चार्ल्स मेरिल के जीवन के सफल अध्याय

30 total views, 1 views today

चार्ल्स मेरिल ने निवेश की दुनिया का नक्शा बदल कर रख दिया। उन्होंने मध्यवर्ग को शेयर बाजार के प्रति आकर्षित किया, जिसकी वजह से म्यूच्यूअल फण्ड लोकप्रिय हुए। आज हम शेयर बाजार में म्यूच्यूअल फण्ड के न होने की भी कल्पना नहीं कर सकते हैं, लेकिन एक वक़्त ऐसा भी था, जब आम आदमी खुद शेयर नहीं खरीदता था और उस समय उसकी मदद करने के लिए म्यूच्यूअल फण्ड भी नहीं थे।

आगे ये भी पढ़ें: जेफ बेजोस की सफलता की कहानी

 

बीसवीं सदी की शुरुआत में सिर्फ मुट्ठी भर संपन्न लोग ही औद्योगिक क्रान्ति में निवेश के अवसर का फायदा उठा रहे थे। सामान्य जनता को न तो इसका ज्ञान था, न ही इससे लाभ उठाने का अवसर था। चार्ल्स मेरिल ने सोचा की आम जनता को शेयर बाजार का सुनहरे अवसर का लाभ मिलना चाहिए। इसी विचार के आधार पर मेरिल ने जनवरी 1914 में अपनी कंपनी शुरू की और उनके दोस्त एडमंड लीच जुलाई में उनके साझेदार बन गए। अब कंपनी का नाम मेरिल लीच एंड कंपनी हो गया। मेरिल लीच को चैन स्टोर की अवधारणा में विश्वास था और वे इसे अमेरिकी खरीदारी का भविष्य मानते थे। शुरुआत में उन्होंने चेन स्टोर्स के शेयर जनता तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया।

 

1929 में विश्वव्यापी मंदी आ गयी और अमेरिका का शेयर बाजार  लुढ़क गया। बहरहाल, इससे मेरिल या उसके कंपनी को कोई नुक्सान नहीं हुआ, क्योंकि 1928 में ही मेरिल ने अपने ग्राहकों को यह सलाह दे दी थी कि मंदी आने का ख़तरा दिख रहा हैं, इसलिए वे शेयर बाजार से बाहर निकल जाय। मेरिल ने यह सठीक अनुमान लगाया था यह मंदी लम्बी चलेगी, इसलिए उन्होंने अपने ग्राहकों को अकाउंट दूसरी ब्रोकर कंपनी के हवाले कर दिया और अपना पूरा समय रिटेल चेन को संभालने में लगाने लगे।

आगे ये भी पढ़ें: डायबिटीज से लेकर लो ब्लड प्रेशर दूर करने के 10 घरेलू नुस्खे

 

मंदी के बाद मेरिल दोबारा वॉल स्ट्रीट लौटे और एक नयी कंपनी बनाकर शेयरों को आम जनता तक पहुंचाने का काम करने लगे। उस जमाने में बड़ी ब्रोकरेज कंपनियां छोटे निवेशकों को पसंद नहीं करती थी, क्योंकि उन्हें शेयर बेचने में झंझट और लागत ज्यादा थी। सिर्फ मेरिल को ही यकीन था कि कम पूंजी वाले निवेशको को शेयर बेचकर लाभ कमाया जा सकता हैं। अपने रिटेल चेन स्टोर के अनुभव से वे जानते थे कि अगर बहुत सारा सामान कम मार्जिन पर बेचा जाय, तो भारी मुनाफ़ा हो सकता हैं।

 

उन्होंने स्टॉक एक्सचेंज में रिटेल चेन स्टोर की अवधारणा को लागू किया और अपने पार्टनर लींच की मृत्यु के बाद छोटे शहरों में अपने ऑफिस खोले। वे शेयर्स को इतना लोकप्रिय बनाना चाहते थे, ताकि जनता उसे बिस्कुट या चिप्स जैसी आसानी से खरीद सके। आज उनका यह सपना साकार हो चुका हैं।

आगे ये भी पढ़ें: प्राकृतिक तरीके से चमकती त्वचा पाने के खास तरीके

 

यह वित्तीय क्रान्ति की शुरुआत थी। मेरिल ने अपनी लागत कम करने पर ध्यान दिया। चूंकि ज्यादातर बिजनेस फ़ोन के माध्यम से होता था, इसलिए बड़ी और महंगी इमारत के बजाय उन्होंने एक छोटी सी एक सस्ती जगह पर छोटा सा ऑफिस खोला। इसके बाद मेरिल ने पूरे अमेरिका में अपनी शाखाएं खोली। वे अपने ब्रोकर एजेंटो को कमीशन के बजाय तनख्वाह देते थे, ताकि जनता को यह भरोसा हो जाय कि वे सिर्फ कमीशन हासिल करने के लिए कोई शेयर नहीं बेचेंगे। उन्होंने अपनी कंपनी का बहुत ही विज्ञापन किया और जनता को शेयर बाजार में लाने के लिए प्रचार अभियान चलाया।

 

1947 तक मेरिल लिंच कंपनी अमेरिका की सबसे बड़ी शेयर रिटेलर कंपनी बन गयी और 62 लाख डॉलर की बिक्री के साथ सबसे आगे रही। 1954 में मासिक निवेश योजना शुरू की गयी, जिसमें कम पूंजी वाले लोग किश्तों में शेयर खरीद सकते थे। 1944 में हार्ट अटैक के कारण मेरिल को मजबूरन कंपनी की सक्रीय भूमिका से हटना पड़ा। बहरहाल, वे फ़ोन से मार्गदर्शन देते रहे। मेरिल की मृत्यु 1956 में हुई, लेकिन तब तक वे 20 लाख अमेरिका वासियों को शेयर धारक बना चुके थे।

आगे ये भी पढ़ें: दस्त (अतिसार) का जबरदस्त घरेलू उपचार

 

चार्ल्स मेरिल शेयर बाजार की अवधारणा को वॉल स्ट्रीट की बंद दीवारों से निकालकर चौराहे पर ले आए। उनका मानना था कि अगर शेयर आसानी से उपलब्ध होंगे तो जनता उन्हें जरूर खरीदेगी। शेयरों को आम जनता तक पहुंचाकर वे अमेरिका के सबसे बड़े स्टॉक ब्रोकर बन गए। मेरिल – लिंच स्टॉक ब्रोकर्स की पहली चेन थी, जिसने शेयरों का स्वामित्व और पूंजीवाद के लाभ आम जनता तक पहुंचाए।

admin

आपने कीमती समय देकर ब्लॉग पढ़ा धन्यबाद, ये पोस्ट आपको पसंद आया हो तो शेयर करना न भूले, ताकि इसे ज्यादा से ज्यादा लोग पढ़ें, अपना विचार जरूर लिखे, इससे हमें और ज्यादा अच्छी और लेटेस्ट जानकारियाँ लिखने के लिए प्रेरित करेगा.

Leave a Reply

Your email address will not be published.