heart disease

हृदय रोग के लक्षण, कारण एवं घरेलू उपचार

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हृदय रोग के कारण

कारण

विश्व में इस समय होने वाली कुल मौतों में से लगभग 30 प्रतिशत मौतें ह्रदय रोगों के कारण हो रही हैं। साधारणतः ह्रदय एक मिनट में लगभग 72 से 75 बार धड़कता हैं। इस प्रकार 24 घंटे में ह्रदय के स्पंदनों की संख्या 1 लाख से अधिक हो जाती हैं। ह्रदय 4 कपाटों में बंटा हुआ हैं। ह्रदय के कपाटों के संकोच से लगभग 2 – 3 ओंस या 70 मि.ली. रक्क्त हर बार शरीर के विभिन्न अंगों में परिसंचरण हेतु निकल जाता हैं। ह्रदय अपना कार्य सुचारू रूप से करता रहे , इसके लिए आवश्यक हैं कि ह्रदय की धमनी के द्वारा मांसपेशी को पर्याप्त रक्त मिलता रहे। संकोच के बाद पहले ह्रदय के दोनों ऊपरी कपाट और फिर दोनों निचले कपाट विश्राम करते हैं।

 

इसके अतिरिक्त यदि ह्रदय की मांसपेशियों तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में कोई रूकावट आ जाए , तो भी ह्रदय की मांसपेशी को रक्त कम मिल पाता हैं। उपरोक्त में से किसी भी कारण से जब ह्रदय की मांसपेशी को रक्त कम मिलता हैं , तो ह्रदय की कार्य करने की क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ता हैं। ह्रदय की धमनियों में रूकावट आ जाने से ह्रदय की मांसपेशी कमजोर व अल्पक्रियाशील हो जाती हैं। आधुनिक विज्ञान ने इस रोग को मायोकार्डियल इन्फार्कशन कहा जाता हैं।

 

अधिक मात्रा में तथा गरिष्ठ भोजन करने पर पेट को अधिक मेहनत करने से मांसपेशियों को तथा चिंता , क्रोध , तनाव आदि मानसिक आवेशों के समय मस्तिष्क को अधिक रक्त की आवश्यकता होती हैं। इन अंगों में अतिरिक्त रक्त की आपूर्ति करने में ह्रदय को अपनी क्षमता से 3 – 5 गुना तक अधिक कार्य करना पड़ता हैं। ये कारण यदि लम्बे समय तक विद्यमान रहे , तो ह्रदय की मांसपेशी की अतिरिक्त कार्य करने की शक्ति कम होने लगती हैं । इस रोग को वाम ह्रदय दौबर्ल्य (लेफ्ट वेंट्रिकुलर फेलियर) कहा जाता है।

 

प्रौढावस्था में धमनियों की मृदुता में कमी आने से धमनी काठिन्य (आर्टीरियो स्कलेरोसिस ) की प्रक्रिया शुरू हो जाती हैं। इससे वाम ह्रदय के सामने रूकावट बढ़ जाती हैं , जिससे इसकी दीवारें मोटी हो जाती हैं। इसे हाइपर ट्रॉफी ऑफ़ दि लेफ्ट वेंट्रिकल कहते हैं। ब्लड प्रेशर बढ़ने से उत्पन्न हुई इस स्थिति को हाइपरटेंसिव हार्ट डिजीज कहते हैं। कभी – कभी वृक्क रोग के कारण धमनियों में ब्लड प्रेशर बढ़ जाने से भी यह स्थिति उत्पन्न हो सकती हैं। ह्रदय रोगों की शुरुआत अमेरिका व अन्य पश्चिमी देशों से शुरू हुई , लेकिन अब ये रोग विकासशील देशों में फैल रहे हैं। इन रोगों का कारण आनुवांशिक तो हैं ही , मुख्य रूप से परिवर्तित दोषपूर्ण जीवन शैली इनमें भारी बढ़ोत्तरी के लिए जिम्मेवार हैं। साथ ही शारीरिक श्रम में कमी , तनाव में वृद्धि , भोजन में वसा की बढ़ोत्तरी मात्रा तथा रेशे का घटता अनुपात आदि भी इन रोगों के लिए जिम्मेवार हैं।

 

लक्षण              

इस अवस्था में थोड़ी सी मेहनत करने या सीढियां चढ़ने से सांस फूलने लगता है। कभी – कभी सीने में दर्द भी महसूस होता हैं। बेचैनी , घबराहट , चक्कर आना आदि लक्षण मिल सकते हैं।

 

बचाव के लिए सावधानियां

ह्रदय रोगों से बचाव हेतु कम वसा युक्त रेशे वाले शाकाहारी भोजन , मदिरा सहित अन्य नशीली वस्तुओं का त्याग , तनाव से मुक्ति तथा शारीरिक व्यायाम – ये चार गुर हैं , जिन्हें यदि एक साथ अपनाएं जाए तो बेहतर परिणाम मिलते हैं। संतृप्त वसायुक्त आहार के सेवन से शरीर में कोलेस्ट्रोल का स्टार बढ़ने से ह्रदय रोगों का ख़तरा बढ़ जाता हैं। अतः संतृप्त वसायुक्त घी , मक्खन , क्रीम एवं नारियल तेल के प्रयोग से बचना चाहिए। भोजन में फल , सब्जियों व सलाद की मात्रा बढनी चाहिए , क्योंकि इनके प्रयोग से शरीर में कोलेस्ट्रोल का स्टार घटता हैं। तम्बाकू , मदिरा व अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से ब्लड प्रेशर बढ़ता और धमनियों में काठिन्य उत्पन्न हो जाता हैं। ध्यान व योग के द्वारा तनाव से मुक्ति मिल सकती हैं। साथ ही सात्विक विचार और व्यवहार भी तनावमुक्ति में सहायता करते हैं। शरीर में कोलेस्ट्रोल का स्तर घटाने व धमनी काठिन्य से बचाव हेतु व्यायाम अति आवश्यक हैं और रोज 10 मिनट से आधा घंटा समय व्यायाम के लिए निकालकर ह्रदय रोगों से बचा सकता हैं।

 

घरेलू चिकित्सा

  • अर्जुन की छाल पानी में उबालकर लगातार प्रयो९ग करने से ह्रदय रोगों से लाभा पहुंचता हैं। छाल का चूर्ण भी प्रयोग किया जा सकता हैं।
  • सुबह खाली पेट लहसुन की एक – दो कलियाँ पानी के साथ लेने से कोलेस्ट्रोल के स्तर में कमी आती हैं।
  • प्याज का रस व शहद एक – एक चमच्च सुबह खाली पेट लें।
  • आंवले का चूर्ण एक – एक चमच्च सुबह – शाम पानी से लें। कच्चा आंवला उपलब्ध हो तो 2 – 3 आंवले सुबह – शाम चबाकर खाएं।
  • एक नींबू का रस एक गिलास पानी में डालकर सुबह शाम लें।
  • मौसमी , संतरे , अनार व गाजर में से किसी एक का रस सुबह – शाम एक – एक गिलास लें।
  • पीपल की कोंपलों का रस दो चमच्च व शहद एक चमच्च मिलाकर प्रातः सांय लें।

 

नोट: बताये हुए बिधि को यूज़ करते रहे आपको फायदा अवश्य मिलेगा, और फिर भी मन में कोई संकोच है, तो एक बार डॉक्टर की परामर्श अवश्य लें. हमारे लेटेस्ट जानकारी के पोस्ट को इसी तरह पढ़ते रहे और फायदा प्राप्त करते रहें।

admin

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