हावर्ड हेड ने खेल को एक नया पहचान दिया

11,133 total views, 1 views today

हॉवर्ड हेड ने दो महत्वपूर्ण नए आविष्कार किये थे। उन्होंने 1950 में धातु की पहली स्की का आविष्कार किया और 1976 में प्रिंस ओवरसाइज्ड टेनिस रैकेट का। मजे की बात यह थी कि हेड ने ये आविष्कार पैसे कमाने के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ अपने खेल को सुधारने के लिए थे।

आगे ये भी पढ़ें: चेस्टर कार्लसन फोटोकॉपी मशीन के संस्थापक

 

और खेल – खेल में हुए इन आविष्कारो के बदौलत वे काफी अमीर बन गए। हॉवर्ड हेड स्कीइंग में फिसड्डी थे। इस बात से उन्हें बड़ी कोफ़्त होती थी। उन्होंने एक दिन सोचा कि शायद लकड़ी की स्की के कारण वे अच्छे से स्कीइंग नहीं कर पाते हैं और अगर धातु की स्की हो, तो उनका प्रदर्शन सुधर सकता हैं।

 

बस फिर क्या था, वे धातु की मजबूत स्की बनाने के प्रयोग करने लगे। उन्होंने दिन – रात मेहनत करके धातु की छः जोड़ी स्कीज बना ली। उनकी मजबूती की जांच करवाने के लिए उन्होंने एक स्की प्रोफेशनल की मदद की।

आगे ये भी पढ़ें: हैंस विल्सडोर्फ़ के सफल जीवन

 

हॉवर्ड ह्जेअद की बनाई हुई सभी धातु की स्कीज टूट गयी। प्रोफेशनल ने हॉवर्ड हेड को समझाया कि वे धातु की स्की बनाने का सपना छोड़ दे, क्योंकी धातु की मजबूत, लेकिन हल्की स्की बनाना संभव नहीं हैं। बहरहाल, हॉवर्ड हेड धुन के पक्के थे।

 

वे धातु की स्की को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयोग करते रहे और चार साल की मेहनत के बाद अंततः 1951 में वे एल्युमिनियम की काफी मजबूत स्की बनाने में काफी कामयाब हुए। इसमें शक्ति के लिए प्लाईवुड लगा था, घूमने के लिए स्टील की किनारी थी और सफाई से स्की करने के लिए प्लास्टिक लगा था। प्रयोग के दौरान यह स्की काफी सफल रही।

 

हॉवर्ड हेड धातु की इस स्की को स्टैण्डर्ड नाम से 85 डॉलर में बेचने लगे। महंगी होने के कारण इसे लोकप्रिय होने में थोड़ा वक़्त लगा, लेकिन फिर इसकी बिक्री तेजी से होने लगी। हॉवर्ड हेड द्वारा स्थापित हेड स्की नामक कंपनी स्की उद्योग की प्रमुख कंपनी बन गयी।

आगे ये भी पढ़ें: एस डेनियल अब्राहम संघर्षपूर्ण सफल जीवन

 

1969 में हेड ने अपनी कंपनी 1.6 करोड़ डॉलर में बेच दी, जिससे उन्हें 45 लाख डॉलर का व्यक्तिगत लाभ हुआ। फिर हॉवर्ड हेड ने रिटायर होकर अपने घर में एक टेनिस कोर्ट बनाया और 55 साल की उम्र में टेनिस खेलना शुरू किया। इस खेल में भी उनका प्रदर्शन बहुत खराब था, जिससे उकताकर उन्होंने इसे भी सुधारने का फैसला किया।

 

उन्होंने सोचा कि शायद सामान्य रैकेटो के वजन के कारण उनका खेल खराब होगा। उन्होंने हलके और भारी रैकेट बनाकर देखे, ताकि किसी रैकेट से तो उनका खेल सुधरे। एक किंवदंती हैं कि 1970 के दशक में एक रात को उन्होंने एक सपना देखा, जिसमें उन्होंने सुना कि इसे बड़ा बनाओ। पहले तो उन्हें लगा कि यह संभव नहीं होगा, क्योंकि रैकेट के आकर को लेकर कोई नियम नहीं हैं।

 

हॉवर्ड तत्काल प्रयोगों में जुट गए और उन्होंने एक ऐसा रैकेट बनाया, जो प्रचलित रैकेटो की तुलना में दो इंच ज्यादा चौड़ा और तीन इंच ज्यादा लंबा था। इससे रैकेट का आकार 60 प्रतिशत बढ़ गया, लेकिन इसका वजन नहीं बढ़ा, क्योंकि हॉवर्ड ने इसमें हल्की लेकिन मजबूत धातुओं का इस्तेमाल किया था।

आगे ये भी पढ़ें: एडी डैसलर और रुडोल्फ दैसलर की संघर्ष भरी लाइफ हिस्ट्री

 

हॉवर्ड का खेल तत्काल सुधर गया। हॉवर्ड का कहना था, ‘मुझे सुधार की तो उम्मीद थी, लेकिन इतने जबरदस्त सुधार की उम्मीद नहीं थी’।  उन्होंने सोचा कि अगर इस नए रैकेट से एक बूढ़े आदमी का खेल सुधर सकता हैं, तो युवा खिलाड़ियों के लिए तो यह वरदान साबित होगा।

 

उन्होंने तत्काल इसे बाजार में उतारने के बारे में सोचा। उस समय लकड़ी के परम्परागत रैकेट 70 वर्ग इंच के होते थे, हॉवर्ड हेड ने 85 से 130 वर्ग इंच के हिटिंग एरिया के रैकेट का पेटेंट ले लिया।

 

हॉवर्ड की प्रिंस टेनिस कंपनी के रैकेट तत्काल लोकप्रिय हो गए। 1982 में उन्होंने अपनी यह कंपनी भी बेच दी, जिससे उन्हें 6.2 करोड़ डॉलर मिले और 3.2 करोड़ डॉलर का व्यक्तिगत लाभ हुआ, अपने आविष्कारों की बदौलत हॉवर्ड हेड अमीर बन गए।

आगे ये भी पढ़ें: Cyrus McCormick ने इस प्रकार अर्जित किया जीवन की बड़ी कामयाबी

 

लेकिन अगर उनकी खेल संबंधी समस्याएं नहीं होती, तो वे कभी अमीर नहीं पाते। जैसा हॉवर्ड हेड ने कहा हैं, सबसे अच्छे आविष्कार वे लोग करते हैं, जो किसी समस्या को सुलझाने की कोशिश में गहराई से जुटे रहते हैं।

admin

आपने कीमती समय देकर ब्लॉग पढ़ा धन्यबाद, ये पोस्ट आपको पसंद आया हो तो शेयर करना न भूले, ताकि इसे ज्यादा से ज्यादा लोग पढ़ें, अपना विचार जरूर लिखे, इससे हमें और ज्यादा अच्छी और लेटेस्ट जानकारियाँ लिखने के लिए प्रेरित करेगा.

Leave a Reply

Your email address will not be published.