉलेज, तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु, भारत
मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, क्रोमपेट, चेन्नई, तमिलनाडु, भारत।

शैक्षिक योग्यता- 1954 में, मद्रास विश्वविद्यालय से अधिकृत सेंट जोसेफ कॉलेज से भौतिकी में स्नातक
(1960), मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की डिग्री।

 परिसंपत्ति - 2,500 पुस्तकें, एक वीणा, एक कलाई घड़ी, सीडी प्लेयर, एक लैपटॉप, 6 शर्ट, 4 पतलून, 3 सूट और एक जूते की जोड़ी, और रामेश्वरम में उनका पैतृक घर यही उनकी कुल संपत्ति थी।



एपीजे अब्दुल कलाम की पारिवारिक पृष्ठ्भूमि 


पिता - जैनुलाब्दीन मारकयार (एक नाव के मालिक और स्थानीय मस्जिद के इमाम)

माता- आशिमा जैनुलाब्दीन (एक गृहणी)

भाई- कासीम मोहम्मद, मुस्तफा कमल, मोहम्मद मुथु मीरा लेबाई मारिकायर

बहन- असिम जोहरा 

धर्म- मुस्लिम

जाति- तमिल मुस्लिम

प्रमुख शौक- वीणा बजाना, प्रेरक व्याख्यान देना, सैर करना, भारतीय शास्त्रीय संगीत सुनना इत्यादि।

अत्यंत पसंदीदा विषय- गणित और भौतिकी

वैवाहिक जीवन - अविवाहित (ताउम्र )



एपीजे अब्दुल कलाम के पुरस्कार तथा सम्मान 



1981: भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

1990: भारत सरकार द्वारा पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

1997: भारत सरकार द्वारा भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

1998: भारत सरकार द्वारा वीर सावरकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

2007: ब्रिटेन रॉयल सोसाइटी द्वारा किंग चार्ल्स द्वितीय मेडल से सम्मानित किया गया।

2009: अमेरिका एएसएमई फाउंडेशन (ASME Foundation) द्वारा हूवर मेडल से सम्मानित किया गया।
2013: राष्ट्रीय अंतरिक्ष सोसाइटी द्वारा वॉन ब्रौन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

2014: एडिनबर्ग विश्वविद्यालय, ब्रिटेन द्वारा डॉक्टर ऑफ साइंस उपाधि से नवाजा गया।



एपीजे अब्दुल कलाम की प्रसिद्ध किताबें



1998 : India 2020


1999 : Wings Of Fire

2002 : Ignited Minds

2006 : Indomitable Spirit

2012 : Turning Points



एपीजे अब्दुल कलाम के मुख्य कथन



• मनुष्य को कठिनाईयों की आवश्यकता होती है, क्योंकि सफलता का आनंद उठाने के लिए ये जरुरी हैं।

• अगर आप सूर्य की तरह चमकना चाहते हैं, तो पहले सूर्य की तरह जलना सीखें।

• गरीबी ने मुझे एक शाकाहारी बनने के लिए मजबूर किया, लेकिन अंततः मैंने इसे पसंद करना शुरू कर दिया।

• अपने कर्म को सलाम करना सीखें, दुनियाँ आपको सलाम करेगी, यदि कर्म को दूषित रखोगे तो हर किसी को सलाम करना पड़ेगा।

• एक अच्छी पुस्तक हजार दोस्तों के समान होती है, जबकि एक अच्छा दोस्त एक पुस्तकालय के बराबर होता है।

• जिस दिन आपके सिग्नेचर ऑटोग्राफ में बदल जाएं, मान लीजिए आप कामयाब हो गए।

• सर्वोत्तम व्यक्ति वह नहीं हैं जिन्होंने अवसरों का इंतजार किया बल्कि वो हैं जिन्होंने अवसरों को अपनाया, जीता और सफल बनाया।

• आप अपना भविष्य तो नहीं बदल सकते पर आप अपनी आदतें जरूर बदल सकते हैं और निश्चित रूप से आपकी आदतें आपका भविष्य बदल देगी।

• कृत्रिम सुख की बजाए ठोस उपलब्धियों के पीछे समर्पित रहना सीखिए।



एपीजे अब्दुल कलाम के नाम स्थान और संस्थान 



जुलाई 2015: उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) का नाम बदलकर "एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय" रख दिया।

31 जुलाई 2015: एपीजे अब्दुल कलाम मेमोरियल त्रावणकोर इंस्टीट्यूट ऑफ पाचन डिसीज (Digestive Diseases), केरल कलाम के नाम पर रखा गया।

4 अगस्त 2015: केरल स्थित महात्मा गांधी विश्वविद्यालय में एक नया अकादमिक परिसर एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर बनाया गया है।

16 अगस्त 2015: पुडुचेरी सरकार के द्वारा उद्घोषित किया गया कि नए उद्घाटनित विज्ञान केंद्र-सह-तारामंडल का नाम पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर रखा जाएगा।

अगस्त 2015: केरल टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी का नाम बदल दिया गया और एपीजे अब्दुल कलाम टेक्नोलॉजीकल यूनिवर्सिटी रखा गया।

सितंबर 2015: ओडिशा स्थित राष्ट्रीय मिसाइल परीक्षण स्थल "व्हीलर द्वीप" का नाम पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर "अब्दुल कलाम आइलैंड" रखा गया।

मई 2017: नासा में अब्दुल कलाम के द्वारा खोजे गए नए जीव का नाम पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के नाम पर "एपीजे अब्दुल कलाम" रखा गया  यह बैक्टीरिया केवल अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर ही पाया जाता है। यह बैक्टीरिया पृथ्वी पर नहीं मिलता और इसी प्रकार नासा की सबसे महत्वपूर्ण प्रयोगशाला जेट प्रणोदन प्रयोगशाला (जेपीएल) के शोधकर्ताओं ने एक इंटरएप्लेनेटरी यात्रा पर काम करते हुए एक नए बैक्टीरिया की खोज की और उसका नाम "Solibacillus kalamii" रखा जो राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के नाम से प्रेरित है


एपीजे अब्दुल कलाम से जुड़े विवाद



भारत के राष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, ए पी जे कलाम द्वारा 21 दया याचिकाओं में से 20 के भाग्य का निर्णय लेने में उनकी निष्क्रियता के लिए काफी आलोचना हुई।  उन्होंने अपने 5 साल के कार्यकाल में सिर्फ एक ही दया याचिका पर कार्यवाही की, जिसमें बलात्कारी धनंजय चटर्जी की याचिका को खारिज कर दिया गया था, जिसे बाद में फांसी पर लटका दिया गया। 


सबसे उल्लेखनीय दया याचिका अफजल गुरु की थी, जिसे 2004 में भारत की सर्वोच्च न्यायालय ने मौत की सजा सुनाई थी। उसकी इस याचिका पर लंबित कार्रवाई होने के कारण उसकी मौत की सजा भी अधर में लटकी रही।



साल 2005 में, कलाम ने बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू करने का विवादास्पद निर्णय ले लिया था, जिसके कारण उन्हें कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।


साल 2011 में, एपीजे अब्दुल कलाम के द्वारा कुडनकुलम में परमाणु ऊर्जा सयंत्र की स्थापना का समर्थन किया गया, जिसके कारण स्थानीय लोग परमाणु ऊर्जा सयंत्र की स्थापना से नाराज थे। स्थानीय लोगों ने एपीजे अब्दुल कलाम के प्रति नाराजगी प्रकट करते हुए, उनके द्वारा लिए इस निर्णय की आलोचना भी की।


APJ Abdul Kalam: Interesting Facts


भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु के रामेश्वरम में हुआ

पेशे से नाविक कलाम के पिता ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे और मछुआरों को नाव किराये पर दिया करते थे जिससे उनकी जीविका चलती थी पांच भाई और पांच बहनों वाले परिवार को चलाने के लिए पिता के पैसे कम पड़ जाते थे इसलिए अपनी प्रारंभिक शिक्षा जारी रखने के लिए कलाम को अखबार बेचने जैसा काम भी करना पड़ा था


आठ साल की उम्र से ही कलाम प्रातः 4 बजे उठते थे और गणित की कक्षा करने चले जाते थे सुबह ट्यूशन से आने के बाद वो नमाज पढ़ते और फिर सुबह आठ बजे तक रामेश्वरम रेलवे स्टेशन और बस अड्डे पर न्यूज पेपर बांटने चले जाते थे

कलाम ‘एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी’ में आने के पीछे अपनी पांचवी क्लास के टीचर सुब्रह्मण्यम अय्यर को श्रेय देते है क्योंकि वो शिक्षक ने ही चिड़िया के उड़ने के माध्यम से एयरोस्पेस के लिए उनके सपनो को प्रेरित किया था। 

1962 में एपीजे अब्दुल कलाम इसरो में पहुंचे इन्हीं के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहते भारत ने अपना पहला स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 बनाया तथा 1980 में रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के समीप स्थापित किया गया और इस तरह भारत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया कलाम ने इसके बाद स्वदेशी गाइडेड मिसाइल को भी डिजाइन किया उन्होंने अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलें भारतीय तकनीक से बनाईं जो एक बड़ी उपलब्धि थी

1992 से 1999 तक अब्दुल कलाम रक्षा मंत्री के रक्षा सलाहकार भी बने रहे इस दौरान अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने पोखरण में दूसरी बार न्यूक्लियर टेस्ट भी किए और भारत परमाणु हथियार बनाने वाले देशों में शुमार हो गया कलाम ने विजन 2020 दिया और इसके अंतर्गत कलाम के द्वारा भारत को विज्ञान के क्षेत्र में तरक्की के जरिए 2020 तक अत्याधुनिक करने की खास सोच दी गईकलाम भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार भी रहे और इन दौरान काफी महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई

1982 में एपीजे अब्दुल कलाम  को डीआरडीएल (डिफेंस रिसर्च डेवलपमेंट लेबोरेट्री) का डायरेक्टर बनाया गया और इसी दौरान अन्ना यूनिवर्सिटी ने उन्हें डॉक्टर की उपाधि से भी सम्मानित किया कलाम ने तत्कालीन रक्षामंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. वीएस अरुणाचलम के साथ इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईजीएमडीपी) का प्रस्ताव तैयार किया जिसके बाद स्वदेशी मिसाइलों के विकास के लिए कलाम की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई

 इसके पहले चरण में जमीन से जमीन पर मध्यम दूरी तक मार करने वाली मिसाइल बनाने पर जोर दिया गया था परियोजना के दूसरे चरण में जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल, टैंकभेदी मिसाइल और रिएंट्री एक्सपेरिमेंट लॉन्च वेहिकल (रेक्स) बनाने का प्रस्ताव था पृथ्वी, त्रिशूल, आकाश, नाग नाम के मिसाइल तैयार किये गए

कलाम ने अपने सपने रेक्स को अग्नि का नाम दिया सबसे पहले सितंबर 1985 में त्रिशूल फिर फरवरी 1988 में पृथ्वी और मई 1989 में अग्नि का सफल परीक्षण किया गया इसके बाद साल 1998 में रूस के साथ मिलकर भारत ने सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने का काम शुरू किया और ब्रह्मोस प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की गई ब्रह्मोस को धरती, आसमान और समुद्र कहीं भी दागा जा सकता है 

इस सफलता के साथ ही एपीजे अब्दुल कलाम को 'मिसाइल मैन' के रूप तमगा मिला और भारत सरकार के द्वारा पद्म-विभूषण के सम्मान से नवाजा गया

भारत की 'अग्नि' मिसाइल को उड़ान देने वाले मशहूर वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को शिलॉन्ग आईआईएम में लेक्चर देते हुए उन्हें दिल का दौरा पड़ा और आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर कुछ नहीं कर सके सबके प्यारे एपीजे अब्दुल कलाम इस दुनिया से विदा ले चुके थे


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