सबीर भाटिया हॉटमेल के संस्थापक

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सबीर भाटिया सिलिकॉन वैली में एप्पल कंप्यूटर्स में काम कर रहे थे। उनके मन में एक ऐसी ई – मेल सर्विस शुरू करने का विचार आया, जिसमें कोई भी ग्राहक किसी भी कंप्यूटर से अपना ई – मेल अकाउंट खोल सके। उन्होंने अपने मित्र जैक स्मिथ के साथ मिलकर हॉटमेल नामक ई – मेल सेवा शुरू की।

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यह नया विचार इसलिए था, क्योंकि इसमें ग्राहक को अपने कंप्यूटर में अलग से किसी विशेष सॉफ्टवेयर को लोड करने की जरूरत नहीं थी। ग्राहक वेब ब्राउज़र वाले किसी भी कंप्यूटर से अपना ई – मेल अकाउंट खोल सकता था।

 

4 जुलाई 1996 को हॉटमेल शुरू हुआ और छः महीने में ही इसके ग्राहकों की संख्या दस लाख तक पहुँच गयी। दो साल में इसके एक करोड़ ग्राहक हो चुके थे। उसी समय इन्टरनेट और मेल अकाउंट में बिल गेट्स की रुचि जागी। एक दिन बिल गेट्स के ऑफिस से सबीर भाटिया के पास फ़ोन आया।

 

बिल गेट्स वर्ल्डवाइड वेब पर माइक्रोसॉफ्ट का परचम लहराना चाहते थे। वे हॉटमेल को खरीदना चाहते थे,  ताकि इसके एक करोड़ ग्राहक माइक्रोसॉफ्ट से जुड़ सके। यह सबीर भाटिया के लिए बहुत सुखद आश्चर्य था। वे जानते थे कि हालांकि हॉटमेल के पास एक करोड़ ग्राहक थे, लेकिन मुफ्त सेवा होने के कारण इसकी आमदनी कम थी और खर्च ज्यादा थे।

 

हॉटमेल की शुरुआती पूंजी के तीन लाख डॉलर डूब चुके थे। इसके बाद लगाए गए दस लाख डॉलर भी ख़त्म हो रहे थे और ग्राहकों की संख्या बढ़ने के साथ –  साथ हॉटमेल का नुक्सान भी बढ़ रहा था।

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गेट्स ने भाटिया के सामने 16 करोड़ डॉलर का प्रस्ताव रखा यानी हर ग्राहक पर 16 डॉलर। भाटिया इतने कम में सौदा नहीं करना चाहते थे, इसलिए वे मीटिंग से उठकर चले आए। उनके पार्टनर ने कहा कि अगर वे 20 करोड़ में सौदा कर ले, तो बहुत बढ़िया रहेगा।

 

लेकिन भाटिया की महत्वाकांक्षा ऊंची थी। उन्होंने गेट्स के सामने 70 करोड़ डॉलर का प्रस्ताव रखा। भाटिया की सौदेबाजी के कारण गेट्स ने जब 40 करोड़ का प्रस्ताव रखा, तो भाटिया ने हाँ कर दी।

 

30 दिसम्बर 1997 को इस करार पर हस्ताक्षर हुए, जो भाटिया का 29 वां जन्मदिन था। सबीर भाटिया ने हॉटमेल के रूप में इन्टरनेट पर पहली सर्वसुलभ ई – मेल सेवा दी, जिसकी वजह से उनका नाम हमेशा याद रखा जायेगा।

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