चेस्टर कार्लसन फोटोकॉपी मशीन के संस्थापक

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चेस्टर कार्लसन ने फोटोकापियर के रूप में आधुनिक दुनिया का एक बहुत ही महत्वपूर्ण आविष्कार किया। वे न्यू यॉर्क में पेटेंट वकील थे, इसलिए उन्हें एक ही दस्तावेज की कई प्रतियों की जरूरत पड़ती थी। यह काम कष्टकारी था क्योंकि उन्हें कार्बन लगाकर अपने हाथों से प्रतियां बनानी पड़ती थी।

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अपनी समस्या को सुलझाने के लिए उन्होंने फोटोकॉपी मशीन के आविष्कार की दिशा में प्रयोग किये, जिससे उनकी समस्या तो सुलझी ही, साथ ही लाखों – करोड़ों लोगों की समस्या सुलझ गयी।

 

22 अक्टूबर 1938 को अपनी मशीन की तकनीक का सफल परीक्षण करने के बाद कार्लसन अपने शुरुआती फोटोकॉपियर को लेकर आई.बी.एम., कोडक और आरसीए जैसी बीस बड़ी कंपनियों के पास गए। उन्होंने इन कंपनियों को अपनी मशीन बेचने की कोशिश की, लेकिन किसी ने भी उनकी मशीन को महत्वपूर्ण नहीं माना।

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इसके दो कारण थे, पहला तो यह कि इस मशीन में अभी सुधार की जरूरत थी और दूसरा यह कि कंपनियों को इसकी उपयोगिता या बाजार में सफल होने की संभावना नहीं दिख रही थी। एक कंपनी वाले ने तो उनसे साफ़ – साफ़ कह दिया कि जब कार्बन पेपर इतना सस्ता हैं, तो इतनी महंगी मशीन से फोटोकॉपी कौन करवाएगा।

 

अंत में हैलॉइड कारपोरेशन ( बाद में इसका नाम बदलकर जेरोक्स हो गया ) ने 1946 में इस मशीन के अधिकार खरीद लिए। बहरहाल, इस मशीन में काफी सुधारों की जरूरत थी। अंततः काफी सुधारों और खर्च के बाद 1959 में हैलॉइड ने पहला फोटोकापियर मॉडल – 914 बाजार में उतारा।

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