मूर्खों के अलग ही संसार – Different worlds of fools

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आचार्य शंकर ने कहा –

शल्य क्या है ? अपनी मूर्खता ही शल्य हैं।

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मूर्खों का एक अलग ही संसार होता हैं। वे अपनी मूर्खता के कारण कष्ट तो भोगते ही हैं , साथ ही उपहास के पात्र भी बनते हैं।

 

एक महाशय एक वकील के पास गया। उसने वकील से अपना केस पढवाया। वकील ने चश्मा लगाया और पढने लगा। उस व्यक्ति ने पूछा – क्या यह पढने वाला चश्मा हैं ? वकील बोला – हाँ यह पढने के लिए ही हैं।

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फिर क्या था। वह व्यक्ति पहुँच गया एक चश्मे की दूकान पर और बोला – मुझे पढने वाला चश्मा चाहिए। दुकानदार ने उसकी आँखें टेस्ट करने के लिए टेस्टिंग चश्मा लगाया। अनेक शीशे बदल – बदल कर वह उससे पूछता रहा की क्या पढ़ा जा रहा हैं ? वह व्यक्ति उत्तर देता रहा – नहीं , अभी नहीं पढ़ा जा रहा हैं।

 

दुकानदार ने सोचा – हो सकता हैं इसे अंग्रेजी नहीं आती हो , अतः उसने हिंदी वर्णमाला की तालिका उसके समक्ष रखी। लेकिन फिर भी वह नहीं पढ़ पा रहा था। दुकानदार ने पूछा – तुम्हें कोई भाषा पढनी आती हैं या नहीं ? उस व्यक्ति ने कहा – पढनी आती तो चश्मा क्यों खरीदता। दुकानदार बोला – भागो यहाँ से।

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जब तुम्हें भाषा का ही ज्ञान नहीं हैं , एक क्या सारे संसार के चश्मे भी तुम्हें नहीं पढ़ा सकते हैं। उस व्यक्ति ने कहा – जब वकील चश्मे से पढ़ सकता हैं , तो मैं क्यों नहीं पढ़ सकता हूँ ?

अब ऐसे व्यक्तिओं को कौन समझाए ?

admin

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