सुभाष चंद्रा के सफलता की कहानी

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सुभाष चंद्रा भारत के उन गिने – चुने लोगों में से हैं, जिन्होंने बहुत से नए काम किये हैं : जी टीवी, एसेल पैकेजिंग, सुपर लोटो, एसेल वर्ल्ड, डेली न्यूज़ एंड एनालिसिस ( डी एन ए ) और भी न जाने क्या क्या ? उन्होंने बहुत से ऐसे बिजनेस शुरू किये, जो भारत में पहली बार हुए। सुभाष चंद्रा कहते हैं, रास्ते चलने से बनते हैं और घिसे पिटे रास्ते घिसे – पिटे लोगों के लिए होते हैं।

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इसी विश्वास पर चलते हुए उन्होंने बिजनेस की दुनिया के कई अनछुए क्षेत्रों में कदम रखा और उन्होंने सफलता हासिल की। उनकी सफलता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता हैं कि आज उनका नाम विश्व के अरबपतियों की सूची में 719 वें स्थान पर हैं और उनके पास 1.8 डॉलर की संपत्ति हैं।

 

सुभाष चंद्रा का जन्म 30 नवम्बर 1950 को हिसार, हरियाणा के आदमपुर  मंदी गाँव में हुआ था। वे इंजिनियर बनना चाहते थे लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, इसलिए उन्हें मजबूरी में इंटर के बाद पढ़ाई छोडनी पड़ी।

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उनकी व्यावसायिक निगाह इतनी पैनी हैं कि सिर्फ देखकर ही उनके मन में बिजनेस के नायाब विचार आ जाते हैं। 1981 में वे एक पैकेजिंग प्रदर्शनी में गए, तो उनके मन में पैकिंग कंपनी शुरू करने का विचार आया। 1982 में उन्होंने एसेल पैकेजिंग लिमिटेड की स्थापना की। उस वक़्त भारत में अल्लुमिनियम ट्यूब का चलन था।

 

बहरहाल, सुभाष चंद्रा ने अपनी दूरदर्शिता से यह यह भांप लिया कि भविष्य एल्युमिनियम का नहीं, बल्कि लैमिनेटेड प्लास्टिक ट्यूब का हैं। फिर क्या था, वे लैमिनेटेड ट्यूब बनाने लगे, जो टूथपेस्ट, दवाओं, सौन्दर्य प्रसाधनों, भोज्य पदार्थों और एफ. एम. सी. जी. उद्योगों की पैकिंग के काम आएं। आज एसेल प्रोपैक लिमिटेड विश्व की सबसे बड़ी लैमिनेटेड ट्यूब निर्माता कंपनी बन चुकी हैं।

 

विदेशी एम्यूजमेंट पार्क्स में घुमते समय सुभाष चंद्रा के मन में विचार आया कि वे भारत में एशिया का सबसे बड़ा मनोरंजन उद्यान बनाएं। उन्होंने मुंबई के उत्तर – पश्चिमी इलाके में 64 एकड़ भूमि पर एसेल वर्ल्ड की स्थापना की, जिसमें 1998 में वाटर किंगडम भी जुड़ गया। जब सुभाष चंद्रा एक बार मुंबई दूरदर्शन केंद्र में अपने मित्र से मिलने गए, तो उनके मन मेंन यह विचार आया कि क्यों न देश का पहला निजी टीवी चैनल शुरू किया जाय।

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सुभाष चंद्रा जानते थे कि भारत का एकमात्र राष्ट्रीय व शासकीय चैनल दूरदर्शन बड़े ही साधारण और नीरस कार्यक्रम प्रसारित कर रहे थे, लेकिन कोई दूसरा विकल्प न होने के कारण जनता दूरदर्शन देखने के लिए विवश थी।

 

उस समय तक भारत के मनोरंजन उद्योग से जुड़े दिग्गज यह कल्पना नहीं कर पा रहे थे कि भारत में 24 घंटे का निजी हिन्दी चैनल सफल हो सकता हैं। जब सुभाष चंद्रा ने मार्केटिंग जगत की नामी – गिरामी हस्तियों से इस बारे में सलाह ली, तो सभी ने उन्हें डराते हुए कहा कि इसमें बहुत जोखिम हैं और इस काम में सफलता नहीं मिल सकती।

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लेकिन सुभाष चंद्रा को ना सुनने की आदत नहीं थी और वे जोखिम से ज़रा भी नहीं घबराते थे। हालांकि उन्हें टीवी प्रसारण का कोई तकनीकी ज्ञान या अनुभव नहीं था, लेकिन इसके बावजूद भी चंद्रा ने भारत में 2 अक्टूबर 1992 को पहला निजी टीवी चैनल ज़ी.टी.वी. शुरू किया।

 

जी टीवी की सफलता के बाद चंद्रा ने जी न्यूज़ चैनल शुरू किया, जिस पर सिर्फ समाचार ही प्रसारित होते थे। उन्होंने भारत का पहला मूवी पे चैनल जी सिनेमा भी शुरू किया।

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फिर संगीत आधारित चैनल म्यूजिक एशिया शुरू किया, जिसे आज सभी जी म्यूजिक के नाम से जानते हैं। जी टीवी को 120 देशों में 50 करोड़ लोगों द्वारा देखा जाता हैं और 8 भाषाओं में इसके 32 से अधिक टीवी चैनल हैं। इसके अलावा सिटी केबल के माध्यम से उन्होंने केबल नेटवर्क को भी लाखों घरों में पहुंचाया।

 

2003 में सुभाष चंद्रा ने डिश टीवी के माध्यम से भारत में पहली डायरेक्ट तो होम टीवी सेवाएं प्रदान की। सुभाष चंद्रा ने अपनी कंपनी प्लेविन इंफ्रावेस्ट प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से सुपर लोटो ऑनलाइन लाटरी की अवधारणा को भी लोकप्रिय बनाया।

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भारत के मीडिया जगत में सुभाष चंद्रा का नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा, क्योंकि वे पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने सॅटॅलाइट टेलीविज़न चैनल में छिपी विराट व्यावसायिक संभावना का दोहन करने का जोखिम उठाया और सफलता पायी।

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