स्टीव जॉब्स के जीवन के कुछ अनसुनी बातें

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आप सभी का लेटेस्ट जानकारी में स्वागत है, हमारी कोशिश हमेशा आपके लिए कुछ खास जानकारी देने का होता है, यही सब सोचकर आपके लिए फिर एक महान हस्ती के जीवन के बारे में बताने जा रहे है, ये महान हस्ती का नाम है स्टीव जॉब्स जो किसी पहचान के मोहताज़ नहीं है, आज इनके सफलता के बारे में कुछ खास बातें जानते है, क्योकि ऐसे महान हस्तियों के बारें में जानने से खुद के अंदर भी जोश और जूनून पैदा होता है, आगे जानते है कुछ खास बाते…….

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1943 में आई. बी. एम्. के चेयरमैन टॉमस वाटसन ने कहा था कि संसार में संभवतः पांच कंप्यूटर बिक सकते हैं। उनके कहने का अर्थ यह था कि कंप्यूटर आम लोगो के काम का नहीं हैं। इसी वजह से आई. बी. एम्. ने पर्सनल कंप्यूटर की ओर तब तक ध्यान नहीं दिया, जब तक कि एप्पल के पर्सनल कंप्यूटर लोकप्रिय नहीं हो गए।

 

यह सोच सिर्फ आई. बी. एम. की ही नहीं थी। डिजिटल इक्विपमेंट कारपोरेशन के संस्थापक केन ओल्सन ने भी कहा था, ऐसी कोई वजह नहीं है की कोई व्यक्ति अपने घर में कंप्यूटर चाहे। लेकिन स्टीव जॉब्स और स्टीफन वोजनियाक के मन में पर्सनल कंप्यूटर बनाने का विचार आया और उन्होंने विशेषज्ञों की निराशाजनक या नकारात्मक बातों पर बिलकुल ध्यान नहीं दिया।

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उन्हें विश्वास था कि कंप्यूटर आम आदमी के काम आ सकते हैं तथा लोकप्रिय हो सकते हैं। इसी विश्वास के दम पर उन्होंने एप्पल कंप्यूटर बनाया और संसार में पर्सनल कंप्यूटर युग का सूत्रपात किया। शून्य से शिखर तक पहुँचने की बहुत कम कहानियां एप्पल कंप्यूटर जितनी दिलचस्प होंगी।

 

26 वर्षीय वोज्नियाक और 21 वर्षीय जॉब्स ने 1 अप्रैल 1976 को कैलिफोर्निया के क्यूपर्टिनो में एप्पल कंपनी की स्थापना की। दिसम्बर १९८० में इसका आईपीओ बाजार में आया। 22 डॉलर में जारी हुए शेयर का भाव पहले दिन ही 29 डॉलर पहुँच गया और कंपनी का बाजार मूल्य 1.2 अरब डॉलर आँका गया।

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1978 और 1983 के बीच में किसी स्दुम्दार प्रतिस्पर्धी के न होने के कारण कंपनी दिन दुगुनी रात चौगुनी तरक्की करती गयी 150 प्रतिशत की वार्षिक दर से विकास करती रही। एप्पल कंप्यूटर्स की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्थापना के सिर्फ आठ साल बाद यानी 1984 में यह सर्वश्रेष्ठ अमेरिकी कंपनी की फॉरचून सूची में 234 वें स्थान पर पहुँच गयी थी।

 

एप्पल ने कंप्यूटर जगत का हुलिया ही बदल डाला। पर्सनल कंप्यूटर बनने से पहले मेनफ़्रेम कंप्यूटर प्रचलित थे, जो इतने बड़े होते थे कि विश्वविद्यालयों या बड़ी संस्थाओं में ही इस्तेमाल हो सकते थे। एप्पल ने पर्सनल कंप्यूटर का युग शुरू किया था, जो इतने छोटे होते थे कि लोग उन्हें अपने घर या ऑफिस में आराम से रख सकते थे।

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यह काम उनके लिए आसान नहीं था। उनके पास सिर्फ एक विचार था, पूंजी नहीं थी। पूंजी की व्यवस्था करने के लिए जॉब्स ने अपनी फोक्सवैगन मिनी बस और वोजनियाक ने अपनी एच. पी. कैलकुलेटर बेचकर 1300 डॉलर इकट्ठे किये। उनके पास किराए के ऑफिस लेने के पैसे नहीं थे, लिहाजा ये जॉब्स के गैरेज में काम करने लगे।

 

आखिरकार पहला कंप्यूटर तैयार हो गया। अब समस्या यह थी कि उसे बेचें कैसे। कोई भी कंपनी इसे बेचने के लिए तैयार नहीं हो सकती थी, इसलिए उन्होंने स्टोर्स पर अपना ध्यान केन्द्रित किया। सैंपल कंप्यूटर लेकर वे ऐसे दुकानदार की तलाश में निकले, जो उनके बनाए पर्सनल कंप्यूटर बेचने के लिए तैयार हो जाए। कई स्टोर्स के चक्कर लगाने के बाद आखिरकार माउंटेन व्यू के एक छोटे से स्टोर ने उन्हें एक महीने में 50 कंप्यूटर पहुँचाने का आर्डर दे दिया।

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इसी के साथ एप्पल कंप्यूटर और दुनिया में पर्सनल कंप्यूटर का युग शुरू हो गया। आर्डर मिलने के बाद जॉब्स और वोज्नियाक स्पेयर पार्ट्स की दूकान पर गए तथा 25000 डॉलर का सामान उधार ले आये। दोनों ने दिन रात गैरेज में हाथ से कंप्यूटर असेम्बल किये और समय पर आर्डर पूरा कर दिया। ये कंप्यूटर एप्पल वन के नाम से बिके।

 

शुरू में बिक्री की गति बहुत धीमी थी और पहले साल सिर्फ 175 कंप्यूटर ही बिक पाए। बहरहाल, उनका लक्ष्य बहुत बड़ा था। वे बड़े सपने देख रहे थे। उनका लक्ष्य था कि एप्पल कंप्यूटर हर घर में पहुंचना चाहिए। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्हें बेहतर डिजाईन की जरूरत थी, इसलिए वोज्नियाक एप्पल – टू बनाने में जुट गए। एप्पल टू ने दुनिया में तहलका मचा दिया।

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यह रंगीन ग्राफ़िक्स वाला पहला पर्सनल कंप्यूटर था। अधिकाँश विशेषग्य ये मानते हैं कि एप्पल टू कंप्यूटर उद्योग की महान उपलब्धि थी और औद्योगिक  युग के बाद संसार में होने वाला सबसे महत्वपूर्ण आविष्कार था। एप्पल टू के बाद भी नित नए आविष्कार का सिलसिला जारी रहा और कंपनी ने मैकिनटोश या मैक प्रोग्राम उतारा।

 

मैक कंप्यूटर इतने लोकप्रिय हुए कि 100 दिन में ही 72000 कंप्यूटर की बिक्री हो गयी और कंपनी की सालाना बिक्री 2 अरब डॉलर तक पहुँच गयी। एप्पल कंपनी ने ग्राफ़िक्स और माउस बाजार में सबसे पहले उतारे, जिसकी वजह से कंप्यूटर चलाना बच्चों का खेल हो गया।

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अब कंप्यूटर चलाने के लिए विशेषग्य होना जरूरी नहीं रह गया और आम आदमी भी आसानी से कंप्यूटर चलाने लगा। दुनिया की कोई भी कंप्यूटर कंपनी प्रयोगशीलता के मामले में एप्पल कंपनी से टक्कर नहीं ले सकती। इसने आईमैक नामक नया कंप्यूटर निकाला। बाजार में आने के छः सप्ताह के भीतर ही 278000 आईमैक कंप्यूटर बिक गए।

 

2001 में एप्पल ने आई फोटो बाजार में उतारा, ताकि डिजिटल फोटोग्राफी के क्षेत्र में धूम मचाई जा सके। 2001  में ही एप्पल ने आई पोड का आविष्कार करके संगीत की दुनिया में तहलका मचा दिया। 2003 में आईमैक का अधिक सशक्त संस्करण बनाया और 17 इंच की संसार की पहली पोर्टेबल पॉवर बुक बनायी। 2007 में एप्पल ने आईफोन बाजार में उतारकर स्मर्त्फोने के क्षेत्र में कदम रखा।

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2010 में एप्पल ने आइपैड बाजार में उतारे 2010 में एप्पल की कुल बिक्री 65.23 अरब डॉलर थी और मुनाफा 14 अरब डॉलर। 2012 में स्टीव जॉब्स की पत्नी लारीन पॉवेल जॉब्स के पास 9 अरब डॉलर की संपत्ति थी और वे संसार के अरबपतियों की सूची में 100 वें स्थान पर थी। और यह सब स्टीव जॉब्स के नए काम के वजह से हुआ।

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