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राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी का जीवन परिचय - Biography of Mahatma Gandhi in Hindi


राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी यानी मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को गुजरात राज्य के पोरबंदर, भारत में हुआ था। वह अपने कर्मों एवं प्रयासों के बल पर 1900 के सबसे सम्मानित आध्यात्मिक और राजनीतिक नेताओं में से एक बन गए। 


गांधी ने भारतीय लोगों को अहिंसक प्रतिरोध एवं विभिन्न आंदोलनों के माध्यम से भारतीय लोगों को मुक्त करने में मदद की, और भारतीय राष्ट्रपिता के रूप में भारतीयों द्वारा सम्मानित किया गया । Mahatma Gandhi शुरू से ही थोरौ, टॉल्स्टॉय, रस्किन, और यीशु मसीह के  जिंदगी से  प्रभावित थे। बाइबिल, सटीक रूप से माउंट के उपदेश और भागवत गीता का उनके ऊपर एक बड़ा प्रभाव पड़ा। 


रविंद्र नाथ टैगोर ने  उन्हें Mahatma की उपाधि दी । 'महात्मा' का अर्थ है महान आत्मा।  जब गांधी 13 साल के थे उन्होंने  लगभग अपनी ही उम्र की 14 साल की  कस्तूरबा गांधी से  शादी की । जिसमें उनके माता-पिता की शादी कराने में सफल  भागीदारी थी। आगे चलकर Mahatma Gandhi के चार बच्चे हुए।

Education of Mahatma Gandhi

Mahatma Gandhi ने लंदन में कानून का अध्ययन किया और अभ्यास के लिए 1891 में भारत लौट गए। 1893 में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में कानूनी काम करने के लिए एक साल का अनुबंध कराया। उस समय ब्रिटिश ने दक्षिण अफ्रीका को नियंत्रित किया (हालांकि दक्षिण अफ्रीका उस समय मौजूद नहीं था, और अंग्रेजों ने किसी भी माध्यम से इसे सभी को नियंत्रित नहीं किया)। फिर भी वहां रंगभेद नीति हावी था और उन्हें भी इसका प्रकोप झेलना पड़ा।  


जब उन्होंने क़ानूनी  विषयकार  के रूप में अपने अधिकारों का दावा करने का प्रयास किया तो उन्होंने  देखा कि सभी भारतीयों को इसी तरह के अवहेलना का सामना करना पड़ रहा था । Gandhi दक्षिण अफ्रीका में लगभग 21 साल तक भारतीय लोगों के लिए अधिकार सुरक्षित करने के लिए काम करते हुए अपनी भागीदारी सुनिश्चित कराई। 


उन्होंने सत्याग्रह, अहिंसा और सत्य के सिद्धांतों के आधार पर कार्रवाई की एक विधि विकसित की। उनका मानना था कि जिस तरह से लोग व्यवहार करते हैं वह जो हासिल करता है उससे अधिक महत्वपूर्ण है। सत्याग्रह ने राजनीतिक और सामाजिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सबसे उपयुक्त तरीकों के रूप में अहिंसा और अवज्ञा को बढ़ावा देने के लिए लक्ष्य स्थापित किए और ऐसे सिद्धांतों के ऊपर आधारित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जिसका व्यापक असर शासन व्यवस्था पर देखा गया।


Mahatma Gandhi in India

1915 में Gandhi भारत लौट आए। 15 वर्षों के भीतर वह भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन के प्रमुख  केंद्र बिंदु वाले नेता बन गए। सत्याग्रह के सिद्धांतों का उपयोग करते हुए उन्होंने ब्रिटेन से भारतीय आजादी के लिए अभियान का नेतृत्व किया जो अविस्मरणीय है। Gandhi ने  भारत को  ब्रिटिश हुकूमत  के  शोषण से मुक्त कराने के लिए  विभिन्न  प्रकार के  नियोजित  एवं चरणबद्ध  आंदोलन  किए। 


इतिहास में ऐसे आंदोलनों को प्रमुख दर्जा दिया गया है और उनके इन सिद्धांतों ने उनको विश्व पटल पर एक प्रमुख  नेता के रूप में  केंद्रित कर दिया । जनमानस पर भी उनके इन सिद्धांतों पर आधारित विभिन्न सत्याग्रह एवं अवज्ञाओं का व्यापक प्रभाव देखा गया । 


दक्षिण अफ्रीका और भारत में अपनी गतिविधियों के लिए अंग्रेजों द्वारा Gandhi को कई बार गिरफ्तार किया गया था फिर भी यह उनका अदम्य साहस ही था की ब्रिटिश हुकूमत को उनके इस तेवर को देखते हुए उन्हें पीछे हटना पड़ गया। 


Mahatma Gandhi का मानना था कि यह आंदोलन का तरीका उनके जेल जाने के लिए सम्मानजनक था। Gandhi ने दूसरों को प्रभावित करने के लिए उपवास का इस्तेमाल किया जो अहिंसक होने की धारणा को काफी बल देता है। गांधी जी के लगातार ऐसे अहिंसक आंदोलनों और अवज्ञा के विभिन्न तरीकों एवं अन्य परिस्थितियों के बीच अंततः ब्रिटिश हुकूमत द्वारा 1947 में भारत को आजादी दी गई, और भारत और पाकिस्तान में विभाजित किया गया। 

हिंदुओं और मुसलमानों के बीच दंगों के स्थिति के बावजूद Gandhi एक संयुक्त भारत के लिए वकालत करते दिख रहे थे जहां हिंदू और मुस्लिम शांति में एक साथ रहते थे।

Death of Mahatma Gandhi

13 जनवरी, 1948 को, 78 साल की उम्र में, उन्होंने रक्तपात को रोकने के उद्देश्य से तेजी से समुचित प्रयास में लगे और इसके लिए वे उपवास पर चले गए। 5 दिनों के बाद विरोधी नेताओं ने इस हलचल को रोकने के लिए वचन दिया और Gandhi ने अपना उपवास तोड़ दिया। 

इस घटना के बारह दिन बाद एक हिंदू कट्टरपंथी, नाथूराम गोडसे जिन्होंने सभी पंथों और धर्म के लिए सहिष्णुता के अपने कार्यक्रम का विरोध किया और 30 जनवरी 1948 को गोडसे द्वारा Mahatma Gandhi की हत्या कर दी गई। 

महात्‍मा गांधी अपने मुख से निकले आखिरी शब्द हे राम कहते हुए इस दुनिया से विदा ले लिए। महात्‍मा गांधी भले ही इस दुनिया को छोड़ कर चले गए परंतु उनके द्वारा किए गए कार्य सदैव मानव जाति के लिए एक मिसाल के तौर पर जाना जाएगा। 

राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी ने दुनिया के लिए कुछ महत्वपूर्ण योगदान दिए हैं जोकि इतिहास के स्वर्ण पन्नों में संग्रह संग्रहित हो चुका है और सदियों तक अमित छाप के रूप में बरकरार रहने वाला है।


Ideal Mahatma Gandhi

महात्‍मा गांधी के आदर्श को हमें जीवन में अपनाने की आवश्यकता है। आज हम समाज में देख सकते हैं कि जो कार्य हम लड़कर झगड़ कर नहीं कर सकते हैं, हमें गांधीगिरी से ही प्रेरित होना पड़ता है। 

गांधीगिरी की छाप समाज के हर वर्ग में है चाहे वह पुलिसिया वर्ग हो या समाज के उच्च वर्ग, चाहे जनता हो या और भी कोई क्यों ना हो गांधीगिरी की छाप हर जगह दिखलाई पड़ती है। 

गांधी जी के प्रिय वस्त्र खादी प्रेम समाज के हर वर्गों में दिखलाई पड़ती हैं। नेता वर्ग से लेकर अभिनेता की भी पहली पसंद खादी ही होती है। समाज के अभिजात वर्गों से लेकर गरीब तबकों में भी खादी की लोकप्रियता कभी कम नहीं होती है अगर जहां सख्ती से कानून का पालन नहीं होता तो वहां भी गांधीगिरी ही काम आती है। 

आज महात्मा गांधी हमारे बीच नहीं है फिर भी उनके आदर्श एवं मूल्यों का प्रभाव समाज के सभी वर्गों पर देखा जाता है।

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