हैंस विल्सडोर्फ़ के सफल जीवन

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आज रोलेक्स घड़ियाँ दुनिया भर में मश्हूर हैं। रोलेक्स की स्थापना 1908 में जर्मन राष्ट्रीयता के नागरिक हैंस विल्सफोर्ड ने लंदन में की। उस वक़्त ज्यादातर घड़ियाँ जेब में रखी जाती थी और उन्हें स्विट्ज़रलैंड के घड़ी निर्माता बनाते थे। कलाई घड़ियों के छोटे आकार के कारण सटीक समय बताने वाली मशीनें बनाना बहुत मुश्किल काम था।

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विल्सफोर्ड ने कलाई घड़ी बनाने पर ध्यान केन्द्रित किया। वे सटीक समय बताने वाली पहली कलाई घड़ी बनाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने एगलर नाम की एक छोटी स्विस कंपनी से सटीक समय बताने वाली अंदरूनी मशीनें बनवाई।

 

फिर विल्सफोर्ड ने एक और काम किया, जो उनसे पहले किसी और ने नहीं किया था। उन्होंने अपनी घड़ी की अंदरूनी मशीन स्विट्ज़रलैंड के स्कूल ऑफ़ होरोलॉजी और लंदन की क्यू ऑब्जर्वेटरी में जांच के लिए भेजी। इसे क्रोनोमीटर का दर्जा मिल गया।

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इसका मतलब यह था कि तीन तरह के तापमानों में इसकी जांच की गयी थी : फ्रिज में, सामान्य तापमान में और सामान्य ओवेन में। क्रोनोमीटर का दर्जा पाने वाली यह दुनिया की पहली कलाई घड़ी थी। लेकिन विल्सफोर्ड इतने से ही संतुष्ट नहीं हुए। वे धुल और नमी से रहित कलाई घड़ी बनाना चाहते, क्योंकि धुल और नमी चाबी के रास्ते से घड़ी के अन्दर पहुँच जाती थी।

 

जब उन्हें यह पता चला कि पेरेट और पेरेगक्स नामक दो आविष्कारक कलाई घड़ी में लगने वाली ऐसी चाबी का पेटेंट ले रहे हैं, जो पूरी तरह से बंद हो सकती हैं, तो वे समझ गए कि उन्हें अपनी समस्या का समाधान मिल गया हैं।

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उन्होंने उस पेटेंट के सारे अधिकार खरीद लिए और 1926 में पहली वाटरप्रूफ घड़ी बनायी, जिसका नाम ईस्टर था। जनता को इसके वाटरप्रूफ होने पर विश्वास नहीं था, इसलिए उन्होंने दुकानों में एक्वेरियम या पानी से भरे शोकेस लगवाए और उसमें अपनी घड़ी डुबाकर जनता को यकीन दिलाया।

 

घड़ी की दुकानों में जब ग्राहक देखते थे कि रोलेक्स पानी में डूबी होने के बाद भी सही समय दिखा रही हैं, तो उन्हें यकीन करना ही पड़ता था। वाटरप्रूफ घड़ी का सिक्का जमने के बाद घड़ी बाजार में रोलेक्स का नाम चल निकला और यह दुनिया की सबसे लोकप्रिय घड़ियों में से एक बन गयी।

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admin

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