गॉर्डन मूर और रॉबर्ट नॉइस दुनिया की सफल जोड़ी

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इंटेल इनसाइड का विज्ञापन आज दुनिया भर में मश्हूर हैं। इंटेल आज कंप्यूटर की विश्वसनीयता का प्रतीक बन चुका हैं। अगर कंप्यूटर पर इंटेल इनसाइड का स्टीकर न चिपका हो, तो उसकी विश्वसनीयता संदिग्ध मानी जाती हैं। कंप्यूटर चाहे कोई भी कंपनी बना रही हो, ग्राहक उसके भीतर इंटेल का माइक्रोप्रोसेसर ही चाहते हैं… और ऐसा क्यों न हो !

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इंटेल ने ही तो माइक्रोप्रोसेसर का आविष्कार किया हैं। इंटेल के सह संस्थापक गॉर्डन मूर आज विश्व के अमीरों की सूची में 216 वें स्थान पर हैं और उनके पास 4 अरब डॉलर की संपत्ति हैं। इंटेल के शुरू होने की कहानी बड़ी ही दिलचस्प हैं।

 

मूर और नॉइस दोनों ही फेयरचाइल्ड कंपनी में काम करते थे। दोनों को ही विश्वास था कि छोटी – छोटी चिपों में मेमोरी का संग्रह करना संभव हैं, लेकिन उनकी कंपनी फेयरचाइल्ड उनके सुझाव पर ध्यान ही नहीं दे रही थी। नतीजा यह हुआ कि 1968 में मूर और नॉइस ने कंपनी छोड़ दी।

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उन्होंने 18 जुलाई 1968 को अपनी कंपनी एन.एन. इलेक्ट्रॉनिक्स शुरू की, जिसका नाम बाद में बदलकर इंटेल कर दिया गया। वे कंप्यूटर मेमोरी को स्टोर करने के लिए एक छोटी सी सेमीकंडक्टर चिप का आविष्कार करना चाहते थे। हालांकि उस वक्त उन्होंने ऐसी कोई चिप का आविष्कार नहीं किया था, लेकिन उन्हेंन अपनी प्रतिभा पर भरोसा था और सुनहरे भविष्य की उम्मीद थी।

 

2010 में इंटेल कंपनी फॉरचून – 500 की सूची में 56 वें स्थान पर थी। इसकी आमदनी 43.62 अरब डॉलर थी तथा मुनाफा 11.46 अरब डॉलर। 2010 में इंटेल में 96,500 कर्मचारी काम करते हैं, लेकिन शुरुआत में इंटेल में सिर्फ 12 लोग थे और पहले साल कंपनी को लगभग 3000 डॉलर की आमदनी हुई, जो बैंक में जमा पूंजी पर मिला ब्याज था। पहले साल इसके पास कोई प्रोडक्ट ही नहीं था, जिसे यह बेच सके।

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अपना पहला प्रोडक्ट बनाने में इसे एक साल का समय लग गया। इसके बाद भी सफलता की मंजिल दूर थी, क्योंकि वह प्रोडक्ट बाजार मैं ज्यादा नहीं चल पाया। यह एक तरह से अच्छा ही रहा, क्योंकि अगर वह प्रोडक्ट लोकप्रिय हो जाता, तब भी वे उसका ज्यादा उत्पादन नहीं कर सकते थे।

 

ज्यादातर कंपनियां जानती थी कि सेमीकंडक्टर चिप का उपयोग मेमोरी स्टोर करने में हो सकता हैं, लेकिन बड़ी कंपनियों का मानना था कि सेमीकंडक्टर चिप में सामान्य से दस गुणा ज्याडा लागत हैं। इसमें मुनाफा न दिखने के कारण किसी ने इस दिशा में कोशिश नहीं की।

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लेकिन इंटेल ने यह अनुमान लगाया कि बड़े पैमाने पर उत्पादन करके लागत कम किया जा सकता हैं और अगर मेमोरी चिप में ट्रांजिस्टरों की संख्या बढ़ा दी जाए तो मुनाफा भी हो सकता हैं। इंटेल ने लागत कम करके ऐसे मेमोरी चिप विकसित करने पर ध्यान केन्द्रित किया, जिस पर लगे ट्रांजिस्टरों की संख्या लगातार बढ़ती जाए।

 

इंटेल के माइक्रोप्रोसेसर का आविष्कार तो संयोग से हुआ था। 1969 में एक जापानी कंपनी निप्पन काल्चुलातिंग मशीन ने इंटेल से लॉजिक चिप बनाने को कहा, ताकि जटिल गणना करने वाले कैलकुलेटरों में उनका इस्तेमाल किया जा सके। इंटेल एक छोटी चिप पर काम कर रही थी, इसलिए उन्होंने उसी चिप को विकसित किया।

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कई चिप लगाने के बजाय इंटेल के इंजिनियर टेड होफ ने चार चिपों को एक साथ जोड़कर बीच में एक चिप लगा दी। इस तरह एक ही चिप में हाफ ने सी. पी. यू. बना दिया। एक ग्राहक के आग्रह पर बनी यही चिप आगे चलकर इंटेल का 4004 माइक्रोप्रोसेसर बनी।

 

4004 माइक्रोप्रोसेसर के बाद इंटेल ने 8008 माइक्रोप्रोसेसर बाजार में उतारा, जो 4004 से दुगुना शक्तिशाली था। इसी माइक्रोप्रोसेसर के बदौलत 1970 के दशक में पर्सनल कंप्यूटर का युग शुरू हुआ। आई. बी. एम. ने अपने पर्सनल कंप्यूटर में इंटेल का माइक्रोप्रोसेसर लगाया और इसके बाद तो इंटेल दिन दुगुनी रात चौगुनी तरक्की करने लगा।

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बहरहाल, इन्टरनेट ने सफलता पाने के बाद भी नए काम करना नहीं छोड़ा। यह पहले से अधिक शक्तिशाली माइक्रोप्रोसेसर बनाने में लगातार जुटी हुई हैं। इसने पेंटियम सीरीज के बाद अब डुअल कोर सीरीज निकाली हैं, जिसमें एक कंप्यूटर में दो माइक्रोप्रोसेसर लगाए गए हैं।

 

जून 2011 में इंटेल ने पहला पेंटियम मोबाइल प्रोसेसर रिलीज़ किया। अब इंटेल स्मार्टफ़ोन्स और टेबलेट्स के प्रोसेसर बनाने पर ध्यान दे रही हैं। 2011 में ही इंटेल ने गूगल के साथ पार्टनरशिप की घोषणा की और 2012 से एंड्राइड 2.3 के साथ इंटेल के एटम माइक्रोप्रोसेसर का उपयोग होने लगा। चाहे पर्सनल कंप्यूटर हो या स्मार्टफ़ोन, इंटेल लगातार नए और बेहतर प्रोडक्ट्स बनाती जा रही हैं और नवाचार की इसी आदत के कारण यह माइक्रोप्रोसेसर इंडस्ट्री के शिखर पर हैं।

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