मन को वश में करो – भगवान् महावीर

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उत्तराध्ययन सूत्र में भगवान् महावीर ने मन को दुष्ट घोड़े की उपमा देते हुए कहा था –

मन साहसिक – भयंकर दुष्ट घोड़े के सामान हैं जो सदैव दौड़ता रहता हैं।

मन को जीतना सर्वाधिक कठिन कार्य हैं। जब तक मन वश में नहीं होता तब तक बाह्य वस्तुओं को वश में करना निरर्थक हैं। मनुष्य के सुखों का मूलमंत्र मन के वशीकरण में छिपा हुआ है। लेकिन मनुष्य अपने मन को छोड़कर शेष विश्व को वश में करने के प्रयासों में तल्लीन रहा करता हैं। और सहस्त्रशः प्रयास करके भी अंततः असफल ही होता हैं।

एक व्यक्ति एक साधक के पास गया और बोला – गुरुदेव ! कोई ऐसा मंत्र बताइये जिससे देवता मेरे वश में हो जाए।

साधक ने पूछा – तुम्हारे नौकर – चाकर तुम्हारे वश में हैं ?

वह व्यक्ति बोला – नहीं।

संत ने पुनः पूछा – तुम्हारा परिवार तुम्हारे वश में हैं ? व्यक्ति ने उत्तर दिया – नहीं ! संत ने पुनः प्रश्न किया – तुम्हारी पत्नी तो वश में होगी ? वह व्यक्ति बोला – नहीं , वह भी मेरी नहीं सुनती हैं।

संत ने पुनः प्रश्न किया – तुम्हारा मन तो तुम्हारे वश में होगा।

उस व्यक्ति ने कहा – नहीं , मन भी मेरे वश में नहीं हैं।

संत बोले – भाई ! जब कोई भी तुम्हारे वश में नहीं हैं , यहाँ तक कि तुम्हारा मन भी तुम्हारे वश में नहीं हैं , तो देवता तुम्हारे वश में कैसे होंगे ? सर्वप्रथम अपने मन को वश में करो। पूरा संसार तुम्हारे वश में हो जाएगा।

admin

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