अलेक्जेंडर ग्राहम बेल टेलीफोन के आविष्कारक

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नया काम करके अमीर बनने के उदाहरणों में टेलीफोन का आविष्कार भी शामिल हैं। बिजली के बल्ब की तरह ही इस आविष्कार ने भी दुनिया को बदल दिया। इसके संस्थापक अलैक्जेंडर ग्राहम बेल ने न सिर्फ टेलीफोन का आविष्कार किया, बल्कि उसके बाद एक कंपनी भी स्थापित की, जो आज एटीएंडटी के रूप में विश्वविख्यात हैं।

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2010 में यह कंपनी फॉरचून पत्रिका के अनुसार अमेरिका की 12 वीं सबसे बड़ी कंपनी हैं, जिसकी आमदनी 124.629 बिलियन डॉलर और मुनाफ़ा 19.864 बिलियन डॉलर हैं।

 

टेलीफोन के आविष्कार के 127 साल बाद आज भी यह कंपनी निरंतर प्रगति कर रही हैं और इसका सारा श्रेय बेल के नव्विचार और दूरदर्शिता को जाता हैं। युवावस्था में बेल ने सपने में भी नहीं सोचा था की वे इतना बड़ा आविष्कार कर सकते हैं।

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बोस्टन यूनिवर्सिटी में बधिरों को भाषा सिखाते समय उन्हें एक बधिर युवती मैगल हबार्ड से प्रेम हो गया। इसके बाद वे एक ऐसी मशीन बनाने में जुट गए, जिससे उनकी प्रेमिका सुन सके। इसी दौरान उनके मन में टेलीफोन बनाने का विचार आया।

 

फिर क्या था, बेल प्रयोगों में जुट गए। बेल ने एक लाश का कान चीरकर देखा कि हवा किस तरह ध्वनि उत्पन्न करती हैं। उन्होंने सोचा कि जिस तरह कान के परदे की छोटी सी झिल्ली कान की हड्डियों को हिलाती हैं, अगर उसी तरह लोहे की झिल्ली लोहे के ढाँचे को हिला सके, तो  टेलीफोन के माध्यम से शब्दों का आदान – प्रदान हो सकता हैं।

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15 फरवरी 1876 को ग्राहम बेल ने टेलीफोन के पेटेंट के लिए आवेदन दे दिया। इसके बाद बेल अपने सहयोगी वाटसन के साथ बोस्टन के एक बोर्डिंग हाउस के दो कमरों में बंद होकर दिन – रात प्रयोग करने लगे।

 

आखिरकार 10 मार्च 1876 को बेल की मेहनत सफल हुई, जब उनके टेलीफोन के माध्यम से शब्दों का आदान – प्रदान संभव हो गया। लेकिन संघर्ष अभी बाकी था। उनके इस आविष्कार से लोग प्रभावित तो थे, मगर किसी को उसमें व्यावसायिक सफलता की संभावना नहीं दिख रही थी। जब बेल ने अपने टेलीफोन को एक प्रदर्शनी में रखा, तो सभी ने कौतुक तो दिखाया, लेकिन किसी ने भी इस आविष्कार को महत्वपूर्ण नहीं माना।

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प्रख्यात बैंकर जे. पी. मॉर्गन ने तो उनसे साफ – साफ़ कह दिया, आपके टेलीफोन के आविष्कार का कोई व्यावसायिक मूल्य नहीं हैं, बहरहाल, बेल को इसकी संभावनाएं साफ़ दिख रही थी। टेलीफोन का व्यावसायिक विकास बहुत धीमे हुआ, लेकिन कुछ सुधारों के बाद धीरे – धीरे लोगों को इसका महत्व समझ में आने लगा और अलैक्जेंडर ग्राहम बेल लोकप्रिय होने के साथ – साथ अमीर भी बन गए।

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